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बाखबर: घृणा से कला नहीं बनती

मनोरंजक सीन तब बने जब हनुमान जी भक्तों के हाथ लगे। फिर क्या था! एक से एक उच्च कोटि के हिंदू एंथ्रोपोलॉजिस्ट और जिनियोलॉजिस्ट उनकी जाति की खोजबीन करते दिखे!

Author December 30, 2018 3:43 AM
भगवान हनुमान की को राजस्थान चुनाव प्रचार के दौरान यूपी के सीएम ने अनुसूचित बताया था। (फाइल फोटो)

गडकरी जी ने एक दिन कुछ कहा। चैनलों में एक लाइन आकर दर्शकों को हिलाने लगी कि हार की जिम्मेदारी नेतृत्व को लेनी चाहिए… कि फिर मैनेजिंग लाइन आने लगी कि गलत समझा मीडिया ने… कि फिर गडकरी के नाम से वैसी ही एक लाइन बताई जाने लगी कि हार की जिम्मेदारी स्वीकार की जानी चाहिए। ये ‘हार जीत’ क्या होती हैं आदरणीय? अरे भाई ‘हानि लाभ जीवन मरण यश अपयश विधि हाथ’! काहे कुरेदते हो? सबसे मनोरंजक सीन तब बने जब हनुमान जी भक्तों के हाथ लगे। फिर क्या था! एक से एक उच्च कोटि के हिंदू एंथ्रोपोलॉजिस्ट और जिनियोलॉजिस्ट उनकी जाति की खोजबीन करते दिखे! एक से एक विद्वान आते और हनुमान जी की जाति को इस तरह बताते जैसे उनकी जन्मकुंडली बना कर आए हों! सब हनुमान जी की लीला! हनुमान हमारे! हम चाहे ये करें, हम चाहें वो करें… हमारी मर्जी!ऐसे श्रद्धापूर्ण समय में अयोध्या में दो सौ सेक्स वर्कर्स को रामकथा सुनाते मुरारी बापू के फुटेज दिखा कर क्या चैनल पाप के भागीदार बनते?

हां, एक एंकर ने हिंदू धर्म के कुछ रक्षकों को बुलाया, जिनमें से एक को ‘सेक्स वर्कर’ शब्द पर ही आपत्ति रही! उन्हें एतराज था कि मुरारी बापू ने उनको अयोध्या क्यों बुलाया। मुंबई में ही सुना देते कथा! कहना ही था तो उनको ‘रामभक्त’ कहते, ‘सेक्स वर्कर’ क्यों कहा?
बेचारी एंकर कहती रही कि इसमें मुरारी बापू ने गलत क्या किया? ऐसे रक्षकों से निपटने के लिए एंकर को तुलसीदास की ये लाइनें सुना देनी चाहिए थीं कि- ‘पाई न केहि गति पतित पावन राम भज सुन सठ मना! गणिका अजामिल ब्याधि गीध गजादि खल तारे घना!!’
अगर मुरारी बापू ने अयोध्या में गणिका-प्रसंग सुना कर कथा कही तो क्या बुरा किया? भगवान ने तो गणिका को भी तारा है। मगर अपने चैनल क्या करें? दो पाटन के बीच में साबुत भी तो रहना है!
लीजिए! कुछ चैनल तो अभी से 2019 की भूमिका बांधने में लग गए हैं। पहले वे यही सवाल पूछते हैं कि ‘अगर आज चुनाव हों तो क्या हो सकता है?’ फिर ‘नेशनल रेटिंग्स’ बताने लगते हैं और अभ्यस्त भविष्यद्रष्टा कहने लगते हैं कि अगर महागठबंधन हुआ तो एनडीए ढाई सौ सीट के आसपास सिमट जाएगी। अगर न हुआ तो 290 के आसपास सीट ले आएगी!
शुभचिंतक एडवांस में संकेत देकर रास्ता बनाते हैं। अगर अभी से न संभाला तो कब सभालेंगे?देश का सवाल है! सही लाइन देने का सवाल है!
तमिलनाडु की एक चलती सड़क पर एक ज्योतिषी को एक आदमी सरेआम काटता है। दो आदमी दूर खड़े तमाशा देखते रहते हैं। तीसरा फिल्म बनाता रहता है। एक चैनल इसे दो दिन दिखाता है। लेकिन कहीं हलचल नहीं होती!
इस बीच अटल जी के स्मारक स्थल पर उनकी स्मृति में एक बड़ी सभा हो गई। पीएम ने अटल जी की खूबियों को खूब याद किया। साथ ही एक सौ रुपए का सिक्का भी रिलीज किया, जिस पर अटल जी अंकित हैं! मगर ऐसे प्रतीकात्मक अवसर पर गायक पंकज उधास का गायन कुछ जमा नहीं सर जी!
इन दिनों की ब्रेक होती खबरें बताती रहती हैं कि ये दिन बडे ही खुंदकी हैं।

