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राष्ट्र सारा देखता है

एक सरकारी प्रवक्ता घोषणा करता है : अभी तीसरी लहर भी आनी है, लेकिन कब? नहीं जानते! जब नहीं जानते कि कब आएगी तो बताते क्यों हो? डराते क्यों हो? आपसे दूसरी निपट नहीं रही और तीसरी की बात कर रहे हो!

covid19: कोरोना की दूसरी लहर बेकाबू हो गई है। (Express Photo: Tashi Tobgyal)

एक मई : बिस्तर के अभाव में एक अस्पताल के आगे एक औरत दम तोड़ती है। एक बेटा अपने बाप के लिए अपना बेड छोड़ता है। एक ऑटो में एक मां अपने बेटे का सीना सहलाती कहती जाती है- मेरा बेटा मरने वाला है, मदद करो। मदद दूर-दूर नहीं है। चौदह राज्य एक मई से टीका अभियान नहीं कर सकते, क्योंकि टीका नहीं है। बिहार के एक अस्पताल में कई मरीज अस्पताल के फर्श पर अपनी सांसें गिन रहे हैं। यूपी का हाल बेहाल है। हां, लूट की छूट है। एंबुलेंस लूटती हैं। नकली ऑक्सीजन सिलिंडर बेचने वाले लूटते हैं। आम आदमी लुट रहा है, मर रहा है! और कोई बचाने वाला नहीं!

कोविड चार लाख मामले देता है! विदेशी मीडिया जम के कूटता है, तो भक्त चैनल उसे कूटते हैं। नकली रेमडिसिविर पच्चीस हजार से पैंतीस हजार रुपए में बिकते हैं। बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से आठ मर जाते हैं। जीटीबी में ऑक्सीजन की कमी है। लखनऊ में चिताएं लाइन में जल रही हैं। यूपी में गांव-गांव फैला है कोविड, आंकड़े डरावने हैं। बिहार का भी यही हाल है!

दो मई : चुनाव परिणाम। भाजपा बंगाल हारती है। ममता जीतती हैं। चर्चक कहते हैं कि यह भाजपा के अंत की शुरुआत है! किसने हराया? कोविड, किसान और अहंकार ने हराया! वह असम जीती, पुडुचेरी जीती। तमिल में डीएमके जीती। केरल में सीपीएम जीती, लेकिन जो बंगाल में हारे वे मानो सब कुछ हारे!
अदालतें लताड़ती हैं : पानी सिर के ऊपर से गुजर गया है। केंद्र दिल्ली को जरूरी ऑक्सीजन तुरंत दे! सरकार देने लगती है!

दिल्ली में बंदी बढ़ी। एक वैश्विक महामारी विशेषज्ञ कहता है : पूरे भारत को बंद करो वरना… कई एंकर कहते हैं- अखिल भारतीय बंदी जरूरी! लेकिन कोई फैसला नहीं!

तीन मई : बंगाल चुनाव परिणाम के बाद की हिंसा में आठ लोग मारे गए हैं। भाजपा कहती है टीमएसी ने मारे हैं, टीएमसी कहती है कि भाजपा ने मारे होंगे… मैं शपथ लूंगी तो रोकूंगी। एक प्रवक्ता कहता है कि बंगाल में दो चार दिन तो यह होता ही है।

उधर कोविड मारता है। इधर ‘तू तू मैं मैं’ की राजनीति मारती है। नीति बनती रहती है। राजनीति चलती रहती है। लोग रोते गिड़गिड़ाते और मरते रहते हैं। लेकिन कहीं से भी राहत की खबर नहीं आती! कोई हिम्मत नहीं बंधाता! कोई रक्षक नहीं दिखता। सब भक्षक दिखते हैं।

जिसे टीका बनाना है वह इंग्लैंड चला गया है और वहीं से कह रहा है कि इतनी जल्दी नहीं बना सकते। सारा राष्ट्र ब्लैकमेल हो रहा है। गुस्सा बढ़ता है! विशेषज्ञ कहते हैं : दूसरी लहर से निपटना है तो टीकाकरण तेज करो। लेकिन टीका हो तो तेज हो!

चार मई : नौ राज्य लाकडाउन में। राष्ट्रीय बंदी की मांग पर बहस। एक कहता है : ऐसी बंदी ठीक नहीं। दूसरा कहता है: अगर न किया तो सत्यानाश तय है।

एक किंकर्तव्यविमूढ़ता-सी बरपा है! क्या इसी दिन के लिए सरकारें चुनीं? एक चर्चक गुस्से में पूछता है। राहुल का ट्वीट है : सरकार की लापरवाही से लोग मर रहे हैं।

इस बीच ‘दाल भात में मूसलचंद’ वाली बात होती है। कंगना बंगाल की हिंसा पर टीएमसी से पंगा ले लेती हैं। ट्विटरवाला कंगना के ट्वीटों को ‘नफरतिया’ मान कर अकाउंट को हमेशा के लिए बंद कर देता है। बहसें ट्विटर के मालिक के वामपंथी होने को कोसती हैं!

किसी ‘रहम’ की तरह विदेशी मदद आती है तो बंटने पर भी झगड़ा है! कोविड से लड़ने की जगह सब आपस में लड़ते हैं!

आईसीएमआर कहता है : हम पहले ‘एंटीजेन टेस्ट’ कराएं ताकि आरटीपीसीआर पर दबाव कम हो। एम्स के निदेशक गुलेरिया कहते हैं : एक सीटी स्कैन तीन सौ एक्स रे के बराबर होता है। यह खतरनाक है। पहले एंटीजेन टेस्ट कराएं। जरूरी हो तो आरटीपीसीआर टेस्ट कराएं! संक्रमित घर पर ही आइसोलेशन मे रहें, अनिवार्य हो तो अस्पताल आएं। यूपी के पंचायत चुनावों में भाजपा दूसरे नंबर पर! एक चर्चक कहता है कि सब किसान और कोविड का प्रसाद है!

पांच मई : ममता शपथ लेती हैं। हिंसा के लिए मना करती हैं, फिर भी होती रहती है। भाजपा समर्थक बंगाल से हंकाले जा रहे हैं। असम में शरण ले रहे बताए जाते हैं! एक चर्चक कहता है : बंगाल कश्मीर बन रहा है!

छह मई : संक्रमितों की संख्या चार लाख के पार! और बहसें टीके की नीति-अनीति पर अटकती है। नीति की जगह सत्ता और विपक्ष की नीयत पर चर्चा हो तो बेहतर!

एक सरकारी प्रवक्ता घोषणा करता है : अभी तीसरी लहर भी आनी है, लेकिन कब? नहीं जानते! जब नहीं जानते कि कब आएगी तो बताते क्यों हो? डराते क्यों हो? आपसे दूसरी निपट नहीं रही और तीसरी की बात कर रहे हो! जब अभय नहीं दे सकते तो डराते क्यों हो?
‘हो रही अनरीत बर्बर, राष्ट्र सारा देखता है!’ (केदारनाथ अग्रवाल)

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