ताज़ा खबर
 

बाखबर- झूठ की उम्र

अदालत ने न्याय किया है! बहुत बड़ी राहत, वह भी गुजरात के एकदम बाद! सारे के सारे छूट गए! यह बड़ी नाइंसाफी है!!

Author December 24, 2017 05:16 am
2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सभी आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। (फोटो: भाषा)

चोट तो लगी है और गुजरात में लगी है। भाषा बिगड़ी है, तबियत भी बिगड़ी है। प्रेस वार्ता में भी सर जी का गुस्सा देखते ही बनता था।  उनका गुस्सा! खुदा खैर करे!  गुजरात की चोटें संसद में बज रही हैं। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने चुनाव अभियान में पूर्व-प्रधानमंत्री, पूर्व कूटनीतिज्ञों और पूर्व बड़े सेनाधिकारी का जो अपमान किया है, उसके लिए वे सदन में आकर माफी मांगें। उधर भाजपा के सदस्य कहते हैं कि प्रधानमंत्री माफी नहीं मांगेंगे। वे अपने अपमानों की सूची लिए बैठे हैं कि पहले कांग्रेस ‘नीच’ के लिए ‘मौत का सौदागर’ के लिए, इसके लिए उसके लिए मांगे!  सभी ‘अपमान-विशेषज्ञ’ हैं। सब दूसरे से माफी चाहते हैं और माफी है कि कोई मांगता नहीं! मांगी जा चुकी न जाने कितनी माफियां चैनलों में अब तक अटकी पड़ी हैं। यह भी अटकी रह जानी है।
कि बुधवार को खबर आती है कि सुबह अदालत ने 2-जी के तमाम आरोपियों को मुक्त कर दिया है। एक पंक्ति के फैसले के बताए जाते ही आफत चैनलों में आ बिराजी है।

डीएमके की कनीमोड़ी और ए. राजा खुश नजर आते हैं। लड््डू बंट रहे हैं। बाजे बज रहे हैं। लोग नाच रहे हैं। कह रहे हैं कि अदालत ने न्याय किया है! बहुत बड़ी राहत, वह भी गुजरात के एकदम बाद! सारे के सारे छूट गए! यह बड़ी नाइंसाफी है!! अदालत के फैसले ने कांग्रेस के दिन फेर दिए लगते हैं!  खबरिया चैनलों ने ऐसी चोट लगा दी है कि जिसकी पूर्व-बहादुरी चुटियल दिखती है, उसे चुटियल रूप में देखने की उत्सुकता बढ़ जाती है कि देखें तो कि वे दहाड़ने वाले शेर अब किस हाल में हैं? ऐसी टुच्ची त्रासदियां कामदी का मजा देती हंै! 2-जी घोटाले का आरोप लगाने वालों को हम चैनल चैनल तलाशते हैं और उन रणबांकुरे उद्घोषकों को तलाशते हैं, जिन्होंने उस वक्त के नेताओं से भी आगे बढ़ कर आरोप लगाए थे। वह चैनल भी अपनी लाइन बदलता नजर आता है, जिस पर दहाड़-दहाड़ कर कभी उद्घोषक भाइयों ने अदालत से पहले मुकदमा चला कर फैसला सुनाया था।

असली अदालत ने भैया जी वाली अदालत की पोल खोल दी। अदालत ने कहा कि सारा मामला ‘आम जनमत’ से बनाया गया। आरोपपत्र ‘सहमेल’ से तैयार किए गए थे। आरोपों को पुष्ट करने वाले अकाट्य प्रमाण नहीं दिए गए! अदालत ‘जनमत’ से काम नहीं किया करती। उसको अकाट्य प्रमाण चाहिए। बरसों इंतजार किया, लेकिन किसी ने आकर एक अकाट्य प्रमाण तक नहीं दिया! फैसला जादू का सा असर करता है चैनलों में ‘संप्रग की लाइन जीती’ की खबर आने लगती है। कांग्रेसियों की गर्दन अकड़ जाती है। कनीमोड़ी कांगे्रस के नेता आनंद शर्मा और गुलाम नबी आजाद से खुशी-खुशी मिलती हैं।
कई साल तक जो एक ‘घोटाला’ संगीन अपराध की तरह यूपीए की गरदन पर लटका रहा, जिसके कारण यूपीए हारा, दिल्ली में आप जीती और देश में एनडीए जीता, एक ही पल में वह घोटाला ‘ज्ञात घोटाला’ कहलाने लगा!  माफी मांगने की एक मांग संसद में पहले से ही अटकी पड़ी है। संसद ठप है। कांग्रेस की मांग है कि वर्तमान प्रधानमंत्री पूर्व प्रधानमंत्री के प्रति गुजरात प्रचार अभियान में अवमानना पूर्ण कथन के लिए सदन में आकर माफी मांगें। संसद में हल्ला है, राज्यसभा में हल्ला है, एक माफी का सवाल है, कब से कहे जा रहे हैं कि माफी मांगो, लेकिन कोई मांगे तब न!  आनंद शर्मा कहते हैं कि चलो जो कहा उसे ही स्पष्ट कर दें कि क्या कहा, तो बात खत्म, लेकिन अपने प्रधानमंत्री यह भी क्यों कहें कि क्या कहा? प्रधानमंत्री भी कहीं माफी मांगा करते हैं?

एक माफी का इंतजार संसद में पहले से है! तिस पर 2-जी पर एक सीबीआई की अदालत के फैसले के बाद दूसरी माफी की मांग! कितनी माफियां चाहिए कांग्रेस को? माफियां न हुई टाफियां हो गर्इं! सुरजेवाला की प्रेस वार्ता। अपने क्रोध पर काबू रखते हुए वे चैनलों में आकर पूछते हैं: झूठ का व्यापार करने वाले मांगें राष्ट्र से देश से जनता से माफी! जो मीडिया इस हल्ले का शिकार हुआ सीखे सबक! सबसे बड़ा घोटाला तो झूठ का घोटाला है! बातें कानूनी हैं, लेकिन अपने एंकर तो जनूनी हैं। कई तो मुद्दा ही लेकर आते हैं।  फैसले के अपने-अपने पाठ-कुपाठ-सुपाठ हो रहे हैं। हर चैनल का अपना पाठ-कुपाठ है। कांग्रेस को लगता है कि उसका राहु-काल खत्म हो रहा लगता है।  गुजरात का चुनाव खत्म होते ही एक बार फिर से उन्मादी तत्त्वों को काम मिल गया लगता है।
भोपाल में सलमान की ‘टाइगर जिंदा है’ के विरोध में कुछ सिनेमाघर तोड़ दिए गए हैं। एक बंगाली फिल्म ‘रंग बिरंगी’ के खिलाफ कोलकाता में हिंदू जागरण मंच ताल ठोक रहा है और बंगलुरु में सनी लियोनी ‘शो दे कि न दे’ पर पंगा जारी है। विरोध हैं कि ‘प्रोमो’ हैं कि दोनों हैं? साफ नहीं होता। सिर्फ इतना साफ हुआ है कि झूठ की उम्र नहीं होती!

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App