ताज़ा खबर
 

‘बाखबर’ कॉलम में सुधीश पचौरी का लेख : अपना रेट अपना पेट

इन दिनों कई कहानियां पलटी मारती दिखती हंै। दो दिन दादरी की कहानी को पलटने की कवायद दिखती रही, अब मथुरा कांड को पलटने की कवायद चल रही है! बने रहें कहानियों को लिखने-पलटने वाले! हर कहानी पलटती दिखेगी।

Author नई दिल्ली | June 12, 2016 4:47 AM
शाहिद ने ‘उड़ता पंजाब’ के ट्रेलर लॉन्च पर बताया था कि वह पिता बनने वाले हैं।

वह गर्व भरा मदमाता सीन सीधे अमेरिकी कांग्रेस से प्रसारित होता दिखा। मोदी के अड़तालीस मिनट के संबोधन में चौंसठ बार तालियां बजीं- तड़ तड़ तड़! मोदीजी की पंच लाइनों पर अमेरिकी सीनेटरों ने नौ बार खड़े होकर अभिवादन में देर तक ताली पीटी। हमारे पांच पूर्व प्रधानमंत्रियों को कुल मिला कर उतनी तालियां नसीब नहीं हुर्इं, जितनी हमारे पीएम मोदीजी ने लीं। मोदीजी छा गए। इतनी ताली तो ओबामा को भी नहीं मिल सकती। ऐसा अभिवादन अपने आप में एक रिकार्डतोड़ सफलता है!
मगर, हमारे चैनलों पर तो विदेशनीति विद्वानों की आतुरी बेकार दिखी। दो चैनलों पर तो ऐसा समा बांधा गया कि मोदीजी लौटेंगे तो एनएसजी की सदस्यता लेकर लौटेंगे। एनएसजी की जगह मिली तो सिर्फ ताली!

बहरहाल, अमेरिका फतह हुआ, लेकिन घर में तो कलह दिखने लगी। ‘प्रथम ग्रासे मक्षिकापात:’ के दर्शन होने लगे। पहल पशुप्रेमी मंत्री मेनका गांधी ने एक बाइट पर्यावरण मंत्री और मंत्रीलय को ‘जानवरों की हत्या की हवस’ का मारा बताया! तिक्तता के साथ उनने कहा कि न जाने क्या हवस-सी आ गई है कि जानवरों को मारने को कहा जा रहा है। कहीं बंदरों को मारा जा रहा है, कहीं हाथियों को, कहीं मोरों को, कहीं लगूरों को मार रहे हैं, कहीं नीलगायों को मारा जा रहा है। न्यूज एक्स पर बिहार के प्रवक्ता ने जावडेकरजी के कथन का प्रतिकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने नीलगायों को मारने के लिए कभी पत्र नहीं भेजा! सबसे असह्य सीन वे दिखे, जिनमें खाली मैदान में चलती नील गायों को दर्जनों किराए के लोग बंदूकों से निशाना साध कर मार रहे थे! उफ्फ! एक ओर गो-भक्तों का गाय प्रेम और दूसरी ओर नीलगायों की हत्या का आयोजन!

मेनका के जवाब में जावडेकरजी ने फरमाया कि वे किसी की टिप्पणियों पर कमेंट नहीं करते, वे तो किसानों के हित की मांग पर कानून के अनुसार आज्ञा देते हैं। एक चैनल ने इस कलह-कथा को वरुण गांधी की उपेक्षा की प्रतिक्रिया कह कर पर्सनल मोड़ दे दिया। पर्सनल होते ही पशुओं की हत्या उचित हो गई! ऐसे राजनीतिक ट्विस्टों की जय हो, जो हर मुद्दे को पर्सनल बना कर मुद्दे का ही वध कर देते हैं! यह रहा अंतर्कलह का मैनेजमेंट!

‘उड़ता पंजाब’ रिलीज से पहले ही हिट हो गई। सेंसर पास ट्रेलर चैनलों ने इतनी बार दिखाया कि पिक्चर न भी देखें तो काम चलेगा। सौजन्य रहा अपने ‘संस्कारी सेंसरजी’ यानी ‘हैशटेग उड़ता निहलानी’जी का। न चैरासी कटों की बात करते और न खुद को मोदी का चमचा कहे जाने पर सीना फुलाते, न फिल्मवालों से पंगा होता। दो दिन चली बहसों की बाइटें एक-दूसरे को कॉमिक तरीके से काटती रहीं।

अदालत ने फिल्मकारों से पूछा कि वे मीडिया में क्यों गए? उधर सेंसर बोर्ड को कहा कि चैरासी ‘कटों’ का औचित्य सिद्ध करे! दो दिनों की बहसों के बाद महसूस हुआ कि पंजाब जितना नशे में है उससे ज्यादा नशे में सेंसर-स्वामी की कैंची है और जो नशे में नहीं रहे वे ‘राजनीतिक करेक्ट’ रहते हुए न बोलें तो उनका काम कैसे चले?

