खेल है, युद्ध नहीं

वन में खिलाड़ियों का सामान्य रोजगार था, शादी के बाद उनकी पत्नियां अचानक से सेलेब्रेटी नहीं बनीं।

Kapil Dev Former All Rounder Atul Wassan Slammed Team India Cricketers T20 World Cup Watch Video
आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2021 से टीम इंडिया की जल्द विदाई पर भारतीय क्रिकेटर्स को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। (सोर्स- ट्विटर/आईसीसी)

आज टी 20 (अंतरराष्ट्रीय) विश्व कप का आयोजन खत्म हो जाएगा और विजयी सामने आएगा। यह भारत नहीं होगा। पहले दो मैचों में पाकिस्तान और न्यूजीलैंड का भारत के साथ धमाकेदार मुकाबला था। पहले मैच में पाकिस्तान ने भारत को दस विकेट से हराया। अगले में न्यूजीलैंड ने भारत को आठ विकेट से पराजित किया।

क्रिकेट खेलने वाले दूसरे देशों की तरह पाकिस्तान एक बड़ा प्रतिद्वंद्वी है। हालांकि पाकिस्तान जब भारत के साथ खेलता है, तो लगता है जैसे कि दो कट्टर दुश्मनों के बीच जंग हो रही हो। मुझे लगता है कि यह सिर्फ क्रिकेट जो कुल मिलाकर एक खेल है, की प्रतिद्वंद्विता ही नहीं है, जो हजारों भारतीयों और पाकिस्तानियों को ऐसे शत्रुतापूर्ण रवैए की ओर धकेलती है।

खेल बदल चुका है
एक वक्त था जब भारत में क्रिकेट शहरी खासतौर से मध्यवर्ग का खेल था। खिलाड़ियों की प्रशंसा होती थी, उन्हें पूजा नहीं जाता था। अपने निजी जीवन में खिलाड़ियों का सामान्य रोजगार था, शादी के बाद उनकी पत्नियां अचानक से सेलेब्रेटी नहीं बनीं।

खिलाड़ियों को कम पैसा मिलता था। क्रिकेट खेल कर या उत्पादों का विज्ञापन कर खिलाड़ियों ने मोटा पैसा नहीं कमाया। बाएं हाथ के धीमे बल्लेबाज बापू नाडकर्णी, जिनकी गेंद पर रन मारना संभव नहीं होता था, ने यह खुलासा किया था कि वे बंबई (अब मुंबई) में बारबोर्न स्टेडियम जाने के लिए लोकल ट्रेन लेते थे और टैस्ट मैच में भारत के लिए खेलने के लिए उन्हें पचास रुपए रोजाना मिलते थे।

खेल काफी बदल चुका है, इसमें पहले जैसा कुछ नहीं रहा। दशकों तक यह पांच दिन का टैस्ट होता था, धीमा और अक्सर ऊबाऊ, और नतीजे को लेकर कुछ पक्का नहीं होता था। बदलाव एक दिवसीय खेल से आया। पचास ओवर का खेल वनडे इंटरनेशनल (ओडीआइ) कहलाया।

इसमें हार-जीत का फैसला न होने का सवाल ही नहीं था, क्योंकि मुकाबले में निर्विवाद रूप से एक ‘विजेता’ सामने आता था। बराबरी का नतीजा बहुत ही मुश्किल से देखने में आता था, और इस बराबरी के मुकाबले ने भी विजेता बनाए। फिर बीस ओवर का रूपांतर आने के बाद तो खेल नाटकीय रूप से बदल गया।

कोई नहीं जानता कि अगला बदलाव क्या होगा, लेकिन निश्चित रूप से दर्शकों को उत्साहित रखने के इरादे के साथ होगा। अगर मैं अनुमान लगाऊं तो यह पचास ओवरों का खेल हरेक की दो पारी और तीन दिन का टैस्ट मैच हो सकता है!

अब कई देश क्रिकेट खेल रहे हैं और इनमें से कई साधारण-से किसी भी टीम को हरा देने लायक होने की ओर बढ़ रहे हैं। अफगानिस्तान इसका उदाहरण है (विश्व कप में पांच मैचों में से दो जीता हुआ)। आश्चर्यजनक संयोग यह है कि टी-20 में भाग लेने वाले सारे देश अंग्रेजीभाषी हैं, हालांकि मेरा मानना है कि उनमें खिलाड़ी हिंदी, उर्दू, बांग्ला, सिंहली, फारसी, पश्तो, अफ्रीकी और ओशिवांबो बोलते हैं।

अगर जब कभी यह खेल गैर अंग्रेजीभाषी देशों में फैला खासतौर से यूरोप और दक्षिणी अमेरिका में, तो यह फुटबाल या टेनिस की तरह सही मायने में अंतरराष्ट्रीय खेल बन जाएगा।

