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वक्त की नजर: नफरत के सहारे

विकास और परिवर्तन की जगह मुसलमानों को मोदी के राज में मिली है नफरत और गोरक्षकों के हमले। सो, एक बात जो अभी से तय है 2019 के आम चुनाव को लेकर, वह यह कि भारतीय मुसलिम अपना वोट मोदी को किसी हाल में नहीं देने वाले हैं।

Author April 29, 2018 05:15 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो।

मैंने कई बार स्पष्ट किया है अपने लेखों में कि न मुझे हिंदुत्ववादी विचारधारा से मोहब्बत है और न हिंदुत्ववादियों से। मैं जानती हूं कि हिंदुत्व शब्द पुराना है और इससे जुड़ी विचारधारा को जन्म दिया था वीर सावरकर ने कोई सौ वर्ष पहले, लेकिन आज जीवित होते सावरकर तो शायद वे भी हिंदुत्ववादियों से दूर रहते। इसलिए कि इन्होंने एक नया हिंदुत्व ईजाद किया है, जिसके बुनियादी सिद्धांत हैं नफरत, क्रोध और अतीत में भारत पर हुए मुसलिम हमलों के लिए बदला लेना। इस्लाम को हिंसक और गलत मजहब साबित करना और साथ में यह भी साबित करना कि मुसलिम पैदाइशी जिहादी हैं, उनका मुख्य मकसद है। सो, इन हिंदुतवादियों का मानना है कि हिंदुस्तान हिंदुओं के लिए है और इस नए हिंदुस्तान में तभी जगह मिल सकती है मुसलमानों को जब वे कबूल करने को तैयार हो जाएंगे कि इस देश में वे दूसरे दर्जे के नागरिक हैं। आज के हिंदुत्ववादी अपनी देशभक्ति में भी नफरत का जहर घोलते हैं और इस हद तक उनको मुसलमानों से नफरत है कि छोटी बच्चियों के बलतकार को भी हिंदू-मुसलिम रंग में ढाल लेते हैं। ऐसा नहीं कि इस सोच के हिंदुत्ववादी पिछले तीन वर्षों में पैदा हुए हैं, लेकिन ऐसा जरूर है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद इनकी आवाज ज्यादा सुनाई देने लगी है। ट्विटर पर जैसे अपना पूरा दिन गुजारते हैं हिंदू धर्म के ये तथाकथित रखवाले और जब कोई ऐसी बात होती है, जिससे उनको मौका मिलता है मुसलमानों के खिलाफ गालियां बकने का तो सोशल मीडिया पर नफरत की चादर छा जाती है। हाल में ऐसा तब हुआ जब कठुआ के गांव में उस बच्ची को मंदिर में कैद करके कई दिनों तक नींद की गोलियां देकर उसका सामूहिक बलात्कार किया गया। जब तक इस बच्ची की हत्या इन दरिंदों ने की तब तक जिंदा लाश बन गई होगी। इसका हाल सुन कर आम लोगों के दिलों में सिर्फ दर्द और शर्म की भावनाएं उभरी थीं, लेकिन हिंदुत्ववादी दिलों में हमदर्दी की जगह जहां होनी चाहिए थी, वहां था शक। सो, कई दिनों से साबित करने में लगे हुए हैं कि बलात्कार हुआ ही नहीं था इस बच्ची के साथ और इसकी हत्या इसके अपने रिश्तेदारों ने की थी, हिंदुओं ने नहीं।

इन हिंदुत्ववादियों को खास नफरत है कांग्रेस पार्टी और सेक्युलर विचारधारा से, सो जब भी मौका मिलता है, याद दिलाने में लग जाते हैं कि कांग्रेस के दौर में मुसलमानों को खास दर्जा दिया गया था। पिछले हफ्ते इनको एक और मौका मिला कांग्रेस और मुसलमानों को निशाना बनाने का। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कह क्या दिया कि कांग्रेस के दामन पर भी मुसलमानों के खून के धब्बे हैं, कि हिंदुत्व के सिपाही टूट पड़े उन पर। उनकी साहस को दाद देने के बदले उन पर और कांग्रेस पर गालियां बरसाई गर्इं। सेक्युलरिजम को गालियां दी गर्इं और तुष्टीकरण शब्द उछाला गया। यह भी कहा गया कि कांग्रेस पार्टी ने शुरू से सिर्फ मुसलमानों का ही साथ दिया है। यह बात इतनी बार कही गई है कि हाल में जब सोनिया गांधी से इंडिया टुडे कांक्लेव में पूछा गया कि उनके बेटे आजकल क्यों इतने मंदिरों में जाने लगे हैं और अपने आपको शिवभक्त क्यों कहते फिर रहे हैं, तो सोनिया ने कहा कि इसलिए कि झूठी खबर फैलाई गई है कि कांग्रेस एक मुसलिम पार्टी बन गई है। कड़वा सच यह है श्रीमतीजी कि आपके पतिदेव ने मुसलमानों को शरीअत के तहत तलाक करने का हक न दिया होता तो शायद हिंदुत्व आंदोलन शुरू ही न होता। जब शाहबानो वाले मामले में राजीव गांधी ने खास हक मुसलिम मर्दों को दिए नया कानून बना कर, तो देश भर में भारतीय जनता पार्टी का नारा गूंजने लगा: एक संविधान, एक विधान। मुझे याद है कि इस नारे का असर लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा से भी ज्यादा था उस समय। और अगला चुनाव जब आया तो भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा में अपनी सीटें दो से पचासी तक पहुंचा दी थीं।

फिर जब सोनिया-मनमोहन का दौर शुरू हुआ तो 2006 में डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा कि मुसलमानों का खास अधिकार है भारत की विकासराशि पर। यह बात हजम ही हुई थी कि विकिलीक्स द्वारा मालूम पड़ा कि राहुल गांधी ने अमेरिका के राजदूत से एक मुलाकात में कहा कि जिहादी आतंकवाद से कम खतरा है भारत को, हिंदू आतंकवाद से ज्यादा। ऐसी बातों से ही तो पैदा हुए हैं आज के कटरपंथी हिंदू। नफरत ने इतना अंधा कर दिया है कि उनको यह नहीं दिखता कि कांग्रेस की दशकों की मोहब्बत से मुसलमानों को इतना कम हासिल हुआ है विकास और तरक्की के तौर पर कि सबसे गरीब भारतीयों की गिनती में मुसलिम सबसे ज्यादा हैं।

हो सकता है, मुसलिम राजनेता भी जानते हों इस बात को, लेकिन चूंकि मुसलमानों के लिए सुरक्षा सबसे बाद का मुद्दा है, सो जब चुनाव आता है तो अपना वोट देते हैं कांग्रेस को, क्योंकि कांग्रेस की भाषा में नफरत नहीं है। नरेंद्र मोदी ने अपना सबका साथ, सबका विकास वाला वादा थोड़ा भी पूरा किया होता पिछले तीन वर्षों में, तो यकीन के साथ कहने को तैयार हूं मैं कि मुसलमान पहली बार अपना वोट भारतीय जनता पार्टी को देते। विकास और परिवर्तन की जगह मुसलमानों को मोदी के राज में मिली है नफरत और गोरक्षकों के हमले। सो, एक बात जो अभी से तय है 2019 के आम चुनाव को लेकर, वह यह कि भारतीय मुसलिम अपना वोट मोदी को किसी हाल में नहीं देने वाले हैं।

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