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बाखबर: बाहरी बनाम भीतरी

शुक्रवार की सुबह जिस वक्त अदालत अपराधियों की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रही थी, उससे पहले ही, लगभग सभी चैनल फांसी फांसी चिल्लाते दिखते थे। एक चैनल ने लाइन लिख कर सीधे अभियान ही चला डाला : उनको अभी लटकाओ!

नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) का जमकर हो रहा है विरोध। (Express photo)

नागरिकता संशोधन विधेयक पर संसद में लाइव बहसें जारी थीं। कुछ एंकर पहले से ही आश्वस्त थे कि सरकार के पास लोकसभा में तो प्रचंड बहुमत है ही, राज्यसभा में भी हो जाएगा। शिवसेना की पलटियों को लेकर कुछ एंकर कटाक्ष करते हैं कि अब देखें शिवसेना विधेयक को लेकर क्या ‘स्टैंड’ लेती है? राज्यसभा में विधेयक पर बहस करते हुए मनोज झा कहते हैं कि भारत को ‘इजराइल’ बनाया जा रहा है। चिदंबरम पूछते हैं कि क्या इस विधेयक को विधि विशेषज्ञों को दिखा लिया था? सुप्रीम कोर्ट इसे खारिज कर देगा! सबसे मनोरंजक हस्तक्षेप कांग्रेस के अधीर रंजन करते हैं, जो बात एक वाक्य में कही जा सकती है उसे कहने में वे दस मिनट लेते हैं, फिर भी समझ नहीं आता कि क्या कह रहे हैं? टीमएसी के डेरेक ओब्रायन पहले बंगाली में शुरू होते हैं, फिर अंग्रेजी में खत्म करते हैं। वे असम के ‘डिटेंशन कैंपों’ की तुलना हिटलर की ‘कंसेंट्रेशन कैंपों’ से करते हैं और नागरिकता के ‘महाप्लान’ की तुलना हिटलर के ‘मेडागास्कर प्लान’ से करते हैं। कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद कहते हैं कि पहले कश्मीर हुआ, अब सारा पूर्वाेत्तर जल रहा है।… आनंद शर्मा का कहना रहा कि आपने गांधी का चश्मा तो ले लिया, काश आप गांधी के चश्मे से दुनिया को देखते! एक और सांसद ने कहा : ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ खतरे में है। ‘हिंदू राष्टÑ’ बनाया जा रहा है।

ममता बनर्जी बांग्ला में गर्जना करती दिखती रहीं कि इस कानून को बंगाल में लागू नहीं होने देंगे। फिर केरल के सीएम विजयन और पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह कहते दिखे कि केरल, पंजाब में ये कानून नहीं लागू होंने देंगे। गृहमंत्री ने अपने जवाबी भाषण में आश्वस्त किया कि यह किसी की नागरिकता ‘लेने’ का नहीं, बल्कि ‘देने’ का विधेयक है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान में धार्मिक रूप से प्रताड़ित हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई आदि को नागरिकता देने की बात है। ये देश इस्लामिक हैं, इसलिए इनमें मुसलमान अल्पसंख्यक नहीं हैं, इसीलिए वे सूची में नहीं हैं और जो भारतवासी हैं, वे सब भारत के नागरिक हैं, किसी को नहीं निकाला जाएगा।

भाजपा के सांसद स्वप्नदास गुप्ता इस पर कटाक्ष करते हुए सफाई चाहते हैं कि क्या ऐसा संभव है कि कुछ राज्यों में कानून लागू न हो? जवाब आता है, यह सब पर लागू होगा। शुरू से ही एक हारी हुई बहस हारती दिखती है। आठ-नौ घंटे के तयशुदा समय में राज्यसभा में भी यह विधेयक पास हो जाता है! सीन बदल जाता है। एक ओर नए संभव नागरिक नाचते दिखते हैं, तो दूसरी ओर असम, त्रिपुरा में विरोध प्रदर्शन दिखने लगते हैं। आगजनी होती दिखती है। पुलिस आंसू गैस मारती दिखती है। सेना की टुकड़ियां सड़कों पर उतरती दिखती हैं। असम के डिब्रूगढ़, दिसपुर और गुवाहाटी से लेकर त्रिपुरा के अगरतला में लोग टूटी-फूटी हिंदी में अपनी व्यथा सुनाने लगते हैं कि ‘बाहरी को हियां लाता तो हम कहां जाता? ये बील एकदौम ठिक नेर्इं।…’

