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अपने अपने बही-खाते

खबर का प्रबंधन जिस तरह से चीन करता है, वैसा इन दिनों अमेरिका भी नहीं करता दिखता। सिर्फ एक अंग्रेजी चैनल और दो हिंदी चैनलों को छोड़ कर अधिकांश चैनलों के लिए चीन का वुहान लैब इस कोरोना को बनाने वाला ‘सिद्ध खलनायक’ नहीं है, बल्कि अमेरिका ही है!

प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम केयर्स के माध्यम से देश के हर जिले के अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट्स लगाने पर तेजी से काम किया जा रहा है (फोटो -ANI)

चालीस प्रतिशत लोग मोदी से नाराज! कोरोना से निपटने में नाकाम! कोरोना, बेरोजगारी, महंगाई बड़ी समस्या! कोरोना से कौन निपट सकता है? छियासठ फीसद कहे कि मोदी! बाईस फीसदी कहे कि राहुल! हाय! ये क्या बात हुई? सर्वे बिका हुआ है! जरा गांवों में आकर देखिए, क्या ईमान वो तो बिका हुआ लगता है!
लेकिन पैंसठ फीसद ग्रामीण पहले लॉकडाउन को ठीक मानते रहे और इक्यावन फीसद मोदी की टीकाकरण नीति को सही मानते दिखे!

सी वोटर के इस सर्वे के सर्वेसर्वा यशंवत देशमुख ने टीका की कि चालीस फीसद लोग कोरोना को सही तरीके से न निपटा पाने के कारण सरकार से नाराज हैं, लेकिन शायद ही किसी पीढ़ी ने ऐसी महामारी देखी है! एक अंग्रेजी चैनल भी एक सर्वे दिखाते हुए कहता है कि सात साल बाद भी मोदी शीर्ष पर हैं। उनकी तुलना में बाकी नेता अब भी बहुत पीछे हैं! एक निंदक बोला : यह भी ‘छवि बनाने’ का अभियान है! इन दिनों चैनलों में तीन तरह के लोग नजर आते हैं : ‘संकट मोचक’, ‘संकट योजक’ और ‘संकट के शिकार’! ‘संकट मोचक’, ‘संकट योजक’ एक-दूसरे से भिड़ते रहते हैं और संकट के शिकार रोते रहते हैं। ‘संकट मोचक’ कहते हैं कि ‘हम निपटे हैं, हम निपट रहे हैं, हम निपटेंगे’! ‘संकट योजक’ कहते हैं कि सब झूठ, टीकाकरण नीति, अर्थव्यवस्था फेल, सरकार फेल! एक कहता है : छह महीने बाद यूपी के चुनाव हैं और यह यूपी सरकार के लिए खतरे की घंटी है! मगर वाह रे यूपी सरकार! कोरोना को निपटाने वाले विज्ञापन भी ‘न्यूज फॉरमेट’ में बनवाए हैं। विज्ञापन में एंकरनुमा मॉडल विज्ञापन को न्यूज बुलेटिन की तरह पेश करते हैं। यूपी सरकार का ‘चिह्न’ न दिखे, तो लगे कि चैनल की खबर है!

असली खेल ‘खबर का मैनेजमेंट’ है मुन्ना! और खबर का प्रबंधन जिस तरह से चीन करता है, वैसा इन दिनों अमेरिका भी नहीं करता दिखता। सिर्फ एक अंग्रेजी चैनल और दो हिंदी चैनलों को छोड़ कर अधिकांश चैनलों के लिए चीन का वुहान लैब इस कोरोना को बनाने वाला ‘सिद्ध खलनायक’ नहीं है, बल्कि अमेरिका ही है! और हमें याद आने लगता है वह लंबा-सा वरिष्ठ अमेरिकी वायरोलाजिस्ट का चेहरा, जो पहले कहता था कि कोरोना निर्माण में ‘वुहान लैब’ की भूमिका ‘साफ’ नहीं, एक कहता दिखता है कि ‘फिर से छानबीन जरूरी है’ और फिर खबर आती है कि ये और ऐसे कई जाने-माने चेहरे भी इस विषाणु को वुहान लैब में बनवाने में दिलचस्पी रखते थे! उनमें से एक ने तो हमें ऐसी दवा भी बेच डाली, जिसकी कृपा से ‘ब्लैक फंगस’ होने लगा और जिसे बंद करना पड़ा!
सिर्फ एक चैनल कहता रहा कि यह चीन का छेड़ा ‘जैविक युद्ध’ है, जिसका इरादा दुनिया के लोगों का स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था बर्बाद करना है! फिर भी ऐसा क्यों लगता है कि ‘असली सच’ का पता कभी नहीं लगने वाला?

और यह कैसी दुष्ट विडंबना है कि जो महामारी के पीछे हैं, वही चेहरे महामारी की दवा को ‘ओके’ करने वाले हैं और उन्होंने ही इस वक्त हिंदुस्तान को दवाओं की प्रयोगशाला बना रखा है, वे रोज एक नई दवा बेच जाते हैं और हम मुंह बाए रह जाते हैं!
एक दिन खबर चैनल बाबा रामदेव के विरोध में रेजीडेंट डॉक्टरों के प्रदर्शन को दिखाते हैं, लेकिन न बाबा हिलते हैं न डॉक्टर! कोरोना के खिलाफ युद्ध के भीतर एक और युद्ध छिड़ा दिखता है!
यह धंधे का युद्ध है मुन्ना! लीजिए, एक दिन आखिरी योद्धा ‘ट्विटर’ ने भी सरकार के आगे समर्पण कर दिया! क्या करें? पापी पेट के वास्ते अरबों का कारोबार तो नहीं छोड़ सकते! एक दिन एक चैनल ने बताया कि छह सौ बुद्धिजीवियों ने चाहा है कि सन चौबीस में ममता दीदी मोदी को टक्कर दें! पता नहीं ऐसी मसालेदार खबर भी चर्चा का विषय क्यों न बन सकी!

इन दिनों हर कोई किसी ‘साइको’ की तरह पूछता रहता है कि अब तक कितने मरे? इतने मरे कि इतने? एक कहता है कि मरने वालों की सही संख्या वो राज्य छिपा रहा है, तो दूसरा कहता है कि ऐसा कहने वाला खुद सही संख्या छिपा रहा है! मौत के बही-खाते वाले परेशान हैं कि इतने कम क्यों मरे? अरे भइए! इतने पर भी तसल्ली न हो तो कुछ और अधिक मार दो! और कुछ नहीं, तो फिरंगी मीडिया की खबर की खातिर ही मार दो!! उफ्फ! आम हिंदुस्तानी इतना कठजीव क्यों हैं? हमारी इच्छा के अनुसार बेशरम मरता क्यों नहीं?

ऐसी ही एक शाम, एक हिंदी चैनल पर दो बड़े दलों के नामी प्रवक्ताओं ने बहस को गली छाप ‘फाइट’ में बदल दिया! पूरी बहस में एक ओर ‘जोकर’ और ‘छिछोरा’ था और दूसरी ओर ‘गालीवाली मैडम’! आजकल बहसों में भी खून-खराबा होने लगा है!

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