एक शाम पंजाब में दो सिख राजीव गांधी की मूर्ति पर कालिख छिड़कते दिखाए जाते हैं, लेकिन कहीं कोई धिक्कार नहीं उठता! पंजाब के सीएम ऐसे तत्त्वों की निंदा करते हुए अकालियों को जिम्मेदार ठहराते हैं कि एक दिन बाद दिल्ली के राजीव चौक के बोर्ड को दो महिलाएं काला करती नजर आती हैं! इसका फॉलोअप कोई नहीं करता!
ऐसे में एक दिन नोएडा के सेक्टर अट्ठावन के एक पार्क ने बड़ी खबर बनाई। एक बड़े पुलिस अफसर ने पार्क में नमाज अता करना बैन कर दिया और उन कपंनियों को ताकीद कर दी कि उनके कर्मी यहां आए तो जबावदेही उन्हीं की होगी। शिकायत बजरंग दल के कार्यकर्ता ने की थी! चैनल लग लिए। खबर ही ऐसी थी, जिसमें विभाजनकारी बहस के कई एंगिल मौजूद थे! कई चैनल ‘पब्लिक प्लेस बरक्स प्रार्थना के अधिकार’ पर तीखी बहसें कराते रहे।
इस बीच एनआइए ने आइएसआइएस के एक मॉड्यूल को दिल्ली और यूपी के एक शहर में धर दबोचा! दस आतंकी गिरफ्तार किए। एक सौ बारह घड़ियां, सौ मोबाइल और बहुत-सी बंदूकें तथा राकेट लांचर तक पकड़े। ये सरकारी संस्थानों, उत्सवों को और भीड़ को निशाना बनाने वाले थे।

बृहस्पतिवार को तीन तलाक बिल को लोकसभा ने पूरे दिन की बहस के बाद पारित कर दिया। कांग्रेस ने वाकआउट किया! सबको मालूम है कि यह राज्यसभा में अटकेगा!
ठाकरे नामक फिल्म पर सेंसर बोर्ड की चली कैंची से नाराज शिवसेना ने साफ कह दिया कि ठाकरे को कोई सेंसर नहीं रोक सकता! लेकिन बहस का विषय बनाई गई ‘एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’! एक अंग्रेजी एंकर उसके टुकड़े दिखा-दिखा कर उसकी ‘कला’ के कसीदे काढ़ती रही और इसे बैन करने की मांग पर कांग्रेस को कोसवाती रही! इसके टुकड़े संवादों में न हास्य लगता है, न व्यंग्य! एकदम फ्लैट लगती है यह! इसे बैन करने की मांग करके इसके भाव क्यों बढ़ाते हो यारो!
‘पर-पीड़ा में आनंद; साडिस्ट प्लेजर’ लेने की कला खुंदकी कला कहलाती है!
घृणा से कला नहीं बनती सरजी!

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