बृहस्पतिवार के प्राइम टाइम में एक एंकर देर तक चीखता-चिल्लाता दिखा कि निर्भया के अपराधियों को तुरंत फांसी पर लटकाया जाए, ताकि अपने चैनल पर वह उसे लाइव दिखा सके कि जब ऐसे दरिंदों को फांसी पर लटकाया जाता है, तो किस तरह उनकी जान निकलती है और किस तरह से उनकी जीभ मुंह से बाहर निकल कर लटक जाती है।… देर तक वह यही कहता रहा कि फांसी के बाद उनकी लटकती जीभों को वह बार-बार दिखाना चाहता है, ताकि हर रेपिस्ट के मन में इतनी दहशत भर जाए कि वे फिर कभी ऐसी दरिंदगी न कर सकें।

फिर उसे लगा कि इस तरह के ‘कंपटीटिव’ फांसी प्रसारण के लिए यह मांग तो बहुत कम है, क्योंकि ऐसा तो सब दिखाएंगे। इसलिए और भी उत्तेजित होकर बोलता रहा कि वह चाहता है कि इनके गले में फांसी का फंदा डाल कर उनकी ‘पब्लिक हैंगिंग’ की जाए, ताकि उनकी जीभ बाहर लटक जाए और वह इसी रूप में उनको लाइव दिखा सकें ताकि रेपिस्टों में दहशत भर जाए और फिर कोई रेप करने से पहले हजार बार सोचे। उसने कहा भी कि उसके लिए बदले का नाम है न्याय!
यों उसने अपने साथ दो पेशेवर जल्लाद बिठा रखे थे, लेकिन इस वक्त वह उनसे भी सवाया जल्लाद और लिंचर बना नजर आ रहा था। वह फांसी पर लटकाने का आनंद बेच रहा था। एक महिला वकील भी उसकी हां में हां मिलाए जा रही है, जबकि दोनों पेशेवर जल्लाद स्वयं शांत भाव से अंग्रेजी की यह हिंसक गिटपिट सुनते जाते थे।

जब एंकर ही जल्लाद बन जाए, जब एंकर ही फांसी पर लटके आदमी की जीभ को मुंह से बाहर लटकता देखने और दिखाने को उत्तेजित होता दिखे, तब न कोई डिबेट बचती है न तर्क-वितर्क बचता है, सिर्फ फांसी का तख्ता बचता है, जिस पर एंकर स्वयं रस्सी लिए खड़ा नजर आता है। शुक्रवार की सुबह जिस वक्त अदालत अपराधियों की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रही थी, उससे पहले ही, लगभग सभी चैनल फांसी फांसी चिल्लाते दिखते थे। एक चैनल ने लाइन लिख कर सीधे अभियान ही चला डाला : उनको अभी लटकाओ! निर्भया परिवार ने मांग की : उनको तुरंत लटकाओ! एक चैनल लाइन देने लगा : ‘इंडिया सेज नो मर्सी’ यानी भारत कह रहा है कि ‘कोई दया नहीं’! एक अन्य चैनल ने खबर ब्रेक की कि तिहाड़ जेल अधिकारियों ने जल्लाद को निमंत्रित किया है। राहुल ने ‘मेक इन इंडिया’ को एक रैली में ‘रेप इन इंडिया’ कह कर ताली ली, तो शुक्रवार की सुबह भाजपा के सांसद राहुल से माफी मंगवाने पर अड़ गए और शोर इतना हुआ कि अध्यक्ष जी को लोकसभा की बैठक कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी!

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