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बाखबर: हनुमान हमारे, तो मंदिर क्यों तुम्हारे

कई चैनल ऐसा ही करते हैं। घृणा को लेकर और भी घृण्य चर्चाएं कराते हैं और फिर पूछते फिरते हैं कि घृणा कौन फैला रहा है? नेता करें तो करें। ऐसी चीजों को आप क्यों भाव देते हैं सर जी? अपने दोनों ओर एक से एक तंग-जहनों को बिठा कर किस उदारता की उम्मीद करते हैं आप?

Author December 9, 2018 2:24 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

अगर भाजपा सरकार बनी तो निजाम की तरह ही ओवैसी को भागना होगा… (जनता टूट के ताली मारती है)
तवारीख देखें। निजाम भागे नहीं थे, उनको तो राज्य का मुखिया बनाया गया था। मेरे पुरखे हजार साल पहले यहां आए थे। यह देश मेरे अब्बा का है। मेरे डैडी का है। मेरे पापा का है। मुझे कौन निकाल सकता है… (जनता जम के ताली मारती है)
कई खबर चैनल शाम को इन टुकड़ों को बजाते हुए एक मासूम-सा सवाल करने लगते हैं कि कौन है जो घृणा फैला रहा है?
अरे मित्र! आप ही के चैनल से निकली ‘लाइव बाइट’ और आप ही पूछते फिरते हैं कि कौन घृणा फैला रहा है? और फिर इस घृणा पर आप ही तो इससे भी अधिक घृणास्पद चर्चाएं कराते फिरते हैं।
एक चैनल खबर ब्रेक करता है कि मंदिर वाले कहते हैं कि मंदिर के लिए पांच लाख जुटेंगे और मस्जिद वाले कहते हैं कि हमारे पच्चीस लाख जुटेंगे।
एक एंकर अपनी बार्इं तरफ तीन मुसलिम प्रवक्ताओं को बिठाता है और दार्इं तरफ तीन हिंदू प्रवक्ताओं को बिठाता है और पूछने लगता है कि अयोध्या के लिए यह ‘रेस’ क्यों? कौन है, जो मंदिर-मस्जिद की बहस को उकसा (प्रवोक)रहा है?
बहस में पहले मस्जिद वाले मस्जिद और अदालत की बात करते हैं, फिर मंदिर वाले मंदिर और आस्था का दावा करते हैं। दोनों पक्षों में लंबा वाक्युद्ध शुरू हो जाता है। एंकर पूछता रहता है- आप लोग क्यों उकसा (प्रवोक) रहे हैं…
पचास मिनट तक उकसावे को प्रसारित कर पूछते हैं सर जी कि कौन उकसा रहा है?कई चैनल ऐसा ही करते हैं। घृणा को लेकर और भी घृण्य चर्चाएं कराते हैं और फिर पूछते फिरते हैं कि घृणा कौन फैला रहा है? नेता करें तो करें। ऐसी चीजों को आप क्यों भाव देते हैं सर जी? अपने दोनों ओर एक से एक तंग-जहनों को बिठा कर किस उदारता की उम्मीद करते हैं आप?
एएमयू के मेस में धर्म-भ्रष्ट करने की साजिश! एक स्वामी जी कहते हैं कि जिस तेल में मीट तला, उसी में पूड़ी तली! एंकर पूछता है, जब चुनाव आते हैं तभी एएमयू क्यों याद आती है?

