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महाबली का पतन

जबसे ट्विटर का ‘कानूनी कवच’ हटा है, तबसे उसकी सारी अकड़ ढीली हो गई है और खबर दे रहा है कि सरकार के आगे कोर्निश बजाएगा! हाय! महाबली का ऐसा पतन!

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः unsplash)

यूपी जीतना है। भाजपा को हराना है। योगी को हराना है। अखिलेश को आना है… बाकी के क्या करेंगे? कोई चर्चक नहीं बताता!
इन दिनों हर चैनल पर यूपी की खबर धुनी-बुनी जाती है। यूपी की हर खबर भंडाफोडू खबर की तरह दी जाती है। सनसनी फैला दी जाती है। पहलवान कुश्ती में व्यस्त हो जाते हैं। एक-दो दिन इसी तरह से खबर धुनी जाती है, फिर अपने-अपने पक्ष में मोड़ ली जाती है! सत्तापक्ष अपने सच को हावी करता है, तो विपक्ष अपने सच को हावी करता है!

और इस तरह हर ‘सच’ का मलीदा बन जाता है!
इसी तरह एक दिन अयोध्या के राममंदिर के पास की जमीन की खरीद में हुए ‘घोटाले’ की खबर जम के तोड़ी गई। आरोप लगाया गया कि पांच मिनट में दो करोड़ की जमीन साढ़े अठारह करोड़ रुपए में कैसे खरीदी? किसकी जेब में गए पैसे? ये कैसे रामभक्त हैं कि मंदिर के नाम पर भी भ्रष्टाचार में लिप्त नजर आते हैं! राम राम राम! इसी को कहते हैं ‘राम नाम जपना पराया माल अपना!’
मंदिरवादी बोले कि सारे आरोप निराधर, मनगढ़ंत और राजनीतिक हैं। जो कल तक मंदिर के दुश्मन थे वे आज रामभक्त कैसे हो गए? खरीद में किसी ने एक पैसा नहीं खाया है। सारा लेन-देन बैंक के जरिए हुआ है। हम जांच के लिए तैयार हैं। फिर एक हिंदू नेता ने विस्तार से समझाया कि हमने तो सस्ते में ही खरीदी है और मंदिर ट्रस्ट को बदनाम करने वाले पर हम मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे! इसके बाद सारा विवाद ठंडा हो गया!

इसके बाद यूपी के लोनी ने एक बड़ी ‘खबर’ बनाई कि एक बुजुर्ग मुसलमान को एक कमरे में ले जाकर मारा-पीटा और दाढ़ी काटी तथा ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाने के लिए मजबूर किया। ट्विटर पर एक वीडियो वायरल रहा, जिसे देख विपक्ष के कुछ बड़े नेता और चंद ‘सेक्युलर’ पत्रकार भी बढ़-चढ़ कर ‘हिंदू सांप्रदायिकता’ पर गोले दागते रहे। यूपी का भावी चुनाव अभी से बहसों से जीता जाने लगा।

लेकिन अगले ही रोज पुलिस ने जांच करके साफ कर दिया कि मामला आपसी खुन्नस का है। बुजुर्ग मुसलमान तांत्रिक है, जिसका तंत्र उसके ग्राहकों पर उलटा पड़ गया। उन्हीं ने बदले में उसको कूटा, जिनमें एक हिंदू तथा बाकी मुसलमान युवक थे, जिनको पुलिस ने पकड़ा है।

पुलिस ने इस कांड को ‘यूपी में धार्मिक भावनाएं भड़काने की साजिश’ बताया और ‘ट्विटर’ समेत कुछ ट्विटराती सेक्युलराती पत्रकारों तक पर लोनी थाने में एफआईआर कर दी! विपक्षी नेताओं ने इसे ‘आजादी का गला घोंटने’ जैसा बताया!
देखते-देखते ट्विटर की सारी हीरोपंथी निकल गई। अब सीन होगा लोनी के थाना कॉलोनी की अदालत का और हाजिरी लगाएंगे ट्विटर ट्विटर खेलने वाले पत्रकार और ट्विटर प्रबंधक!

जबसे ट्विटर का ‘कानूनी कवच’ हटा है, तबसे उसकी सारी अकड़ ढीली हो गई है और खबर दे रहा है कि सरकार के आगे कोर्निश बजाएगा!
हाय! महाबली का ऐसा पतन!!
फिर एक दिन जैसे ही एक विपक्षी ने एक बड़ी ही हाय-हायवादी खबर तोड़ी कि ‘कोवैक्सीन’ में बछड़े का खून मिला है, तो सच्ची-मुच्ची की ‘हाय हाय’ होने लगी।
पहले कहे कि यह वैक्सीन भाजपा की है, फिर कहे कि पर्याप्त वैक्सीन नहीं, फिर कहे कि भारत में बनी ‘कोवैक्सीन’ में बछड़े का खून मिला है।

यद्यपि विशेषज्ञ बताते रहे कि सब टीकों में किसी न किसी का सीरम (खून) एक स्तर तक इस्तेमाल होता ही है, लेकिन अंतिम रूप में यह नष्ट कर दिया जाता है, इसलिए यह भ्रम न फैलाएं कि देशी टीके में बछड़े का खून है!
क्या गजब का वैज्ञानिक सोच है कि विदेशों में बने टीके टीका हैं, देशी टीका टीका नहीं! ऐसे असिद्ध आरोप लगाने वालों से पूछा जाना चाहिए था कि अगर ‘कोवैक्सीन’ में खून है, तो फाइजर, मॉडर्ना, स्पूतनिक में क्या अमृत है?

फिर, एक दिन किसान आंदोलन के धरने पर आरोप लगा कि कुछ किसानों ने एक आदमी को जिंदा जला कर शहीद बनाने की कोशिश की! यह खबर कुछ चैनलों में कुछ देर चमकी, लेकिन विवाद का विषय नहीं बनी! क्या सच है? यह तो ‘जांच’ से ही सामने आ सकता है, लेकिन जांच पर सबका भरोसा हो तब न!

सबसे समारोही खबर तिहाड़ से साल भर बाद जमानत पर रिहा होने वाली दो छात्राओं- देवांगना और नताशा तथा एक छात्र आसिफ की रही। दिल्ली पुलिस द्वारा इनके खिलाफ बनाया मामला अदालत को कानून सम्मत नहीं लगा और उसने जमानत दे दी!
एक रिपोर्टर से किसी बड़े नेता की तरह कहते रहे वे कि हमारी लड़ाई जारी रहेगी! धन्य है दिल्ली पुलिस कि जिसे हाथ लगाती है, वह हीरो हो जाता है!

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