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जहरीली सोच को रोकने का वक्त

जिहादी सोच जहरीली है, हिंसक है, इसमें दो राय नहीं। लेकिन इसे रोकने के लिए भारत सरकार के आला अधिकारियों को साबित करना होगा कि वे निष्पक्ष हैं और वे मुसलमानों के साथ अन्याय करने पर तुले हुए नहीं हैं।

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नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग करते मुस्लिम समुदाय के लोग (फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)

अजीब संयोग है कि जिस सप्ताह उदयपुर में हमने भारत की पहली जिहादी शैली की हत्या का दृश्य देखा, उस सप्ताह फ्रांस में उन जिहादियों को सजा हुई, जिन्होंने 13 नवंबर, 2015 को पेरिस में कई जगहों पर बेगुनाह लोगों को मारा इस्लाम के नाम पर। फ्रांस में सबसे बड़ी जिहादी हमले को अंजाम दिया आत्मघाती हमलावरों ने सुनियोजित तरीके से।

फ्रांस की राजधानी में एक फुटबाल स्टेडियम, एक संगीत समारोह समेत कई आम जगहों पर हमले हुए उस रात, जिनमें 137 लोग मारे गए थे। हमलावरों में से एक जीवित रहा, जिसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई उदयपुर के कन्हैया लाल की हत्या के एक दिन बाद। जिहादी हमले भारत में हुए हैं कई बार, जिनमें 26/11 वाला हमला सबसे भयानक था। कश्मीर में काफी सालों से जिहादी आतंकवाद के कारण बेगुनाह लोगों की जानें गई हैं। लेकिन कन्हैया लाल की हत्या अलग इसलिए है कि पहली बार उसको मारने का तरीका वही था, जो इस्लामी मुल्कों में इस्तेमाल होता है, जब किसी को फांसी दी जाती है, यानी सिर काट कर।

अलग इसलिए भी है कि हत्यारों ने इस बेगुनाह दर्जी की हत्या का वीडियो सोशल मीडिया में प्रसारित कर दिया, जिसमें दोनों हत्यारे दिखते हैं ऐसे मुस्कुराते हुए, जैसे कोई नेक काम करके मुस्कुरा रहे हों। इस बर्बर हत्या को वे नेक काम मानते हैं इसलिए कि उन्होंने पैगम्बर की शान में यह हत्या की थी। राजस्थान पुलिस ने जानकारी दी कि हत्यारों का वास्ता पाकिस्तान में एक कट्टरपंथी इस्लामी संस्था से है और यह भी बताया गया कि गौस मोहम्मद और रियाज दोनों पाकिस्तान गए थे जिहादी प्रशिक्षण प्राप्त करने।

ये सब बातें जांच होने के बाद तय होंगी, लेकिन जिस चीज की चिंता हमें आज करनी चाहिए वह यह है कि इस किस्म की जिहादी हत्या पहली बार हुई है भारत में आइएसआइएस द्वारा की गई हत्याओं की नकल करके। आइएसआइएस से सीखा है अन्य जिहादी संस्थाओं ने अपनी बर्बरता के वीडियो इंटरनेट पर डालना, यह संदेश देने के लिए कि कट्टरपंथी इस्लाम असली इस्लाम है और उसका विरोध नहीं हो सकता।

आइएसआइएस की जब अपनी सेना थी, तो उसमें भर्ती होने हजारों मुसलमान गए थे यूरोप, अमेरिका और इस्लामी देशों से, लेकिन भारत से कम नौजवान गए थे। अधिकतर केरल से गए जहां जिहादी इस्लाम का असर ज्यादा दिखता है। उदयपुर में अचानक इस किस्म की जिहादी हत्या का होना वास्तव में चिंता का विषय है।

