उदारता का अंत

इतिहास की कैसी विडंबना कि जो अमेरिका ‘9/11’ के लिए बीस साल तक ‘अल-कायदा’ के जिहादियों को ढूंढ़ता और पीटता रहा, उसी अल-कायदा, उसके पिट्ठू तालिबान और आइएसआइएस ने ‘9/11’ के दिन ही अफगानिस्तान में अपनी जिहादी सरकार का शपथ समारोह रखा, जिसमें रूस, चीन, ईरान, तुर्की आदि को आमंत्रित किया!

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अफगानिस्तान में एक चेक प्वाइंट पर खड़ा तालिबानी लड़ाका (फोटो-रॉयटर्स)

एक ‘फिल्मी उदारवादी’ कहिन कि संघ, भाजपा, तालिबान की मानसिकता में कोई फर्क नहीं है… शुरू हो गई हाय हाय! जलाया जाने लगा पुतला और दे दी गई धमकी कि अगर माफी नहीं मांगी तो उनकी या उनके परिजनों की कोई पिक्चर नहीं चलने देंगे… पूरे दो दिन मुकर्रर रहीं इस अनमोल वचन पर बहसें कि तालिबान और हिंदुत्व की मानिसिकता एक जैसी! एक चर्चक ने कहा कि अगर आरएसएस तालिबान जैसा होता तो क्या आप ऐसी बकवास कर रहे होते?

दूसरा चर्चक बोला कि उन्होंने यह बात तालिबान की जिहादी मानसिकता पर पर्दा डालने के लिए की! वे तालिबान की जिहादी मानसिकता को ‘नार्मलाइज’ करना चाहते हैं! ऐसे ही गुस्साए मौसम में एक दिन एक किसान नेता ने एक चैनल पर आकर उसी चैनल की एंकर को सत्ता का दलाल कहा, जब एंकर ने इसका तीखा जवाब दिया तो बोले कि उधर एंकर के पीछे बंदूक ताने तालिबान खड़े हैं, इधर परदे के पीछे तालिबान खड़े हैं… कैमरा और कलम पर पहरा है…

ऐसे ही बिगड़े मौसम में एक सीएम जी के पिताश्री ब्राह्मणों पर ही पिल पड़े कि ब्राह्मणों को देश से बाहर भगाओ… होने लगी हाय हाय! ब्राह्मण बोले कि ब्राह्मण का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान! अंत में बेटाश्री ने कराया पिताश्री को गिरफ्तार! एक ओर ब्राह्मणों को बाहर भगाने की बातें, दूसरी ओर मायावती का लखनऊ में ‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ जिसमें ब्राह्मणों को सुरक्षा देने की बात कही गई! चुनाव जो न करा दे वो थोड़ा!

एक कश्मीरी नेता कहिन कि तालिबान शरीआ से काम करेंगे, लेकिन किसी ने पूछा कि मैडम! अगर यहां ‘शरीआ’ लागू होती तो क्या आप कभी सीएम होतीं? फिर एक दिन झारखंड सरकार ने बड़ी खबर बनाई कि विधानसभा परिसर में एक कमरा ‘नमाज’ के लिए दिया! गजब का ‘सेक्युलरिज्म’! एक धर्म गोद ले लिया, दूसरे ने कहा तो उसे ठुकरा दिया! भाजपा वाले बोले कि हमें हनुमान मंदिर के लिए कमरा दो, तो आध्यात्मिकता का छौंक लगा दिया गया कि आपके भगवान तो हर कहीं हैं, कमरे की जरूरत क्या?

एक दिन एक चैनल ने तालिबान की ‘असीम करुणा’ का किस्सा दिखाया-सुनाया कि किस तरह ऐन सड़क पर एक महिला पुलिस के सिर में स्क्रू ठोक कर उसे मरने के लिए छोड़ दिया गया! फिर भी कुछ बुद्धिजीवियों से लिए ‘तालिबान बदले हुए’ हैं! जवाब में एक चर्चक ने ऐसे उदारतावादी जी को सुझाया कि कुछ दिन काबुल में रहने चले जाओ तब बताना वे कितने बदले हैं? उनकी सारी उदारता चुप्पी साध गई! जबसे यूपी चुनाव एजेंडे पर आए हैं, तबसे हर तरफ ‘सोशल इजीनियरिंग’ चल रही है! शायद इसी खातिर संघ के मोहन भागवत ने मुसलमान बुद्धिजीवियों से बात करते हुए कहा कि हम सबके पुरखे एक ही हैं! एक मुसलमान बुद्धिजीवी ने इसकी पुष्टि भी की!

गजब के विमर्श छिड़े हैं : एक ओर तालिबान, दूसरी ओर किसान! दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय! इसीलिए मुजफ्फरनगर की किसान महापंचायत भाजपा विरोधी राजनीतिक सभा में बदलती दिखी। मुजफ्फरनगर की महापंचायत ने किसान आंदोलन में जान डाल दी है। वे ‘करनाल’ का बदला चाहते हैं। वे करनाल में पहले रैली निकालते हैं, फिर मिनी सचिवालय पर घेराव करते हैं और फिर उसे ही स्थायी धरने में बदल देते हैं और ठसके के साथ कहते हैं कि अब वे तभी हटेंगे जब सारी मांगें मान ली जाएंगी!

एक नेता कहता है कि एक दो नहीं, दस बीस शहरों में ऐसा होना चाहिए! एक चैनल इस धरने को ‘शाहीनबाग टू’ कहता है! और इतिहास की कैसी विडंबना कि जो अमेरिका ‘9/11’ के लिए बीस साल तक ‘अल-कायदा’ के जिहादियों को ढूंढ़ता और पीटता रहा, उसी अल-कायदा, उसके पिट्ठू तालिबान और आइएसआइएस ने ‘9/11’ के दिन ही अफगानिस्तान में अपनी जिहादी सरकार का शपथ समारोह रखा, जिसमें रूस, चीन, ईरान, तुर्की आदि को आमंत्रित किया!

एक एंकर ने सही कहा कि यह ऐसी अद्भुत सरकार है, जिसमें जो जितना बड़ा आतंकी है, उतना ही बड़ा मंत्री है। एक हैं जो अल-कायदा का सरगना हैं, जो अमेरिका की ‘गुआंतानामो बे’ में कैदी थे, जिनको एक अमेरिकी सैनिक की रिहाई के एवज में छोड़ा गया! और दूसरे हैं गजब के शिक्षामंत्री जो दो-टूक कह चुके हैं कि हमें एमए, पीएचडी की जरूरत नहीं। हमीं ने कौन-सी पीचडी कर रखी है, लेकिन आज सत्ता में हैं। उनकी कृपा से ‘सह शिक्षा’ खत्म! एक मंत्री कहता है कि महिला का काम है बच्चे पैदा करना, पढ़ना-लिखना नहीं! और कथित उदारतावादी इस सब पर मुग्ध हैं, मानो मन की मुराद पूरी हुई। यह उदारता का अंत है! बात की जगह बंदूकें बात करती हैं!

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