कि सोमवार को बिल्लियों के भागों छींका टूटता है : खबर चैनल बुलंदशहर के स्याना इलाके की दंगाई खबरों से पट जाते हैं : दंगे के एक आरोपी द्वारा दो दिन पुराने एक पशु कंकाल के खेत में होने को गोकशी का प्रमाण कह कर अफवाह फैलाना, दंगाई भीड़ का जुटना, पुलिस थाने पर हमला करना और सुमित नाम के व्यक्ति और एक पुलिस इंसपेक्टर की गोली लगने से मौत… दंगाई फुटेज दिल दहलाने वाले हैं। दंगाई भीड़ पुलिस पर ही हमला करती दिखती है।
अगले रोज एक चैनल वीडियो दिखाता है कि ये रहा हाथ में पत्थर लिए सुमित, जिसे गोली लगी और मरा। एंकर कहता है कि यह तो सामान्य नागरिक नहीं लगता। यह तो स्वयं हाथ में पत्थर लिए हमला करता एक दंगाई दिखता है। वीडियो फिर दिखाता है कि जिस इंसपेक्टर को ऐन पास से कनपटी पर गोली मारी गई है उसका शरीर गाड़ी से लटक कर नीचे झूल रहा है… चैनल बताते हैं कि इस दंगे का एक आरोपी बजरंग दल का नेता योगेशराज है। इसी पर इंसपेक्टर की हत्या का आरोप है। एक और वीडियो में कोई कह रहा है कि यह वही इंसपेक्टर है… कुछ देर बाद इंसपेक्टर मारा जाता है।
एफआईआर होती है, जिनमें योगेशराज आदि कइयों के नाम हैं। कुछ पकड़े जाते हैं, लेकिन गोकशी की अफवाह फैलाने का आरोपी योगेशराज तीसरे दिन तक फरार है और ‘वह दंगे की जगह मौजूद नहीं था’ जैसे वीडियो भेजता रहता है। चैनल दिखाते रहते हैं।
एक एफआइआर गोकशी करने वालों के खिलाफ भी होती है। एक चैनल बताता है कि गोकशी के आरोप में दो मुसलिम बालक पकड़े गए हैं। एक ग्यारह साल का है और एक बारह साल का…

यों तो इंसपेक्टर की हत्या के दूसरे दिन ही कहानी खुल गई थी, लेकिन तीसरे दिन एक चैनल कहानी को और खोलता है कि यह वही इंसपेक्टर एसके सिंह था, जिसने दादरी के अखलाक की हत्या मामले की जांच करके रिपोर्ट लिखी थी। यह केस का मुख्य गवाह भी था… शायद इसीलिए निशाने पर था।
तीसरे दिन खबर आती है कि यह ‘साजिश’ है! कितना सही शब्द है ‘साजिश’! एंकर चौंकते हैं कि साजिश है तो किसकी? एक अंग्रेजी चैनल की एंकर पूछती है : यूपी के सीएम हैं कहां? इस बीच ‘इन द लाइन आफ ड्यूटी’ शहीद हुए इंसपेक्टर एसके सिंह के परिजन लखनऊ में यूपी के सीएम से मुलाकात करते हैं। मुआवजे में पचास लाख रुपए और एक लड़के को नौकरी के वादे किए जाते हैं… चार दिन बाद बुलंदशहर की हत्यारी कहानी का उपसंहार होता है।

बुधवार की शाम अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर के सौदे के दलाल मिशेल के भारत लाने और सीबीआई की पूछताछ की कहानी चैनलों में छा जाती है और कांग्रेस की धुनाई शुरू हो जाती है। भाजपा आरोप लगाती है कि कांग्रेस के वकील मिशेल को बचाना चाहते हैं? कांग्रेस के जयवीर शेरगिल जवाब देते हैं कि एक आरोपी वकील हमने हटा दिया। हमने ही अगस्ता को ब्लैक लिस्ट किया, लेकिन इस सरकार ने उसे ‘मेक इन इंडिया’ में रखा। फिर, नीरव मोदी के वकील तो भाजपा के ही लोग हैं। वह हमारे वकीलों पर आरोप लगाती है, लेकिन अपने गिरेबान में झांक कर नहीं देखती…
अचानक एक खबर हमारे ज्ञानचक्षु खोलती है कि हनुमान तो दलित थे, वंचित थे, आदिवासी थे… दलितों के हवाले से एक चैनल लाइन लगाता है : हनुमान हमारे, तो मंदिर क्यों तुम्हारे? भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले कहती हैं : हनुमान जी दलित थे इसलिए उनको बंदर बना दिया…
अगले दिन सावित्री बाई फुले भाजपा पर ‘विभाजनकारी राजनीति’ करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे देती हैं।

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