जिस दिन यह हत्या हुई, मुझे एक वेब कार्यक्रम में पूछा गया कि मेरी नजर में यह आतंकवाद है या सिर्फ नूपुर शर्मा के उस बयान की प्रतिक्रिया, जिसके कारण भारत सरकार को कई इस्लामी मुल्कों से माफी मांगनी पड़ी। मेरी राय उस समय थी कि यह जिहादी आतंकवाद का हिस्सा नहीं माना जा सकता। मैं गलत थी। इस हत्या से साबित होता है कि कट्टरपंथी इस्लामी सोच अब भारत में कदम रख चुका है और अगर इसको रोकने की जबरदस्त कोशिश अभी से शुरू नहीं की जाती है तो परिणाम भयानक होंगे।

अफसोस हुआ मुझे जब भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं और मोदी समर्थकों ने कन्हैया लाल की हत्या पर फौरन राजनीतिक रंग चढ़ाने की कोशिश की यह कह कर कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने चूंकि ‘तुष्टिकरण’ की नीतियां अपनाई हैं, इसलिए जिहादी हत्यारों के हौसले बुलंद हुए हैं। यह समय नहीं है राजनीति करने का, यह समय है इस जहरीली सोच को रोकने का।

इसको रोकने का सबसे अच्छा सुझाव दिया केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने। उन्होंने कहा कि इस तरह की सोच की जड़ें उन मदरसों में हैं, जहां सिखाया जाता है कि इस्लाम के रसूल के साथ कोई गुस्ताखी करता है तो उसकी जान लेनेवाले सवाब पाएंगे जन्नत में। मेरी राय में सबसे पहले इन मदरसों की जांच करवाई जाए, ताकि मालूम हो कि इनमें क्या सिखाया जा रहा है बच्चों को।

दूसरा कदम होना चाहिए राष्ट्रीय स्तर पर उस नफरत के माहौल को समाप्त करना जो पैदा हुआ है जब से भारत में एक हिंदुत्ववादी प्रधानमंत्री ने देश की बागडोर संभाली है। लेकिन खास तौर पर 2019 के बाद ‘न्यू इंडिया’ में मुसलमानों को हर तरह से निशाना बनाया गया है।

उनके घर तोड़े गए हैं, शहरों के नाम अगर मुसलिम हैं तो उनको बदला गया है, उर्दू को विदेशी भाषा साबित करने की कोशिश हुई है और कर्नाटक में हलाल मांस के नाम पर मुहिम चलाई गई है। इसके अलावा, मुसलिम बुद्धिजीवियों के खिलाफ खास कार्रवाई हुई है। पिछले हफ्ते जुबैर मोहम्मद को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया, उनके एक पुराने ट्वीट को लेकर और अब उसकी जांच ऐसे की जा रही है, जैसे वे कोई आतंकवादी हों। उन्होंने अपनी वेबसाइट ‘आल्ट न्यूज’ पर केवल झूठी खबरों का पर्दाफाश करने की कोशिश की है।

हां, उन्होंने नूपुर शर्मा के उस बयान को ट्वीट जरूर किया, जिसमें भाजपा की इस प्रवक्ता ने पैगम्बर का अपमान किया। लेकिन वे न भी करते तो किसी और ने जरूर कर दिया होता। समझना मुश्किल है कि जुबैर को अगर गिरफ्तार किया जा सकता है तो नूपुर को क्यों नहीं!

जिहादी सोच जहरीली है, हिंसक है, इसमें दो राय नहीं। लेकिन इसको रोकने के लिए भारत सरकार के आला अधिकारियों को साबित करना होगा कि वे निष्पक्ष हैं और वे मुसलमानों के साथ अन्याय करने पर तुले हुए नहीं हैं। नरेंद्र मोदी के इस दौर में उनके कई वरिष्ठ साथी ऐसे बयान देते आए हैं, जिनसे स्पष्ट है कि उनकी नजरों में सब मुसलमान गद्दार हैं, सो पूरी कौम को दंडित करना चाहिए उदयपुर जैसी घटना के बाद। ऐसा करते रहेंगे तो लाभ पहुंचेगा जिहादियों को, जिनके लिए आसान होगा अपनी बर्बर सेना में युवकों की भर्ती करना।

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