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पहले मारे सो मीर

युद्ध को दिखाने में भी चैनलों में प्रतियोगिता है। इस चक्कर में कुछ का कुछ हो जाता है! एक एंकर दिखाने लगता है कि रूसी टैंक ‘कीव’ की सड़कों पर दौड़ रहे हैं, फिर कुछ देर बाद कहता है कि यह खबर पक्की नहीं है। इसी तरह एक एंकर लात्विया में खड़े अमेरिकी जहाजों को यूक्रेन में दिखा देता है।

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यूक्रेन की सेना नहीं करेगी रूस के सामने समर्पण- यूक्रेनी राष्ट्रपति (फोटो- एपी)

अब न ‘हिजाब’ की कहानी की चर्चा है न ‘हर्षा हिंदू’ के मर्डर की कहानी की चर्चा है और न नवाब मलिक के कथित धनशोधन और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तारी की कहानी की चर्चा है।
सारे चैनल पुतिन की लिखी ‘युद्ध कथा’ को ‘लाइव’ दिखा रहे हैं। वही सारी चर्चाओं के केंद्र में है : एक दिन खबर टूटती है कि रूस ने यूक्रेन के दो प्रांतों ‘दोनबास’ और ‘लुहान्स्क’ यूक्रेन से अलग कर दिए हैं। रूस ने उनको मान्यता दे दी है।

एक एंकर कहता है कि कल को चीन अरुणाचल को हमसे अलग कह दे, तो क्या होगा? बृहस्पति की सुबह फिर खबर आती है : रूस की फौजें यूक्रेन में घुस गई हैं। उसके सामरिक ठिकानों को ध्वस्त कर रही हैं।
कुछ विशेषज्ञों की नजर में इस हमले के बाद पुतिन सबसे अधिक ताकतवर विश्वनेता हैं। वे दबंग हैं। जो कहते हैं, करते हैं। पीछे नहीं हटते। उनको मालूम है कि अफगानिस्तान की पिटाई के बाद अमेरिका अपने सैनिक भेजेगा नहीं। नाटो भी खाली फूंफां करेगा, लेकिन लड़ेगा नहीं।

कहते हैं, ‘पहले मारे सो मीर’! पुतिन ने सोचा कि यही मौका है जब हमला बोला जा सकता है और यूक्रेन में अपने पक्ष का निजाम बिठाया जा सकता है। इससे नाटो भी अपनी असली औकात देख लेगा। इसलिए पुतिन ‘नई विश्व व्यवस्था’ बना रहे हैं। चीन उनके पीछे खड़ा है।
सुबह से शाम तक हर खबर चैनल युद्ध की खबरें देने में व्यस्त है, जैसे दुनिया में और कोई खबर ही न हो! अपने खबर चैनल आधे परदे पर हमले के ‘लाइव’ फुटेज दिखाते हैं, तो आधे पर युद्ध संबंधी चर्चाएं कराते हैं।

देशी-विदेशी युद्ध विशेषज्ञ पुतिन के हमले के मानी समझाते रहते हैं। स्क्रीन के एक हिस्से में युद्ध के घमासान लाइव दिखाते रहते हैं : रूसी युद्धक-हेलीकाप्टर यूक्रेन के आकाश पर अपना राज कायम कर चुके हैं। रूसी मिसाइलें यूक्रेन के सामरिक ठिकानों पर गिर कर उनको ध्वस्त कर रही हैं। आग और धूल-धुएं के बादल उठ रहे हैं!

एक दृश्य में एक छोटा बच्चा साइकिल चलाता दिखता है, फिर एक पल बाद उसके पास एक गोला गिरता है और वह कुछ दूर मरा पड़ा दिखता है। चैनल इसे जल्दी ही फोकस से बाहर कर देते हैं। एक वृद्ध औरत का लहूलुहान चेहरा बार-बार दिखाया जाता है, दूसरी रोती हुई दिखती रहती है।
आजकल ऐसे दृश्य हममें करुणा भी नहीं जगाते! कुछ एंकर इसमें ‘तीसरे विश्व युद्ध’ के ‘ट्रेलर’ की तरह देख रहे हंै। लगता है कि आजकल हम सबको युद्ध पसंद हैं, लेकिन वह जो हमसे दूर हो!

यूक्रेन में पढ़ने वाला एक भारतीय छात्र रोते हुए कहता है कि हम लोग बेहद डरे हुए हैं, हमें भारत बचाए। एक हवाई जहाज कुछ को लेकर लौटा है, उसके बाद से एअरपोर्ट बंद है। बहुत से छात्र मजबूरन भूमिगत रेलवे स्टेशनों में बैठे हैं। निकालने के दूसरे उपाय जारी हैं। रक्षामंत्री बताते हैं।
पुतिन के अचानक हमले ने सबको हिला दिया है। बाइडेन हों या नाटो के महारथी, पुतिन के आगे सब ‘जोकर’ दिखते हैं।

बाइडेन कहते हैं कि अमेरिकी सैनिक यूक्रेन में नहीं जाएंगे। हम रूस पर बेहद सख्त प्रतिबंध लगाएंगे। अमेरिकी प्रवक्ता तरार कहते हैं कि यह हमला यूरोपीय इतिहास का ‘टर्निंग पाइंट’ है। नाटो मुखिया कहते हैं कि रूस ताकत के जरिए इतिहास को फिर से लिख रहा है। नई विश्व व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है। एर्दोगान हमले की निंदा करते हैं।

छप्पर छाप बालों वाले बोरिस जानसन कहते हैं कि हमारे दोस्त पर हमला बंद करो। इटली आस्ट्रेलिया सब रूस के हमले की निंदा तो करते हैं, लेकिन करते कुछ नहीं। नाटो कहता है कि सौ लड़ाकू विमान तैनात रहेंगे, लेकिन क्या करेंगे? पता नहीं! विशेषज्ञ सुशांत सरीन कहते हैं कि रूस यूक्रेन को गुलाम शायद न बनाए, लेकिन वहां की सत्ता अपने अनुकूल बनाना चाहता है, ताकि वहां उसकी चले! पुतिन फिर से महान रूसी साम्राज्य के दिनों को लौटाना चाहते हैं।

युद्ध को दिखाने में भी चैनलों में प्रतियोगिता है। इस चक्कर में कुछ का कुछ हो जाता है! एक एंकर दिखाने लगता है कि रूसी टैंक ‘कीव’ की सड़कों पर दौड़ रहे हैं, फिर कुछ देर बाद कहता है कि यह खबर पक्की नहीं है। इसी तरह एक एंकर लात्विया में खड़े अमेरिकी जहाजों को यूक्रेन में दिखा देता है।

अब तक साढ़े तीन सौ से अधिक यूक्रेनी सैनिक मरे हैं, इतने ही घायल बताए जाते हैं। कई रूसी सैनिक भी मरे हैं।
इस क्रम में सबसे दयनीय प्रेस कान्फ्रेंस दिल्ली स्थित यूक्रेन के राजदूत इगोर पोलिख्या की नजर आती है, जिसमें वे पहले भारत के रवैए को ‘असंतोषजनक’ कहते हैं, फिर मोदी की तारीफ के पुल बांध देते हैं कि मोदी पुतिन के करीबी दोस्त हंै। पुतिन उनकी सुनते हैं। मोदी विश्व नेता हैं। वे एक ताकतवर पीएम हैं। वे कहेंगे तो पुतिन सुनेंगे। लीजिए! अब ‘यूक्रेन’ भी मोदी के कसीदे गाने लगा! इससे मोदी की छवि और भी ताकतवर बनी!

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