इस बीच भारत की चिंता में व्याकुल एक साध्वीजी ने देश को सुझाव दे डाला कि अब भारत कांग्रेस मुक्त तो हो गया, अब हिंदुस्तान को मुसलमानों से मुक्त होना चाहिए! कांग्रेस मुक्त भारत, नेहरू मुक्त भारत, गांधी परिवार मुक्त भारत और अब साध्वीजी की ऐसी मनोहर वचनावली! चैनल बहस कराने के लिए ताल ठोंक ही रहे थे कि सपा ने इस पलीते पर यह कह कर घड़ों पानी डाल दिया कि ऐसी वचनावली को इग्नोर ही करना चाहिए! पलीते पर पानी डालने की यह तरकीब बेहतर दिखी, वरना हर सप्ताह कोई न कोई महानुभाव एक पलीता वाक्य बोल कर बहस का स्वामी बन जाता है!

पूरा सप्ताह एमएलेज के बढ़ते रेट को देख कर लगा कि हम खबरों में ‘अपना रेट अपना पेट’ नामक सीरियल देख रहे हैं। सब खुशी-खुशी अपना मार्केट रेट बताते थे। किसी का पांच करोड़ था, तो किसी का दस करोड़ और अपना रेट बताते हुए वे स्टिंग में दिखते थे। लेकिन वाह रे अपने रेट बताने वाले नेता जनो, आपका भी जवाब नहीं। रेट बताने के माने ही पलट दिए। कह दिया कि रेट बताने वाले तो पत्रकारों से मजाक कर रहे थे!

एक क्रांतिकारी एंकर दो दिन तक इस भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए आग्रह करता रहा कि अब भी समय है कि सभी दल अपने यहां से ऐसे तत्त्वों को निकाल बाहर करें! लेकिन एंकर यह मर्म भूल गया कि अगर सब दलों ने रेटिंग वाले लोग निकाल बाहर किए तो दलों में बचेगा क्या? और तुम एक सप्ताह तक किस पर दनदनाओगे?

मथुराकांड पर सबसे सुंदर ट्वीट ड्रीम गर्ल हेमा मालिनीजी के रहे। चैनलों ने उनको ‘आयम ऐन आर्टिस्ट’ की अकड़ को चैनलों ने लगभग बख्श दिया। जो कहा सो बचा के ही कहा। एक चैनल ने यह खबर नहीं छिपाई कि मथुरा कांड पर उनके गैर-जिम्मेदाराना ट्वीटों से पार्टी नाराज है और उनको झाड़ लगी है! वह कलाकार कैसा जो ‘शूटिंग में बिजी’ का तर्क देता है और शुरू में ही ‘मुझे बड़ा अफसोस है’ जैसा रस्मी वाक्य तक नहीं कह पाता?

इन दिनों कई कहानियां पलटी मारती दिखती हैं। दो दिन दादरी की कहानी को पलटने की कवायद दिखती रही, अब मथुरा कांड को पलटने की कवायद चल रही है! बने रहें कहानियों को लिखने-पलटने वाले! हर कहानी पलटती दिखेगी।

हाय बिहार के विद्यार्थी! एकदम अवसाद भरा सीन दिखा: एक चैनल ने पैसा देकर बारहवीं पास की सनद लेने की इच्छुक एक शादीशुदा युवती ने बेहद यथार्थ स्वर से सनद की कथा कही कि किस तरह वह बारहवीं के पास सर्टिफिकेट के लिए पांच हजार रुपए देने के लिए एक प्रिंसीपल से मिली, किस तरह उसने कहा कि ये तो कम हैं और वो बोली कि इतने ही पास में हैं, बाकी बाद में दे देंगे, तब वह बोला कि अब आठ हजार देने होंगे। कॉपी वे छाप कर देते थे, छाप कर देने का मतलब किसी से कॉपी लिखवा कर देना। कई साल से ऐसा ही चल रहा है। चैनल ने बताया कि टॉपर के लिए अस्सी हजार रुपए, फर्स्ट क्लास के लिए पचास हजार रुपए और सिर्फ पास के लिए पांच से आठ हजार का रेट तय है!

जब तक तरुण तेजपाल के मित्र-शत्रु हैं, तब तक उनकी खैर नहीं। एक तो यौन अपराध में आरोपित, दूसरे अपने बचाव में वीडियो वितरण के ‘अपराधी’, तीसरे एक मित्र पत्रकार का उनके पक्ष में लेख लिखना! यानी उनको बचाने की सीधी तिकड़म। कहानी को पलटने का षड्यंत्र! बताइए हमारा परम न्यायप्रिय एंकर नाराज न हो तो और कौन हो? लटयन्स वाले तो पलटने में लगे ही हुए हैं। एक घंटे की घनघोर पर्सनल किस्म की तूतू मैंमैं करने कराने के बाद उसने ऐलान किया: मैं कहानी को नहीं पलटने दूंगा!

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App