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बाखबर- नए बरस का तोहफा

मुसलिम समाज के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध यह विधेयक मुसलिम औरतों के सशक्तीकरण के लिए नए बरस का एक तोहफा है। विधेयक कानून जब न तब बने, चैनलों की बहसें बता रही हैं कि इस विधेयक के साथ एक नई मुसलिम औरत मैदान में आ चुकी है, जो किसी भी सूरत में तीन तलाक को सहने वाली नहीं है!
Author January 7, 2018 05:02 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

न्यूज एक्स सीबीएफसी के हवाले से खबर देता है कि पद्मावती का नाम ‘पद्मावत’ किया जाए। घूमर नाच को ‘उचित’ बनाया जाए। इतिहास में तोड़-मरोड़ सुधारी जाए। यह एक कहानी है और यह सती-प्रथा का समर्थन नहीं करती, ऐसी पूर्व-घोषणा दी जाए। इसके बाद पद्मावत दिखाई जा सकती है।
सीबीएफसी के इस सामयिक हस्तक्षेप के बाद चैनलों ने पद्मावती-विवाद से अपना पल्ला झाड़ लिया लगता है।
पिछले बरस की अंतिम बड़ी खबर मुंबई के दो पबों की आग में मारे गए लोगों की रही। कैमरे कभी आग दिखाते, कभी राख दिखाते। सीसीटीवी फुटेज में भागते लोगों को दिखाते। किसी खुशबू मेहता की खुशी और गमी दिखाते रहे। फिर वे ‘जिम्मेदार कौन’ का जवाब ढूंढ़ते: पबों के मालिक जिम्मेदार, कि निगम जिम्मेदार, कि सरकार जिम्मेदार, कि पुलिस जिम्मेदार, कि आनंदोत्सव मनाने आए लोग जिम्मेदार!
एबीपी ने एक लोमहर्षक वीडियो दिखाया, जिसमें पबों में जश्न मनाते लड़के, लड़कियों के चेहरों पर फोम फेंकते, फिर आग फेंकते और लड़कियों के सिर और चेहरों में आग लग जाती। कुछ देर पहले हंसने वाली लड़कियां चीखतीं और लड़के बुझाने दौड़ते।
आग से खेलोगे तो जलोगे ही!
जाते साल के अंतिम पलों ने डराया तो नए साल का स्वागत करने वालों ने इंडिया गेट पर इकठ्ठा होकर डराया! पहली जनवरी की शाम कोे इंडिया गेट के चारों ओर जाम लग गया। नया साल मनाने के लिए ढाई लाख लोग जमा हो गए।
एबीपी पुलिस के हवाले से बताता रहा है कि और दिनों के मुकाबले सात गुना भीड़ जमा है। कुछ ही देर में इंडिया गेट की भीड़ सभी चैनलों पर थी।
नए साल के पहले दिन ट्रंप जी ने पहले पाकिस्तान को मदद देने वालों को बेवकूफ कहा, फिर पाक की मदद की नई खेप रोक दी। चैनल बल्ले बल्ले करने लगे, मानो ट्रंप जी ने यह कदम भारत के कहने से उठाया हो। मुद्दा तो विदेश नीति का था, लेकिन एक चैनल ने उसे रिटायर्ड जनरल के हवाले कर दिया!
जाते बरस के अंतिम दिन प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में बिना ‘मेहरम’ मुसलमान महिलाओं के हज जाने की सुविधा दी। लेकिन चैनलों को रजनीकांत का राजनीति में प्रवेश ज्यादा बड़ी कहानी लगी।

इंडिया टुडे पर जब रजनीकांत को तमिल फिल्मों के सुपर स्टार की तरह पेश किया गया, तो हमेशा हाजिरजवाब भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिंहराव ने मोदी को भारतीय राजनीति का ‘रॉक स्टार’ कहा! सुब्रह्मण्यम स्वामी ने रजनीकांत के ‘हाइप’ की यह कह कर हवा निकाली कि उसके पास तमिलनाडु के लिए कोई विजन नहीं है! लेकिन कई अंग्रेजी चैनल रजनीकांत में तमिलनाडु का नया भविष्य देखते-दिखाते रहे। रजनी भाई भी जानते रहे कि कब कितना बोल कर और एक दो मिनट का वीडियो देकर चैनलों को व्यस्त कर देना है। उनके प्रशंसकों को अपना दर्शक बनाने के लिए दिल्ली के चैनल उनका वीडियो बजाते रहेंगे।
नए साल के पहले दिन ही एक दलित विमर्श के नए आक्रामक रूप के दर्शन हुए। पेशवाओं पर अंग्रेजों की विजय में दलितों की निर्णायक भूमिका की दो सौवीं जयंती के आयोजन में कुछ दलित विरोधी तत्त्वों ने विघ्न डाला और देखते-देखते बवाल मच गया!अगले रोज महाराष्ट्र बंद का एलान कर दिया गया। भीमा-कोरेगांव की आग सर्वत्र फैल गई!
‘एक्शन जहां चैनल वहां’ के तर्क से लगभग हर चैनल बंद की लाइव रिपोर्टिंग करने लगा। पुणे, मुंबई औरंगाबाद से जातिगत दंगों की खबरें दी जाने लगीं। एक चैनल ने इनको ‘जातिगत झगड़े’ (कास्ट क्लेशेज) कहा। दूसरे चैनल ने इसे ‘जाति युद्ध’ बताया। एक चैनल ने लिखा कि राहुल के समर्थक इसके पीछे हैं। दो चैनलों में इस सबके पीछे जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू वाले उमर खालिद का नाम बताया जाता रहा।
राहुल गांधी ने इसके पीछे संघ और भाजपा को पाया, तो उनके आलोचकों ने राहुल को राष्ट्र-विरोधी बताया। जातिगत हिंसा एक चैनल पर ‘दलित बरक्स हिंदू युद्ध’ तक बन गया।
बहसों में दो सौ साल पहले का युद्ध दुहरने लगा, जिसमें अंग्रेजों की सेना में शामिल दलित सैनिकों ने पेशवाओं को हराया था। आंबेडकर ने इस दिन को दलित विजय दिवस की तरह मनाना शुरू किया था। तब से हर साल मनाया जाता था और कुछ नहीं होता था, तब इस बार क्यों गड़बड़ हुई? सरकार को मालूम था तब वह क्यों चुप रही? ऐसे सवाल बार-बार उठाए जाते रहे। एनडीटीवी की एक बहस में एक दलित युवा राहुल ने दलित रणनीति साफ की कि ‘नेशन’ के ‘नैरेटिव’ में दलितों ने अपने दावे से ‘डिसरप्शन’ कर दिया है! यह ‘नया दलित विद्रोह’ (न्यू दलित अपराइजिंग) है! वृहस्पतिवार की खबरें बताती रहीं कि यह जाति विद्वेष गुजरात तक में फैल गया है!
तीन तलाक विधेयक राज्यसभा की बहसों में फंसा रहा, लेकिन इंडिया टुडे की एक बहस में एक मुसलिम औरत ने एक मौलाना से साफ कहा कि ‘जो हमें हक देगा, हम उसके साथ रहेंगी’ तो मौलाना साहब का मुंह निकल आया!
मुसलिम समाज के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध यह विधेयक मुसलिम औरतों के सशक्तीकरण के लिए नए बरस का एक तोहफा है। विधेयक कानून जब न तब बने, चैनलों की बहसें बता रही हैं कि इस विधेयक के साथ एक नई मुसलिम औरत मैदान में आ चुकी है, जो किसी भी सूरत में तीन तलाक को सहने वाली नहीं है!

 

 

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