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बाखबर: एंकरी अहंकरी

कई एंकरों के लिए राहुल एक समस्या हैं! कुछ एंकर तो राहुल का नाम सुनते ही पैर पटकने लगते हैं! आप एंकर हैं। ‘एंकरी’ करिए। ‘अहंकरी’ क्यों करते हैं? मगर, इन दिनों अहंकरी के बिना एंकरी कैसी?

चुनाव के सिर्फ बहत्तर घंटे पहले, टाइम्स नाउ एक ‘चुनावी प्रोजेक्शन’ को ‘सबसे बड़ा प्रोजेक्शन’ बताते हुए लाइन देता है: ‘यह कर्नाटक में भूचाल ला देगा’। ‘कर्नाटक के वोटों को हिला देगा’। फिर एक सवाल कि ‘क्या मोदी का ‘ब्लिट्ज’ (धुआंधार प्रचार)भाजपा को जिता देगा? वोटर किसे वोट करेंगे? जवाब: सत्तावन प्रतिशत भाजपा को। और सीट कितनी मिलेंगी? कांग्रेस को चौरानबे सीट और भाजपा को चौरासी सीट! वोट मिलेंगे सत्तावन प्रतिशत, सीटें मिलेंगी सिर्फ चौरासी! यह दिव्य गणित तो अपने आप में ‘भूचाल’ है भैये! दूसरा चैनल अब तक आए ओपिनियन पोलों का तुलनात्मक अध्ययन कर बताता है कि सात में से छह पोलों में कांग्रेस आगे चलती दीखती है, सिर्फ एक पोल है, जो उसे कम सीटें देता है। एक सार्थक विश्लेषण एनडीटीवी पर प्रणय राय, दोराब सोपारीवाला और शेखर गुप्ता की टीम देती है। कर्नाटक कवर करने के बाद वे बताते हैं कि एक तो इस चुनाव में सत्ता विरोधी लहर का तत्त्व नदारद है। दूसरे, भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं, क्योंकि वह सर्वदलीय है। तीसरे, लिंगायत आरक्षण का वादा भी अपना काम कर सकता है। फिर बताते हैं कि दो फीसद का ‘स्विंग’ (झुकाव) जिता-हरा सकता है। यानी कुछ भी हो सकता है। भाजपा को जीतने के लिए चार प्रतिशत का झुकाव जरूरी है, जबकि कांग्रेस को सिर्फ दो प्रतिशत का…

चुनाव प्रचार का आखिरी दिन रोचक सीन देता है। भाजपा अध्यक्ष के बादामी के रोड शो से हर एंकर-रिपोर्टर उल्लसित नजर आता है। यह सचमुच का बड़ा रोड शो है। बादामी से मुख्यमंत्री सिद्धरमैया लड़ रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष एक चैनल से बातचीत में बताते हैं कि बादामी का शायद ही कोई आदमी होगा, जो रोड शो में न आया हो। इससे पहले राहुल एक बार बैलगाड़ी से रोड शो देते हैं, दूसरी बार साइकिल चलाते रोड शो देते हैं। रोड शो ताकत का ‘शो’ होता है, ‘खेल’ का ‘शो’ नहीं होता! धन्य हैं राहुल के सलाहकार, जो एक न एक सीन में उनको ‘किशोर लीला’ करने वाला बना ही देते हैं। भाजपा अध्यक्ष अपने शो के बाद उसकी व्याख्या भी करते हैं। एक सौ तीस जीतने की बात करते हैं। लेकिन राहुल उनकी तरह अपने शो को सपोर्ट करने नहीं आते। न यह कोई बताता है कि कितनी सीट की उम्मीद है। स्पष्ट है, भाजपा आखिरी दम तक संघर्ष करती है। कांग्रेस बीच में हांफ जाती है। भाजपा एक मिनट के लिए टीवी को खाली नहीं छोड़ती। एक चैनल बताता है कि भाजपा ने बावन रैलियां कीं। कांग्रेस ने कितनी कीं? इसकी खबर तक नहीं होती। एक सवाल के जवाब में राहुल कह देते हैं कि अगर उनकी पार्टी को उन्नीस में सबसे ज्यादा सीटें मिलीं तो वे प्रधानमंत्री हो सकते हैं। राहुल और प्रधानमंत्री? कुछ एंकर उनका मजाक उड़ाने लगते हैं, मानो कह रहे हों: ‘ये मुंह और मसूर की दाल? लेकिन अंग्रेजी एंकर क्या जानें हिंदी मुहावरों का स्वाद? हां, राहुल को रगड़ने के लिए उनका इतना कहना पर्याप्त रहा। वह तो टाइम्स नाउ पर पत्रकार संजीव श्रीवास्तव ने साफ किया कि कांग्रेस को सरकार बनाने लायक सीटें मिलती हैं, तो वही प्रधानमंत्री बन सकते हैं। इसमें क्या दिक्कत है? दूसरा एंकर पूछने लगा: सरकार चलाने का उनको अनुभव तक नहीं। फिर शरद पवार बैठे हैं, ममता हैं, अखिलेश हैं…

