ताज़ा खबर
 

बाखबर: बहुत कठिन है डगर उन्नीस की

एक दिन संसद ने बहुत काम किया। तीस मिनट में सैकड़ों संशोधन पास कर दिए! वित्त विधेयक पास कर दिया। संदेश- शोर करोगे तो ऐसे ही होगा। चिल्लाते रहो कि जनतंत्र का मर्डर है। आप हल्ले से ‘मर्डर’ करते हो तो वे अपने अंध-बहुमत से करते हैं। अपना जनतंत्र इसी तरह चलता है।

Author March 18, 2018 3:15 AM
पुरुषों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित 35,000 से अधिक किसानों ने छह दिनों से ज्यादा समय में 180 किलोमीटर लंबे मार्च को पूरा किया था। (Photo: PTI)

मुंबई में एक दिन किसान ही किसान। मीलों लाल ही लाल निशान। लाल टोपी लाल झंडे। नंगे पैर। घायल पैर। भारतीय किसान सभा की एक सौ अस्सी किलोमीटर लंबी मार्च। न शोर शराबा, न हंगामा। सब अनुशासित। गरीबी की गरिमा। भूखे-प्यासे चिलचिलाती गरमी! लेकिन उफ्फ तक नहीं। मंडलियां भजन गातीं। रिपोर्टर उनकी शान देख निहाल होते। मुंबई की फिल्मी मिडिल क्लास पिघली। शिवसेना तक समर्थन में आई। गुरद्वारों से लंगर आए। मुसलमान युवक खाना देने लगे। इतने ‘किसान मित्र’ कभी नहीं दिखे। चैनलों में किसानों के प्रति गहरी हमदर्दी नजर आई। दंभी सरकार को झुकना पड़ा। सीएम को मांगें माननी पड़ीं।

लेकिन लाल रंग का ऐसा जलवा भाजपा की एक सांसद को नहीं भाया। बोल उठीं कि ये माओवादियों से पे्ररित हैं। ये शहरी नक्सल हैं। लेनिन के पोस्टर लिए हैं। राजनीति कर रहे हैं।
सच मैडम! ये जो लेनिन है न मुआ! गिराए जाने के बाद भी नहीं गिरा! उधर आपने गिराया तो किसानों ने इधर उठाया! कितना बेशर्म है ये?
उफ्फ! चौदह मार्च की अपशकुनी सुबह! एक ही दिन में भाजपा वालों को तीन-तीन झटके। गोरखपुर हारे। फूलपुर हारे और अररिया भी हारे। सपा-बसपा का सिक्का चला। अररिया में तेजस्वी का सिक्का चला! अखिलेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जनता का, मायावती का धन्यवाद देकर भाजपा के ‘बुरे दिनों’ का आह्वान कर दिया।
अवसर देख एंकरों ने कसर पूरी की। कुरेद-कुरेद कर पूछने लगे- कहां गई मोदी लहर? कौन हारा? मोदी या योगी या दोनों? एक चैनल ने तो लाइन ही लगा दी कि क्या उन्नीस का रास्ता गोरखपुर होकर जाता है! वे दर्पाेद्धत चेहरे गायब रहे जो किसी को बोलने भी नहीं देते थे। योगी जी ने माना कि ‘अति आत्मविश्वास’ ने मारा।
संघ की समझ में आया कि बसपा और सपा का यह चुनावी सहयोग इतनी अचानकता लिए आया कि भाजपा को संभलने का वक्त तक न मिल सका।
एक चैनल पर एक विशेषज्ञ बोला कि जहां कांगे्रसादि को तो भाजपा हरा देती है, लेकिन जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां हार जाती है। लगता है कि ‘एंटी इंनकंबेंसी’ शुरू है। जनता भाजपा से नाराज है। एक चैनल ने तो आंकड़ा भी दे दिया कि अगर ऐसा ही रहा तो उन्नीस में भाजपा को दो सौ बहत्तर सीटें मिल जाएं तो गनीमत समझिए। यह सिर्फ जाति-समीकरण नहीं है। लोग भाजपा से वाकई नाराज हैं। अपशकुन पर अपशकुन हो रहे हैं।
लेकिन शाम तक एंकर मित्रों के आंसू पोंछने लगे। एक ने अंग्रेजी में तसल्ली दी- उन्नीस में छब्बीस दलों के बरक्स अकेले मोदी होंगे। छब्बीस में कौन है जो मोदी के मुकाबले का हो? एक चर्चाकार बोला कि कुछ भी कहो, मोदी की ‘अजेयता’ का मिथ टूट गया है। कवच में छेद तो हो ही गया है। एक भाजपा प्रवक्ता हारी हुई कांग्रेस की खिल्ली उड़ाने में ही खुश नजर आया। कांग्रेस की खुशी देख कह उठा- बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना!
अररिया में राजद की जीत पर भाजपा के एक केंद्रीय मंत्री अकुला कर उवाचे- अररिया अब आतंकवादियों का अड्डा बन जाएगा। जवाब दिया राबड़ी ने कि सारे आतंकवादी तो भाजपा में हैं।