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तीरंदाज: आप मेरे दादू नहीं हो सकते

कुछ देर मैं सुन्न खड़ा रहा। फिर लंबी सांस लेने की कोशिश की। नहीं आई तो पानी में डुबकी मार ली। दम घुट गया। सारी फिजा जहरीली हो गई थी। देखते-देखते हम जड़ से लेकर नई कोंपल तक प्रदूषित हो गए हैं। मैं कंधों तक पानी में तो जरूर खड़ा था, पर डूब मरने के लिए चुल्लू भर पानी के लिए मोहताज था।

मुसलमान से बात करना उसके नन्हे से जीवन की अनोखी घटना थी…। प्रतीकात्मक तस्वीर। (एक्सप्रेस फोटो)

हेलो, अंकल!’ मैं स्विमिंग पूल के किनारे खड़ा अपनी चढ़ी सांस को बराबर करने के लिए पानी में डुबकियां मार रहा था कि वह अचानक कहीं से उभरा और उसने अपनी चौड़ी-सी दिल जीतने वाली मुस्कराहट मुझ पर वार दी। वह सात-आठ साल का बच्चा था, पर उसका अंदाज दिलफरेब दोस्ताना था। उसने एक और डुबकी लगाई और फिर मुंह से पानी का फव्वारा छोड़ते हुए कहा, ‘मैं आपको दो-तीन दिन से देख रहा हूं। आपसे बात करना चाहता हूं।’ ‘हां, बताओ!’ हमने दुलार से कहा। ‘अंकल, कुछ दिन पहले मैंने एक पिक्चर देखी थी… उसमें जो हीरो था, ठीक आप जैसा दिखता था।’ उसने एक सांस में कहा और पानी में कुछ पल के लिए अंतर्ध्यान हो गया। बच्चे की भोली-सी बात सुन कर हमारा मन प्रसन्न हो गया। चलो, किसी ने तो हीरो कहा!

जब वह निकला तो हम उससे पूछे बिना न रह पाए। ‘किस हीरो की बात कर रहे हो तुम?’ पता नहीं क्यों, एक क्षण के अंतराल में मन में कौंध गया था कि उसने जरूर एके हंगल को किसी फिल्म में देखा था और हम उसको हंगल जैसे लग रहे थे। ‘अंकल!’ उसने मेरे इर्द-गिर्द तैरते हुए कहा, ‘उस फिल्म में न, एक पायलट था, जिसका प्लेन क्रैश होने वाला था… प्लेन में न, बहुत सारे पैसेंजर्स थे… पर पायलट ने बड़ी बहादुरी से प्लेन को न्यू यॉर्क वाली जो नदी है न… हडसन नदी… उस पर उतार दिया था… सबको बचा लिया था… आप उस पायलट जैसे दिखते हैं।’ हम समझ गए। वह हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता टॉम हैंक्स की बात कर रहा था, जिसके बाल फिल्म में सफेद दिखाए गए थे। बच्चा डुबकी मार कर दूर निकल गया था, पर उसकी बात से मन बाग-बाग हो गया था। हम अपने को हंगल समझ रहे थे, पर उसकी निगाह में टॉम हैंक्स थे! जिंदगी में पहली बार लगा कि कोई कद्रदान मिला है। अलगे दिन वह जलीय देवता की तरह फिर अवतरित हो गया। ‘मैंने सोच लिया है, पर आपसे परमिशन लेना भी तो जरूरी है न…’ उसने मेरे चारों तरफ तैरते हुए कहा। ‘हां बेटा, बोलो।’ ‘क्या मैं आपको अंकल के बजाय दादू कह सकता हंू?’ बच्चे के मासूम सवाल पर हम लट्टू हो गए। ‘वाह! कितना उम्दा खयाल है। सुभान अल्लाह!’ हमारी जुबान से कुदरतन फिसल गया। बच्चा एकदम से हमसे दूर तैर गया। फिर रुका और पानी में खड़ी लगाते हुए कुछ देर हमको ताकता रहा। कुछ सोचने के बाद वापस आया, पर उसने हाथ भर का फासला बना कर पूछा, ‘क्या आप मुसलमान हैं?’ ‘क्यों पूछ रहे हो?’ ‘क्योंकि आपने अल्लाह कहा।’ ‘तो?’ ‘हिंदू अल्लाह थोड़ी ही कहते हैं।’ ‘बेटा, हमने सुभानअल्लाह कहा था, जिसका मतलब बहुत अच्छी बात है, होता है।’