सच! कई एंकरों के लिए राहुल एक समस्या हैं! कुछ एंकर तो राहुल का नाम सुनते ही पैर पटकने लगते हैं! आप एंकर हैं। ‘एंकरी’ करिए। ‘अहंकरी’ क्यों करते हैं? मगर, इन दिनों अहंकरी के बिना एंकरी कैसी? अहंकरी अहंकरी है। जब कभी आपस में टकरा जाती है तो एंकरी भी स्वयं एक खबर बन जाती है। ऐसा ही दिखा: टाइम्स नाउ के अंग्रेजी एंकर ने इसी चैनल के एक पूर्व अंग्रेजी एंकर (जो अब अन्य चैनल का मुख्य एंकर है) के बारे में प्रश्न किया कि उस पर ‘केस’ दर्ज है। आपको क्या कहना है? कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने उस पूर्व एंकर का नाम लेकर कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला होने के बावजूद वे बिना जमानत के बाहर कैसे घूम रहे हैं? वे सबसे सवाल करते हैं। आज उनसे सवाल किए जा रहे हैं? वे जवाब क्यों नहीं देते। एंकर ने बताया कि पुलिस अभी कागजात की जांच कर रही है… यह खबर किसी अन्य चैनल पर नहीं दिखी।

इस बीच फर्जी मतदाता पहचानपत्रों की बरसात हो गई। खबर फैलते-फैलते इतनी बड़ी हो गई कि चुनाव आयोग तक शिकायतें पहुंचीं। एक नहीं, दो नहीं, दस हजार के आसपास मतदाता पहचानपत्र एक घर से बरामद हुए। हर चैनल पर दो दिन हंगामा बरपा रहा। किसने किया? कांग्रेस बोली: भाजपा का हाथ है। भाजपा बोली: कांग्रेस का हाथ है। जिस घर से बरामदगी हुई वह भाजपा नेता का। जी नहीं, वह तो कांग्रेस में आ गई हैं। उनका बेटा बोला: वे भाजपा में हैं। वे बोलीं: मकान तो मेरा है, लेकिन उसमें क्या होता है, मुझे क्या मालूम? मामला चुनाव आयोग के हवाले! चुनाव आयोग देख रहा है। नई खबर है कि मतदाता पहचानपत्र नकली नहीं असली हैं। मिरर नाउ की एंकर ने एक नई बात पकड़ी और बताया कि सोशल मीडिया के ‘लाइक्स डिसलाइक्स’ के जरिए वोटरों को प्रभावित करने के तरीके उपलब्ध हैं और इस काम को कई विशेषज्ञ बहुत दिनों से कर भी रहे हैं। इस काम में लगे भाजपा के एक विशेषज्ञ ने यह माना भी।