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जहां जहां पैर पड़ें संतन के

एक दिन फ्रांस ने खबर दी कि वह ‘इस्लामिज्म’ को प्रतिबंधित करने जा रहा है। दो चैनलों ने इसे लपका और प्राइमटाइम की बहसों का विषय बना दिया और एंकर और कई चर्चक यह मांग करते-करते रुक गए कि अपने यहां ऐसा कानून कब बनेगा?

Puducherryपुदुचेरी के सीएम ने उपराज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा। (PTI)।

एक दिन रामदेव जी का। बगल में स्वास्थ्यमंत्री और गडकरी जी और सामने कोरोनिल और एक चैनल! चैनल की रेंगती लाइन में लिखा आया कि रामदेव की ‘कोरोनिल’ को डब्ल्यूएचओ ने ‘सहायक दवा’ के रूप में ‘ओके’ कर दिया है। रामदेव अपनी फार्म में थे, लेकिन उनका ठेठ देसीपन एक ‘अंग्रेज’ चैनल को न भाया!
डॉक्टरों की एक संस्था ने फंसट डाली और चैनल ने इसी फंसट को अपना विषय बना लिया। एंकर पूछता रहा कि डब्ल्यूएचओ के ‘एप्रूवल’ का प्रमाण क्या? कोरोनिल की रिसर्च से जुड़े एक डॉक्टर देर तक एंकर को शांति से समझाते रहे कि भाई साहब! हमारे पास सभी प्रमाण हैं।

इसी बीच निजी अस्पतालों में पैंतालीस और साठ वर्ष से उपर के ‘रोगिल’ (मोरबिड) लोगों के लिए, फीस देकर टीका लगवाने की व्यवस्था की खबर आई और कई निजी विशेषज्ञों के चेहरे खिल गए!

पिछले दस दिन से तेल की कीमतें रोज बढ़ाई जाती रहीं। मिडिल क्लासी कहानी पकड़ने रिपोर्टर सीधे पेट्रोल पंपों के पास जाते। सौ रुपए प्रति लीटर तेल भरवाने वालों से पूछते कि ‘कैसा लग रहा है?’ और दाम से नाखुश लेकिन कैमरों के आने से खुश दिखते लोग बोलते कि परेशानी तो है, लेकिन हमें तो काम पर जाना ही है न!
चैनल चाहते कि लोग नाराज दिखें, लेकिन लोग थे कि चैनलों के चाहने पर भी उतने असंतुष्ट न दिखे जितना चैनल चाहते हैं!

इन दिनों किसान नेता टिकैत को सुनना अनिवार्य है। वे गरम-गरम बोलते हैं। एक चैनल पर वे देर तक बोलते रहे कि इस बार चार नहीं, चालीस लाख ट्रैक्टर आएंगे, दिल्ली में आएंगे!

कितना मजा है! बंदा रोज धमकी देता रहता है और सरकार धमकी रहती है! कितनी सहिष्णु है हमारी सरकार!
एक दिन फ्रांस ने खबर दी कि वह ‘इस्लामिज्म’ को प्रतिबंधित करने जा रहा है। दो चैनलों ने इसे लपका और प्राइमटाइम की बहसों का विषय बना दिया और एंकर और कई चर्चक यह मांग करते-करते रुक गए कि अपने यहां ऐसा कानून कब बनेगा? ऐसा यूनीवर्सल सिविल कोड कब लागू होगा?

फिर एक दिन खबर चैनल जोश में आए और लक्खा सिडाना को पकड़ने में लगे रहे।
लाल किले का आरोपित सिडाना। एक लाख का इनामी सिडाना!

सिडाना अंडर ग्राउंड। सिडाना ओवर ग्रांउड। सिडाना बठिंडा में आया। सिडाना बठिंडा में आया। सिडाना मंच से बोला। सिडाना बोला कि हिम्मत हो तो पकड़ के दिखाओ!

चैनल चिल्लाए पकड़ो! सिडाना को पकड़ो! सिडाना को पकड़ो! वह न मिले तो राहुल कोे पकड़ो! राहुल जवाब दें! राहुल जवाब दें!

एक एंकर ने अतिया कर भाजपा के प्रवक्ता से कहा कि भाईजी! कांग्रेस को कोसिए, मगर यह बतलाइए कि दिल्ली पुलिस जाकर सिडाना को क्यों नहीं पकड़ती? किसी ने मना किया है क्या?

मगर, जो मजा न पकड़ने में, वह पकड़ने में कहां? पकड़ लिया तो ठोकेंगे किसे?
एक दिन राहुल जी के चरण ज्यों ही पुदुुचेरी पर पड़े त्यों ही कांग्रेस की चलती सरकार गिर गई। कांग्रेस के दो एमएलए ने मानो राहुल जी के स्वागत में कांग्रेस छोड़ कर ‘भाजपा शरणम् गच्छामि’ किया और पुदुचेरी की कांग्रेस सरकार गिरा दी!

सच कहा है : ‘जहां जहां पैर पड़ें संतन के तहां तहां पनिया ढार’!
उसके बाद राहुल भैया ने केरल गमन किया और बोल दिए कि दक्षिण के मतदाता सतही नहीं हैं, वे मुद्दों को गहराई से समझते-सोचते हैं… एंकरों ने व्यंजना पकड़ी और ठोकने लगे कि राहुल ने उत्तर भारतीयों का अपमान किया।

कांगेसी संत जन परेशान कि बबुआ का क्या करें? आनंद शर्मा कहिन कि उनकी वो जानें। सिब्बल भी असहमत! भाजपा की तोपें चलीं धायं धायं और राहुल ढेर!

फिर एक दिन दिशा रवि को अदालत ने जमानत दे दी और कहा कि दिशा के खिलाफ जो प्रमाण दिए, वे एकदम छिछले और सतही हैं। नागरिक सरकार से असहमति रख सकते हैं। सरकार को दुरभिमानी नहीं होना चाहिए। आज संचार के लिए भौगालिक सीमाएं नहीं हैं। विदेशों में भी आपकी आॅडिएंस होती है। देशद्रोह का कानून ऐसे ही नहीं लागू किया जा सकता…

इस बीच मोटेरा के पटेल खेल कॉपलेक्स में दुनिया के एक सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम को प्रधानमंत्री के नाम से कर दिया गया, तो कांग्रेस को ठोकने का मौका मिल गया! एक चर्चक ने सही कहा : जो बीमारी उधर थी वो इधर भी आ रही है…

फिर एक दिन केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद तथा सूचना मंत्री जावडेकर ने सोशल मीडिया और ओटीटी डिजिटल प्लेटफार्मों को नांथने के लिए एक नया रेगुलेशन प्रस्तावित कर दिया और कई चैनलों में हाय हाय मचवा दी।

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