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योद्धा कैसे कैसे

कुछ पहले तक तो सिर्फ एक चैनल दुनिया पर ‘कोरोना जैव युद्ध’ थोपने के लिए चीन को ठोंका करता था, लेकिन आजकल दूसरे चैनल भी विशेषज्ञोंं के जरिए इसके लिए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को जिम्मेदार ठहराते रहते हैं। मगर वुहानी कोरोना के मारे इस देश में कुछ ऐसे हिम्मती भी हैं, जो अब भी चीन की ताकत के कसीदे गाते नहीं थकते!

नई दिल्ली में कोरोना के खिलाफ जंग को लेकर जागरूकता फैलाने और कोरोना वॉरियर्स को सम्मानित करने से जुड़ा एक वॉल म्यूरल (दीवार पर बनी आर्ट)। (फोटोः पीटीआई)

तीसरी लहर आनी है, वह दूसरी से भी खतरनाक हो सकती है। यह बच्चों के लिए अधिक खतरनाक हो सकती!’
एक अंग्रेजी एंकर तीसरी लहर का डर बेचते हुए मुस्कराती है, लेकिन एक डॉक्टर साफ कहता है कि तीसरी आनी है और बच्चों के लिए अधिक खतरनाक है… इसका कोई ‘रिसर्च डाटा’ नहीं है।

स्क्रीन पर फिर ‘खतरा ही खतरा’ तैरता रहता है। खतरा बिकता रहता है, एंकर मुस्कराती रहती है! इसी बीच एक ‘कॉकटेल’ ने ‘ब्लैक फंगस’ का इलाज कर दिया। दो मरीजों को घर भी भिजवा दिया, लेकिन यह खबर बड़ी नहीं बनी! यूपी ‘खबर बुलेटिन’ की फारमेट वाले विज्ञापनों में जितनी चमक बनाती है, असली खबरें अंधेरों को दिखा जाती हैं, जैसा कि यूपी के एक अस्पताल ने दिखा दिए!
अथ! यूपी में आगरा! आगरा में पारस अस्पताल! अस्पताल के मालिक कुछ मरीजों की छुट्टी करने के लिए अपने मातहत से कहते हैं, ‘मॉकड्रिल’ करो। समझ में आ जाएगा कि कौन जिएगा और कौन मरेगा… ‘मॉकड्रिल’ के नाम पर पांच मिनट को ऑक्सीजन रोक दी जाती है। कुछ मरीजों का दम घुटने लगता है। वे नीले पड़ जाते हैं और बाईस मरीज मर जाते हैं। वीडियो वायरल हो जाता है। अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है। मरीज दूसरे अस्पतालों में ले जाए जाते हैं। जांच बैठा दी जाती है। भड़की हुई भीड़ अस्पताल के आगे हंगामा करती रहती है!

इसे कहते हैं परम इलाज: दम घोंट! मरीजों को मार! न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी। न रहेंगे मरीज न होगा अस्पताल परेशान! पांच मिनट में बाईस की यातना से मुक्ति! हुआ न अद्भुत इलाज! कोरोना योद्धा टीके लगाने गए हैं, लेकिन एक रिक्शेवाला मुस्कराते हुए कहता है: सुई से मर जाएंगे इसलिए नहीं लगवाएंगे। कोरोना हमारा कुछ नहीं कर सकता!

‘कोरोना योद्धा’ चकित थकित! रिपोर्टर चकित थकित! एंकर चकित थकित! जनता में सुई का डर पुराना है सर जी! इधर एक शाम पीएम ने आकर अठारह से ऊपर सबको मुफ्त टीके लगाने की नीति घोषित की, उधर ‘श्रेय’ की लड़ाई शुरू हो गई। जब ‘फ्री’ नहीं किया तो नाराज! अब कर दिया तो नाराज!! चिर नाराज बंदे किसी तरह खुश नहीं होते!

पीएम की नई टीका नीति पर बहस के दौरान एक परम राष्ट्रवादी विचारिका ने उस परम राष्ट्रवादी चैनल पर भाजपा प्रवक्ता को यह जवाब दिया कि जिनने अपने कमाऊ पूतों को खोया है उनको आंकड़ों से सांत्वना मत दीजिए। चाहे विपक्ष हो या सत्ता पक्ष, दोनों अपना अहंकार दिखाते हैं। आलोचना को स्वीकार करना आना चाहिए और कि जो किया, कोई अहसान नहीं किया!’ हाय! ये कैसे जालिम दिन आ गए हैं कि ‘जिनपे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे’!

दो दिन मेहुल चोकसी की वापसी की खबरों ने जगह बनाई, फिर उनकी जगह चोकसी की गर्लफ्रेंड ने पोल खोली कि वह तो बड़ा ठग्गू है, उसने तो मुझे भी नकली अगूंठी देकर ठगा… यानी चोर चोरी से जाय, हेराफेरी से न जाय! इन दिनों चैनलों में कोरोना के लिए चीन को जिम्मदार ठहराया और उसे ठोंका जाने लगा है!

कुछ पहले तक तो सिर्फ एक चैनल दुनिया पर ‘कोरोना जैव युद्ध’ थोपने के लिए चीन को ठोंका करता था, लेकिन आजकल दूसरे चैनल भी विशेषज्ञोंं के जरिए इसके लिए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को जिम्मेदार ठहराते रहते हैं। मगर वुहानी कोरोना के मारे इस देश में कुछ ऐसे हिम्मती भी हैं, जो अब भी चीन की ताकत के कसीदे गाते नहीं थकते! ऐसी अद्भुत आत्महंता आस्था को ‘लाल सलाम’!

लीजिए, राहुल भैया के एक करीबी ने उस शाम कांग्रेस छोड़ भाजपा को गले लगा लिया। भाजपा ने भी कार्यालय में उनका कमल छाप ‘दुपट्टाभिषेक’ करते हुए पांच रुपए वाली सदस्यता की पर्ची और गुलदस्ता पकड़ाया। उनकी राजनीतिक अर्हता के गाने गए। फिर उन्होंने मोदी जी के नेतृत्व का गुणगान किया और इधर यारों ने बहस छेड़ दी! एक बोले ‘गद्दार है’ दूसरे बोले : सुनवाई न होगी तो कौन रहेगा कांग्रेस में! ‘राहुल भैया करते ट्वीट, लेकिन उनके साथी जाते भाजपा स्ट्रीट!

लगता है कि कुछ ज्ञानी हमेशा तुरीयावस्था में रहते हैं। ऐसी ही तुरीयावस्था में रहते हुए यूपी की महिला आयोग की सदस्या जी ने कह दिया कि लड़कियां आजकल मोबाइल से लड़कों से बात करती रहती हैं और भाग जाती है… जब तुरीयावस्था उतरी तो कह दीं कि मेरी बात को ठीक से समझा नहीं गया। मैंने तो इतना कहा था कि लड़कियां किससे बात कर रही हैं, इस बारे में माता-पिता ध्यान नहीं देते। एक एंकर ने पूछा कि ये मैडम किस सदी में रहती हैं?

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