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बाखबर: हिंदुत्व हिंदुत्व नेति नेति

संघ से निरासक्त चैनलों पर चिंतन होने लगा कि संघ बदल रहा है या यों ही बानक बना रहा है? एक प्रवक्ता ने कहा : तेंदुआ भी क्या कभी अपने धब्बे बदलता है? एक पत्रकार कहने लगी कि यह सब दो हजार उन्नीस के लिए है।... संघ भी क्या करे? खुले तो आफत। बंद तो आफत!

Author September 23, 2018 6:12 AM
संघ प्रमुख मोहन भागवत। (फोटोः पीटीआई)

रिपोर्टर : सर जी रेप हुआ है!
मंत्री जी : स्वच्छ भारत अभियान है।
रिपोर्टर : देखिए रेप हुआ है।
एक स्त्री स्वर : जानकारों के बीच की बात भी हो सकती है।
रिपोर्टर : मगर रेप हुआ है।
मंत्री : पुलिस जांच कर तो रही है!
ये एंकर, ये रिपोर्टर ‘रेपिस्टों’ के पीछे क्यों पड़ जाते हैं? इतना भी नहीं देखते कि मंत्री जी अभियान में व्यस्त हैं!
धन्यभाग हम सब कि संघ ने ऐन दिल्ली में अपने दरवाजे खोले। और धन्यभाग वे आलोचक जिनको बुलाया। चिर निदंनीय वे जो फिर भी नहीं गए।
एक एंकर पूछने लगी : यह कैसा उदारवाद है कि बुलाते हैं तो जाते तक नहीं। दूसरा कोसने लगा : यह ‘बायकाट’ क्यों? संवाद का विरोध क्यों? ‘फारमेट’ पर एतराज था तो अंदर जाकर कहते।
धन्यभाग वे एंकर जो विपक्ष को कोसते हुए संघ की पैरवी करते रहे। इतने पुण्यों के बाद तो मुक्ति का एक अवसर आया था। उसे भी अभागों ने गंवा दिया। अपने गुसार्इं जी ने सच कहा है: ‘मूरख हृदय न चेत, जो गुरु मिलै बिरंचि सम!
फूलहिं फलहिं न बेत, जदपि सुधा बरसहिं जलद।।’
शाम को मोहन भागवत जी का डेढ़ घंटे लंबा हिंदी संबोधन आया। न बीच में पानी पिया, न गला खंखारा। गजब का आत्मविश्वास! छोटे-छोटे कसे हुए वाक्य। संघ का परिचय एकदम दो टूक :

संघ का काम अनोखा। तरीका अनोखा। संस्थापक हेडगेवार का लंबा परिचय। उनका मानस, जन्मजात देशभक्त। अनुशीलन समिति। चार मार्ग। चौथा मार्ग उनका मार्ग। अपने मूल पर वापस चलो। टैगोर वाली एकात्मता की जरूरत। समाज परिवर्तन के लिए एक नायक खड़ा करना पड़ेगा। समाज को ऊपर उठाना होगा। व्यक्ति को उठाना होगा। स्वस्थ नहीं होंगे, तो आगे नहीं बढ़ेंगे। समाज को ट्रेनिंग देनी होगी। हेडगेवार ने समाज को खड़ा करने की पद्धति खड़ी की।
संघ एक ‘मेथडॉलोजी’ है और कुछ नहीं। वह व्यक्ति निर्माण करता है। संघ की योजना ऐसी है कि हर गली हर गांव में ऐसे लोग हों।
विविधता, समन्वय, संयम, त्यागपूर्वक जीना, संपूर्ण के तुम अंग हो इसलिए सृष्टि के प्रति कृतज्ञ रहो, यानी जियो और जीने दो। ये पांच बातें हैं। विकारों को हटाओ। पवित्र अंत:करण वाले बनो। सत्य, अहिंसा, अस्तेय, संतोष, स्वाध्याय सर्वत्र मिलता है। बाहर से आने वाले संप्रदाय अगर वे भारतीय हैं, तो वहां भी ये मूल्य हैं। हेडगेवार का मानना था कि अपने पराभव का दोष इस्लाम या अंग्रेजों को क्यों दो? हमारी ही कोई कमी है। उसे ठीक करो। अपने मूल्यों का भूल कर आचरण किया तो पतित हुए।
सबको जोड़ने वाला शब्द हिंदुत्व है। यह हिंदू राष्ट्र है। हम उसे वैसा बनाएंगे। भेद रहित, स्वार्थ रहित समाज ही स्वतंत्रता की गारंटी है। सरकार अपनी जगह है। संघ प्रमुख खड़ा हो जाता है तो सब खड़े हो जाते हैं। लोग समझते हें कि संघ ‘डिक्टेटोरियल’ है। मेरी बात मत देखिए। संघ में आकर देखिए। ये अंदर आकर मिलेगा। हेडगेवार की प्रतिभा अलौकिक थी। उन्होंने शारीरिक शिक्षा शुरू की।…

अगले दो दिन के कवरेज में संघ के नाम से दी जाने वाली लाइनें झटका देती रहीं : अगर मुसलमानों को स्वीकार नहीं करता, तो वह हिंदू राष्ट्र नहीं हो सकता।… हिंदुत्व का विचार हिंदू से अलग है।… विविधता भारत की खूबसूरती है।… भारत में कोई बाहर वाला नहीं है।… जो हमसे सहमत नहीं वे भी अपने हैं।…
तीसरे दिन लाइव प्रसारित प्रश्नोत्तरी थी। सवालों के गुच्छों के हर जवाब पर ताली थी।
ये था तीन दिन का राष्ट्रीय ‘बौद्धिक’! टीवी में लाइव लाइव! तब भी कुछ एंकर विपक्ष को कोसते रहे कि विपक्ष क्यों नहीं आया! इस लाइव कवरेज के बाद किसी के आने न आने से क्या फर्क पड़ता है? आपने तो संघ की मूल थीसिस उन सब तक पहुंचा दी, जो नहीं आए।
संघ से निरासक्त चैनलों पर चिंतन होने लगा कि संघ बदल रहा है या यों ही बानक बना रहा है? एक प्रवक्ता ने कहा : तेंदुआ भी क्या कभी अपने धब्बे बदलता है? एक पत्रकार कहने लगी कि यह सब दो हजार उन्नीस के लिए है।… संघ भी क्या करे? खुले तो आफत। बंद तो आफत!
लेकिन भाई जी! यह भी तो ‘हिंदू मांइड’ ही है कि आप कलेजा खोल कर रख दीजिए, तो भी किसी को चैन नहीं होता। आप लाख समझाते रहें कि मैं ये हूं, वो हूं, तो भी कहता रहेगा ‘नेति नेति’! असली हिंदू तो ‘नेति नेति’ वाला ही है गुरु जी! वो तो अपने भगवान से भी कह देता है : नेति नेति!
अगले दिन यूपी पुलिस ने अपनी ‘एंनकाउंटर लीला’ मीडिया को बुला कर लाइव शूट की।
और उधर पाकिस्तानी घुसपैठियों ने एक सैनिक को मार कर उसकी आंखें निकाल ली! पहले पर कोई न रोया, लेकिन दूसरे पर सैनिक का बेटा बदला लेने के लिए आग्रह करता रहा। उधर पाक टीम से भारतीय टीम क्रिकेट खेलती रही और न्यूयार्क में साइडलाइन्स में पाक विदेश मंत्री से बात की जगह मुलाकात की खबरें दी जाती रहीं।

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