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बाखबर: बाबा रे बाबा

टीवी के जनतंत्र की बलिहारी कि इस ‘बलात्कारी बाबा’ के भी पक्षधर कम न रहे और एकाध तो इतना सांप्रदायिक दिमाग का रहा, जो कहता रहा कि अगर किसी अन्य धर्म का कोई होता तो उसके साथ क्या ऐसा होता?

Author April 29, 2018 5:16 AM
आसाराम (फाइल फोटो)

कपिल सिब्बल आए। प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ इकहत्तर सांसदों के दस्तखत वाला महाभियोग का प्रस्ताव लाए। आपत्ति के पांच बिंदु बताए! पृष्ठभूमि में वही चार जज नाराज। वही प्रधान न्यायाधीश के दर्शन बारंबार! चैनल होश में आए। एक के बाद एक कानूनवेत्ताओं को लाए। सोली सोराबजी बोले : दुखी हूं। मुकुल रोहतगी बोले कि ठीक नहीं है। सलमान खुर्शीद ने कहा कि मुझे इसका आइडिया ही नहीं। कांग्रेस का एक्शन और कांग्रेस के पूर्व मंत्री को ही नहीं मालूम! है न कमाल की बात! इस बीच पॉक्सो कानून में बारह साल से कम उम्र की बच्ची से बलात्कार के अपराधी को फांसी की सजा का प्रावधान करने वाला अध्यादेश जारी हुआ। कुछ चैनलों में कुछ वकीलों ने फांसी की सजा के प्रावधान पर सवाल उठाए कि इससे बलात्कार तो रुकने से रहे, उल्टे रिपोर्ट होने बंद और हो जाएंगे।… लेकिन इस बार ऐसे स्वर कुछ कम ही मुखर दिखे।

एक ट्वीट ने जोर मारा : एबीपी ने खबर दी कि विश्व हिंदू परिषद के किन्हीं अभिषेक मिश्र ने ओला टैक्सी के ड्राइवर के मुसलमान होने की वजह से बुकिंग रद्द करके अपनी वीरता दिखाते हुए ट्वीट किया कि मैं किसी जिहादी को अपने पैसे नहीं दे सकता!
कुछ देर सेक्युलर किस्म की हाय हाय मची, लेकिन जल्द ही सब ओर शांति छा गई!
एक रोज बाद राज्यसभा के सभापति ने महाभियोग प्रस्ताव को विशेषज्ञों की राय लेकर खारिज कर दिया! कांग्रेस की प्रतिक्रिया आई : यह खारिज करना गैर-कानूनी है। राज्यसभा के सभापति को हक ही नहीं कि विचार करे : उसे हां कहना है या ना!
तो भैया सभापति ने ‘ना’ कर दी और ‘ना’ करने का हक तो था न!
फिर भी खबर चैनल कानूनवेत्ताओं के जरिए जनता को समझाते रहे कि खारिज क्यों किया? क्या तर्क दिए और कैसे यह प्रस्ताव सब राजनीतिक है। सुब्रहमण्यम स्वामी ने कहा : यह सब विपक्ष का पब्लिसिटी स्टंट है!
रिपब्लिक ने लगाया : कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका। इंडिया टुडे ने लाइन लगाई : बिग ब्लो टू कांग्रेस!
लगता है कि कांग्रेस ऐसे झटकों की आदी हो चली है। तभी तो ताल कटोरा में राहुल गांधी ने संसद में ‘सिर्फ पंद्रह मिनट बोलने’ की धमकी एक बार फिर दे डाली कि… राहुल के समर्थक उनकी इस वीर मुद्रा पर मुग्ध होकर ताली बजाते रहे।
ऐसी नित्य धुलाई के मौसम में भी यह तेवर! क्या बात है?
सलमान खुर्शीद ने फिर एक बार कांग्रेस को वॉशिंग मशीन में धुलने डाल दिया : अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में एक नटखट छात्रा के सवाल के जवाब में वे ‘गांधी भावेन’ बोल उठे कि कांग्रेस के हाथों पर मुसलमानों के खून के धब्बे हैं…
इसके बाद वही हुआ, जो होना था। भाजपा के एक प्रवक्ता ने तुरंत ‘हाथ’ को कांग्रेस का ‘खूनी पंजा’ बता कर सलमान के हलफनामे का ढेर कर दिया!

सीएनएन आइबीएन ने लाइन दी : कांग्रेस रेड फेस्ड! कांग्रेस का मुंह लाल!
वह तो भला हो फिल्मी कोरियोग्राफर सरोज खान का, जिन्होंने बलात्कारों के इस भयावह मौसम में फिल्म उद्योग के कास्टिंग काउचों को यह कर कर इज्जत बख्शी कि वे बलात्कार करके छोड़ नहीं देते… वे रोजगार तो देते हैं।
कांग्रेस की रेणुका चौधरी ने कह दिया कि संसद भी इससे मुक्त नहीं है! लेकिन इस मुद्दे पर कोई बहस न उठ सकी!
यों उन्नाव के सामूहिक बलात्कार के आरोपी सेंगर के बंदों ने रैली कर मिरर नाउ के जरिए कुछ देर खबर बनाने की कोशिश की, लेकिन एक नाबालिग से रेप के आरोप में गिरफ्तार आसाराम बापू के केस की सुनवाई की खबर ने सब चैनलों को आसारामी लीला की खोज-खबर लेने में लगा दिया।
एक ओर सुनवाई की खबर रहती, दूसरी ओर बाबा अपने भक्तों के आगे कभी मोर मुकुट पहन कर चट्टे बजाते उलटा-सीधा थिरकते दिखते, कभी वैजंयती माला सूंघते भक्तों को कुछ कहते, फिर रंगीन पानी के पंपों से भक्तों पर रंग मार कर होली खेलन लीला करते दिखते…।

कांग्रेस को एक बार फिर खुजली हुई और बिना सोचे-समझे आसाराम को नमस्कार करते तब के गुजरात के सीएम मोदी का पुराना चित्र दिखा कर भाजपा को शर्मिंदा करना चाहा, लेकिन तभी सीन बदला : एक ओर चैनलों में कांग्रेस के नेता दिग्विजय भी आसाराम को नमन करते दिखने लगे और दूसरी ओर धीरेंद्र बह्मचारी के साथ खड़ी इदिरा गांधी दिखने लगीं। एक बार फिर कांगे्रस की कच्ची हुई।
आसाराम की कथा बुधवार के दिन भी जारी रही। हर चैनल जोधपुर की जेल में चलती न्यायिक सुनवाई के लाइव कवरेज में व्यस्त रहा। जब बाबा को ‘मरते दम तक कैद’ की सजा सुना दी गई तब चैनल खुल कर खेले। कल तक का ‘बापू’, अब कहीं ‘बलात्कारी बाबा’ था, कहीं ‘रेपिस्ट गाडमेन’ था, कहीं उसे सिर्फ ‘कैदी नंबर एक सौ तीस’ नाम से पुकारा जाता था। बलात्कारी बाबाओं की लाइनें लगा दी गर्इं : नित्यानंद, रामपाल, राम रहीम और अब आसाराम।
टीवी के जनतंत्र की बलिहारी कि इस ‘बलात्कारी बाबा’ के भी पक्षधर कम न रहे और एकाध तो इतना सांप्रदायिक दिमाग का रहा, जो कहता रहा कि अगर किसी अन्य धर्म का कोई होता तो उसके साथ क्या ऐसा होता?
बाबा रे बाबा!

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