विरोधी भावनाएं
क्रिकेट के मैदान पर भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे को सिर्फ प्रतिद्वंद्वी के बजाय दुश्मन के रूप में देखें, यह गहरी चिंता की बात है। दोनों देशों के खिलाड़ियों के बीच खेला जाने वाला और कोई ऐसा खेल नहीं है, जिसमें इस कदर शत्रुता की भावना देखने को मिलती हो।

ओलंपिक में भालाफेंक प्रतियोगिता में चैंपियन नीरज चोपड़ा ने पाकिस्तान के अरशद नदीम को हरा दिया था, लेकिन पाकिस्तानी प्रशसंकों में तब कोई गुस्सा या नफरत का भाव नहीं आया था। मुझे लगता है कि अगर इसका नतीजा उलट निकलता तो वैसा ही शांतिपूर्ण माहौल भारत में भी देखने को मिलता।

क्रिकेट के बारे में आखिर ऐसा क्या है, जो भारत और पाकिस्तान में समझदार प्रशंसकों के बीच द्वेषपूर्ण भाव पैदा कर देता है? कुछ लोगों का मानना है कि दोनों देशों के बीच लड़े गए युद्धों, सीमापार आतंकवाद और राजनीतिक प्रलाप की वजह से ऐसा होता रहा है। फिर भी हाकी, मुक्केबाजी या कुश्ती जैसे खेल में जब दोनों देशों के खिलाड़ी भिड़ते हैं तो उनके प्रशंसकों में कोई गुस्सा देखने को नहीं मिलता।

ज्यादा पीड़ादायक तो यह है कि आपसी दुश्मनी की ऐसी भावना घातक मोड़ ले लेती है और खिलाड़ी व्यक्तिगत रूप से एक-दूसरे को निशाना बनाने लगते हैं। भारत जब पाकिस्तान से हार गया तो मोहम्मद शामी को गालियां दी गर्इं। जाहिर है और इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता कि शामी मुसलमान हैं।

अघोषित आरोप यह था कि उन्होंने भारत को हरवाया। इस तरह के आरोप से ज्यादा हास्यास्पद कुछ नहीं हो सकता। गालियां देने वाले यह भूल गए थे कि शामी की गेंदों ने ही भारत की टीम को कितने मैच जितवाए भी थे। वे एक ऐसे अथक खिलाड़ी हैं जो असधारण रूप से ऊर्जा और छल पैदा कर सकते हैं।

समान रूप से ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का बयान भी शोचनीय था, जिन्होंने पाकिस्तान की जीत को इस्लाम की जीत बता डाला। शामी की तरह ही कई मुसलिम खिलाड़ियों ने भारत का गौरव बढ़ाया है। दिमाग में तत्काल जो नाम आते हैं उनमें मोहम्म्द अजहरुद्दीन, अब्बास अली बेग, सलीम दुरार्नी और पटौदी के नवाब मंसूर अली खान हैं। इनमें से दो भारत के कप्तान भी रहे थे।

बंद करें जहर फैलाना
मेरा मानना है कि देश की राजनीति में जो जहर फैलाया जा रहा है वह क्रिकेट के मैदान से लेकर घरों में क्रिकेट देखने वालों तक जा पहुंचा है। भारत के सर्वश्रेष्ठ लेखकों, कवियों, संगीतकारों, चित्रकारों, अभिनेताओं, वैज्ञानिकों, प्रोफेसरों और शिक्षकों, डाक्टरों, वकीलों, वास्तुकारों, कारोबारियों और विधायक-सांसदों में मुसलमान भी हैं। शामी के क्रिकेट कौशल और उनकी उपलब्धियों के आगे उनकी मुसलिम आस्था का कोई मतलब नहीं रह जाता।

यह अच्छी बात है कि भारत के कप्तान विराट कोहली ने गालियां देने वालों और पीछे पड़ने वालों की निंदा करने और उन्हें बिना रीढ़ का करार देने में कोई देर नहीं लगाई। कई अन्य क्षेत्र के लोगों ने भी ऐसा ही किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि खेल मंत्री इस पर सोची-समझी चुप्पी साधे रहे।

जब भारत के किसी भी नागरिक (इस मामले में शामी) को उसके धर्म की वजह से अपमानित किया जाता है, तो देश के हर नागरिक को अपमानित महसूस करना चाहिए। जब एक श्वेत चरमपंथी ने इक्यावन मुसलमानों को मार डाला था तो न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने तीन साधारण शब्दों में अपने नागरिकों को एकजुट करते हुए था कि ‘हम एक हैं’। भारत में मैं ऐसे शब्द सुनना चाहता हूं।

पढें रविवारीय स्तम्भ समाचार (Sundaycolumn News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

Next Story
कभी-कभार: लेखक के समकालीन
अपडेट