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सेहत: भारी पड़ सकता है मोटापा

ब्रिटेन में 17 हजार लोगों के ऊपर किए गए अध्ययन से पता चला है कि जो लोग मोटापे के शिकार थे और जिनका बॉडी-मास इंडेक्स 30 से ऊपर था, उनमें 33 फीसद मृत्यु दर ज्यादा है।

Author Published on: May 24, 2020 12:13 AM
शोध बताते हैं कि मोटे लोगों पर कोरोना का खतरा ज्यादा है।

कोविड-19 का न तो अभी खतरा समाप्त हुआ है और न ही इस महामारी को लेकर तमाम तरह के वैज्ञानिक अनुसंधानों का सिलसिला। कुछ महीने पहले तक कोरोना संक्रमण के बारे में हम बहुत कम जानते थे। पर जैसे-जैसे समय बीत रहा है इस महामारी को लेकर हमारी जानकारी समृद्ध होती जा रही है। अमेरिका, इटली और चीन में हुए शुरुआती शोध अनुसंधानों से पता चला है कि अधिक बीएमआइ एक अहम कारक है कोरोना संक्रमण में। गौरतलब है कि शरीर के वजन और उसकी लंबाई का अनुपात बीएमआइ कहलाता है। बीएमआइ से हम किसी व्यक्तिके मोटापे और स्वस्थ्य होने का पता लगाते हैं। ऐसे ही एक और अध्ययन में मोटापे से ग्रसित लोगों में मृत्यु दर दोगुनी पाई गई है।

क्या कहते हैं शोध के नतीजे
सबसे पहले बात उन लोगों की जो पहले से मोटापा के शिकार हैं। अगर सीधा सवाल सवाल किया जाए कि क्या मोटे लोगों में कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा होता है, तो इसका जवाब है- हां। कम से कम शुरुआती शोध नतीजों के आधार पर तो यही कहा जा सकता है। चूंकि सभी शोध बेहद शुरुआती चरण के हैं, इसलिए इस बारे में ज्यादा विस्तार से तो अभी नहीं बताया जा सकता है लेकिन इतना जरूर है कि मोटापे के शिकार लोगों को इस बीमारी के प्रति अत्यधिक तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है।

वजन ज्यादा तो खतरा ज्यादा
अभी कि स्थिति में विशेषज्ञों ने कुछ आंकड़ों के आधार पर इस बारे में अपनी बात कही है। मसलन, ब्रिटेन में 17 हजार लोगों के ऊपर किए गए अध्ययन से पता चला है कि जो लोग मोटापे के शिकार थे और जिनका बॉडी-मास इंडेक्स 30 से ऊपर था, उनमें 33 फीसद मृत्यु दर ज्यादा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर इनमें दिल की बीमारी और मधुमेह जैसी दूसरी वजहें शामिल कर ली जाए तो यह आंकड़ा और अधिक हो जाता है।

बात ब्रिटेन की ही करें तो वहां आइसीयू में भर्ती हुए लोगों के ऊपर किए गए अध्ययन से यह बात सामने आई है कि वहां भर्ती 34.5 फीसद लोग ‘ओवरवेट’ थे और 31.5 फीसद मोटे थे। इनमें सात फीसद मोटे और बीमार दोनों थे जबकि 26 फीसद लोगों की बीएमआइ सामान्य थी। वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन का कहना है कि जिन लोगों को कोरोना संक्रमण हो रहा है, उनमें से बड़ी तादाद उन लोगों की है जिनकी बीएमआइ 25 से ऊपर है।

चर्बी यानी गड़बड़ी
दरअसल, मोटापा अपने आप में संकेत है कि शरीर में सब कुछ सामान्य नहीं है। सेहत के लिहाज से यह कतई अच्छी स्थिति नहीं कही जा सकती है। जितना अधिक वजन होगा, उतना ही ज्यादा चर्बी आपके शरीर में होगी और उतने ही कम आप ‘फिट’ होंगे। इससे आपके फेफड़ों की क्षमता पर भी असर पड़ता है। यही नहीं, इससे आपके रक्त तक आॅक्सीजन पहुंचने में दिक्कत होती है। नतीजतन शरीर में रक्त प्रवाह और दिल पर असर पड़ता है।

एसीई-2 एंजाइम
इस बारे में एम्स भोपाल की डॉक्टर अदिति बताती हैं, ‘जिन लोगों के शरीर का वजन ज्यादा होता है, वैसे लोगों के शरीर की भीतरी व्यवस्था ठीक नहीं चल रही होती है। एक तो जहां वे ऐसे शरीर से ज्यादा श्रम नहीं कर पाते, वहीं सामान्य लोगों के मुकाबले उन्हें ज्यादा आॅक्सीजन की दरकार होती है।’ वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि कोशिकाओं में मौजूद एसीई-2 नाम का एंजाइम कोरोना संक्रमण के शरीर में प्रवेश को आसान बनाता है। यह एंजाइम बड़े पैमाने पर मोटी कोशिकाओं (फैटी सेल्स) में पाया जाता है। जो लोग ज्यादा वजनी होते हैं, उनमें ऐसी कोशिकाएं ज्यादा होती हैं। लिहाजा उनके संक्रमित होने का खतरा भी ज्यादा होता है।

प्रतिरोधक क्षमता पर असर
मोटापे का शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से भी गहरा संबंध है। कोरोना संक्रमण के बारे में बढ़ी जागरूकता के बाद ज्यादातर लोग इस बात से अब अवगत हैं कि इससे बचाव में सबसे अहम कारक है हमारे शरीर की प्रतिरोधी व्यवस्था और क्षमता। मोटे लोगों में ये दोनों ही चीजें काफी कमजोर होती हैं।

गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के दौरान ‘मैक्रोफेज फैटी सेल्स’ को क्षतिग्रस्त कर देता है। वैज्ञानिक बताते हैं कि इससे शरीर में ‘साइटोकीन स्ट्रॉम’ पैदा होता है। यह एक तरह की शारीरिक प्रतिक्रिया है, जो खतरनाक भी हो सकती है। यह शरीर प्रतिरोधक क्षमता के अत्यधिक सक्रिय होने की वजह से होता है। इस बारे में डॉ. अदिति बताती हैं कि एक खास तरह की मोटी कोशिका को मैक्रोफेज आसानी से अपना शिकार बना लेता है। साफ है कि मोटे लोगों के लिए कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा है।

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