बच्चे की आखों में शक उतर आया था। ‘पहले आप ये बताइए कि आप मुसलमान हैं कि नहीं?’ ‘उससे क्या फर्क पड़ता है? अब हम तुम्हारे दादू हैं।’ बच्चा थोड़ा और हट गया। ‘तो आप मुसलमान हैं।’ उसने निराशा से कहा। पता नहीं हमारे मन में क्या आया कि हमने अपने को मुसलमान कबूल लिया। उसका चेहरा लटक गया। उसकी मायूसी देख कर हमने उसे अपने से हिलाने की कोशिश की। ‘हम मुसलमान हुए तो क्या हुआ, तुम्हारे दादू जैसे ही तो हैं। यू लाइक मी ऐंड आई लाइक यू। हम दोस्त हुए न?’ बच्चे ने कुछ देर सोचा और कहा, ‘पर मुसलमान अच्छे नहीं होते हैं न?’ ‘क्यों?’ ‘सबको मार देते हैं।’ ‘नहीं, ऐसा नहीं है। वे लोग हिंदुओं की तरह ही अच्छे होते हैं। हम अच्छे लगे हैं न आपको?’ ‘हां, पर वे अच्छे नहीं होते हैं।’ उसने जोर देकर कहा, ‘टीवी पर रोज आता है… बम मारते रहते हैं… मुसलमान पाकिस्तानी हैं… पापा-मम्मी भी यही कहते हैं।’ ‘अच्छा ये बताओ, तुम किसी मुसलमान को जानते हो?’ ‘नहीं।’ उसने कहा। ‘स्कूल में तो होंगे ही?’ ‘कैसे होंगे?’ उसने तपाक से कहा, ‘वे स्कूल नहीं जाते हैं। उनके अपने स्कूल हैं। वे गरीब हैं। हमारे स्कूल अफोर्ड नहीं कर सकते हैं।’ ‘क्यों?’ ‘क्योंकि उनके दस-दस बच्चे होते हैं। आपके कितने हैं?’ ‘दो।’ ‘बस? इतने कम कैसे?’ ‘बस, ऐसे ही’, हमने हंस कर कहा।’ तभी आप इस सोसाइटी में रहते हंै! और आप मुसलमान जैसे दिखते भी नहीं हैं।’ ‘तुमने मुसलमान पहले कभी देखा है?’ ‘हां, देखा है… पापा ने एक बार दिखाया था।’ उसने उत्साह से कहा। ‘कहां देखा था?’ ‘दिल्ली में। हम लोग एक बार चांदनी चौक गए थे। बहुत सारे कहीं से निकल रहे थे। सब टोपी लगाए हुए थे। आप टोपी लगाते हैं?’ ‘नहीं।’ ‘तभी मैं पहचान नहीं पाया था।’ उसने कहा और फिर अपनी बात पर हंस कर माथा ठोक लिया, ‘मैं भी बेवकूफ हूं… स्विमिंग पूल में कोई टोपी लगाता है भला! पर आपके दाढ़ी भी तो नहीं है, कैसे पहचानता?’

हम भी हंस दिए और फिर चिढ़ाया, ‘विराट कोहली भी तो दाढ़ी रखता है।’ ‘उसकी बात अलग है। वह हिंदू है। उसकी दाढ़ी ठीक है।’ हमारी बातचीत तो चल रही थी, पर वह औपचारिक हो गया था। दादू तो दूर, उसने मुझे अंकल भी कहना बंद कर दिया था। वह शायद अभी तक मेरे साथ इसलिए टिका था, क्योंकि मुसलमानों के बारे में वह अपना कौतूहल शांत करना चाहता था। मुसलमान से बात करना उसके नन्हे से जीवन की अनोखी घटना थी- एक ‘एडवेंचर’-सा था, जिसके बारे में वह घर जाकर मम्मी को एक सांस में बता सकता था। ‘अच्छा मैं चलता हूं’, उसने कहा, ‘आप मुसलमान तो हैं, पर आप प्लेन वाले हीरो लगते हैं।’ उसने जाते-जाते मुस्करा कर कहा। उसकी इस अदा पर हमें प्यार आ गया। हम उसके सिर पर हाथ फेरने के लिए बढ़े, तो वह पीछे हट गया। पर हमने हौसला नहीं हारा। ‘कल जब मिलना तो हमें दादू कह कर पुकारना।’ हमने बड़ी संजीदगी से इल्तजा की। ‘आप मेरे दादू नहीं हो सकते। आप मुसलमान हैं।’ उसने धीरे से कहा। ‘हम हो सकते हैं, क्योंकि हम हिंदू हैं। हम तो ऐसे ही अपने को मुसलमान कह रहे थे, तुमको समझाने के लिए कि हिंदू, मुसलमान एक जैसे ही होते हैं। कोई फर्क नहीं है दोनों में।’ ‘आप झूठ बोल रहे हैं। आप हिंदू नहीं हैं। मैं पहचान गया हूं, हिंदू मुसलमान एक जैसे नहीं होते हैं। वे बच्चों को भी मार देते हैं।’ उसने बिदक कर कहा और फर्रांटे से तैरता हुआ दूर निकल गया। हम अवाक देखते रह गए। कुछ देर मैं सुन्न खड़ा रहा। फिर लंबी सांस लेने की कोशिश की। नहीं आई तो पानी में डुबकी मार ली। दम घुट गया। सारी फिजा जहरीली हो गई थी। देखते-देखते हम जड़ से लेकर नई कोंपल तक प्रदूषित हो गए हैं। मैं कंधों तक पानी में तो जरूर खड़ा था, पर डूब मरने के लिए चुल्लू भर पानी के लिए मोहताज था।

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