ताज़ा खबर
 

वक्त की नजर- वादे, इरादे और हकीकत

जहां जाती हूं, मुझे मिलते हैं ऐसे नौजवान जो रोजगार चाहते हैं और अपने निजी जीवन में तरक्की देखना चाहते हैं। अच्छे दिन उनके लिए तब आएंगे जब उनके पास रहने को अच्छा घर होगा, पहनने के लिए अच्छे कपड़े होंगे, आने-जाने के लिए गाड़ी होगी और अपने बच्चों का भविष्य रौशन दिखने लगेगा।

Author February 11, 2018 5:06 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो, PTI Photo)

प्रधानमंत्री ने संसद में पिछले हफ्ते दो बहुत अच्छे भाषण दिए। कोशिश की उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने की, लेकिन आजकल चूंकि राजनीतिक पत्रकारिता टीवी पंडित तय करते हैं, सो जनता तक पहुंचते-पहुंचते मुद्दे बदल गए। कुछ टीवी पंडितों ने अहमियत दी रेणुका चौधरी की हंसी और उसके बाद उनके तथाकथित अपमान को। कई ऐसे थे, जिनको लगा कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात प्रधानमंत्री के भाषणों में यही थी कि उन्होंने कांग्रेस के मृत नेताओं और उनकी गलतियों पर जरूरत से ज्यादा ध्यान दिया। सच यह भी है कि इतिहास के पन्ने पलट कर प्रधानमंत्री ने साबित करने की कोशिश की कि सरदार पटेल अगर देश के पहले प्रधानमंत्री बने होते पंडितजी के बदले, तो पूरा कश्मीर हमारा होता।

पंडित नेहरू से यह भी खिताब छीन लेने की कोशिश की मोदी ने कि उनकी बदौलत भारत में लोकतंत्र जीवित हुआ। भारत की प्राचीन परंपरा है लोकतंत्र, प्रधानमंत्री ने कहा राज्यसभा में, लेकिन शायद भूल गए कि पंडित नेहरू अगर चाहते तो तानाशाह बन सकते थे, क्योंकि भारत के आसपास तानाशाहों का शासन था- पाकिस्तान से लेकर चीन तक और वह था भी तानाशाहों का जमाना। खैर, इन सारी बातों के बीच मोदी सरकार की उपलब्धियां कहीं खो-सी गर्इं और कांग्रेस प्रवक्ता खुशी से पागल दिखे टीवी की चर्चाओं में यह कहते हुए कि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर इतना ध्यान इसलिए दिया क्योंकि अच्छे दिन लाने का उनका वादा नाकाम रहा है।  जिन अच्छे दिनों की उम्मीद पर भारत के मतदाताओं ने मोदी को पूर्ण बहुमत दिया था 2014 में, वे शायद पूरी हुई नहीं हैं, लेकिन यह कहना गलत होगा कि मोदी सरकार ने देश के लिए कुछ नहीं किया है। पहले तो केंद्र सरकार के स्तर पर भ्रष्टाचार काफी हद तक कम हुआ है, अभी तक घोटाले कोई सामने नहीं आए हैं, बावजूद इसके कि राहुल गांधी कोशिश कर रहे हैं राफेल लड़ाकू जहाजों के सौदे में घोटाला ढूंढ़ निकालने की। स्वच्छ भारत अभियान का बहुत असर दिखने लगा है देश भर में। सड़कों के निर्माण में भी तेजी आई है और यह भी कहना गलत न होगा कि भारत की इज्जत दुनिया में बढ़ी है। उपलब्धियां और भी हैं मोदी सरकार की, लेकिन अगर इनकी चर्चा उतनी नहीं हो रही है जितनी होनी चाहिए, तो कारण यह है कि गोरक्षा के नाम पर जो नफरत फैली है पिछले दिनों, उसका साया मोदी सरकार की उपलब्धियों पर छा गया है।

गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों की सरेआम हत्याएं हुई हैं और माहौल ऐसा बन गया है कि पिछले हफ्ते भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद ने खुल कर टीवी पर कहा कि मुसलमानों के लिए भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उनको बांग्लादेश और पाकिस्तान भेज देना चाहिए। कटियार साहब ने ताजमहल को हिंदुओं का प्राचीन मंदिर होने का भी दावा किया। ऐसी बातें अगर प्रधानमंत्री को पसंद नहीं हैं, तो कटियार के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई है अभी तक? कटियार के अलावा कई अन्य सांसद हैं भारतीय जनता पार्टी के, जो इस तरह की बातें करते आए हैं पिछले चार वर्षों में। बातों के अलावा भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्रियों ने लव जिहाद जैसे मुद्दों को इतनी अहमियत दी है कि उत्तर प्रदेश में हिंदुओं की सेनाएं बन गई हैं, जो उन शादियों को रोकने में लग गई हैं, जहां हिंदू महिला किसी मुसलिम मर्द से ब्याह कर रही हो। ऊपर से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में ऐसे कई प्रयास हुए हैं राज्य सरकारों द्वारा, जिनसे मीट-मांस का कारोबार बंद हो गया है। अवैध बूचड़खाने बंद करवाने के नाम पर योगी आदित्यनाथ ने उनकी भी दुकानें बंद करवाई हैं, जिनके पास लाइसेंस थे। इन चीजों से नौकरियां सिर्फ मुसलमानों की नहीं गई हैं, दलितों की भी गई हैं।

नफरत और हिंसा का माहौल आम लोगों को बिलकुल पसंद नहीं है, सो इसका असर दिखने लगा है गुजरात और राजस्थान से हाल में आए चुनाव नतीजों में। क्या यही वजह है कि मोदी इन दिनों घबराए से लगने लगे हैं? क्या उनको अहसास होने लगा है कि पूर्ण बहुमत उनको हिंदुत्व के नाम पर नहीं, परिवर्तन और विकास के नाम पर मिला था? क्या अहसास होने लगा है कि सबका साथ, सबका विकास वाला उनका वादा झूठा साबित हो रहा है दलित और मुसलिम मतदातों की नजरों में? इन चीजों का अहसास प्रधानमंत्री को अभी तक नहीं हुआ है तो हो जाना चाहिए, अगर 2019 में दोबारा जीतना चाहते हैं। इसलिए कि माहौल इतना बदल गया है कि राहुल गांधी जैसे शहजादे को आज गंभीरता से लिया जा रहा है। कुछ महीने पहले अगर कोई कहता कि राहुल गांधी बन सकते हैं भारत के भावी प्रधानमंत्री तो लोग हंसा करते थे। अब ऐसा नहीं है। अब उनकी न सिर्फ बातों को गंभीरता से लिया जा रहा है, उनके नाम पर वोट भी हासिल करने लग गई है कांग्रेस। क्या यही कारण था प्रधानमंत्री का अपने भाषणों में कांग्रेस की पुरानी गलतियां गिनाने का? था भी तो अच्छा होता अगर वह अतीत के बदले भविष्य की बातें करते इसलिए कि नौजवान भारतवासियों को पुरानी बातों से कम मतलब है और अपने निजी भविष्य से ज्यादा। जहां जाती हूं मुझे मिलते हैं ऐसे नौजवान जो रोजगार चाहते हैं और अपने निजी जीवन में तरक्की देखना चाहते हैं। अच्छे दिन उनके लिए तब आएंगे जब उनके पास रहने को अच्छा घर होगा, पहनने के लिए अच्छे कपड़े होंगे, आने-जाने के लिए गाड़ी होगी और अपने बच्चों का भविष्य रौशन दिखने लगेगा। मोदी को पूर्ण बहुमत मिला था 2014 में, क्योंकि ये चीजें कांग्रेसी प्रधानमंत्री आम लोगों को नहीं दे पाए थे।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App