ताज़ा खबर
 

बाखबर: शोक भी एक सेल्फी है

इस रिकार्ड तोड़ शो से ज्ञात हुआ, जब बॉलीवुड शोक में डूबता है, तो सफेद कपड़े पहन कर डूबता है। हीरो-हीरोइनों को कारों से बार-बार निकलते हुए दिखाने का सुख सभी कैमरे लूटते हैं। शोक के ऐसे दृश्यों में नायिकाएं अपने केशों को ‘ठीक’ करने में अधिक दिलचस्पी लेती हैं।

Author March 4, 2018 04:52 am
दिवंगत बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रीदेवी।

पहला दिन : दुबई में मौत। दुबई में मौत। दुबई में मौत। होटल में मौत। पांच सितारा होटल में मौत। पांच सितारा होटल में मौत। दूसरा दिन : दिल के दौरे से मौत। दिल के दौरे से मौत। चैनलों को पड़ता रहा दिल का दौरा। बताते रहे दिल का दौरा, दिल का दौरा! बिना किसी रिपोर्ट के बताते रहे ‘दिल के दौरे से मौत!’ उनतीस बार कास्मेटिक सर्जरी कराई थी। जवान दिखने के लिए, झुर्रियां मिटाने के लिए सर्जरी कराती थी। एक एक्सपर्ट ने ज्ञान बघारा : मैडोना जो ड्राइओक्सिन ड्रग लेती है, वही श्रीदेवी लेती थी और यह दवा स्ट्रोक देती है, यानी उसी से स्ट्रोक हुआ होगा।… तीसरा दिन : दुबई के डॉक्टर ने दी मेडिकल रपट : एक्सीडेंटल ड्राउनिंग से डेथ। बाथ टब में डूबने से डेथ। बाथ टब में डूबने से हुई मौत। डूबने से हुई मौत! शरीर में मिले ‘अलकोहल’ के अंश! एक एंकर सीधे बाथ टब में छलांग लगा कर बताने लगा कि बाथ टब में इस तरह डूब कर मरा जा सकता है। सबसे बड़ा अंग्रेजी मुकदमेबाज बोला : वह पांच फुट सात इंच लंबी और बाथ टब जरा-सा, उसे डूबने के लिए चाहिए था आठ फुट गहरा बाथ टब या स्विमिंग पूल। ‘बाथ टब’ कोई स्विमिंग पूल नहीं था। उसमें वह कैसे डूब सकती थी? उसे डूबने के लिए कम से कम आठ फुट गहरा बाथ टब चाहिए। बताइए उसका शरीर ‘ब्लोट’ कैसे कर सकता था? ‘ब्लोटिंग’ यानी फूलने के लिए कम से कम अड़तालीस घंटे चाहिए शरीर को!

कुछ चैनल सीधे बाथ टब में घुस कर किसी की डूबी हुई बॉडी तक दिखाने लगे, ताकि दर्शक समझ लें कि बाथ टब में किस तरह डूबा जा सकता है। एक एंकर रिपोर्ट देने वाले डॉक्टर की अंग्रेजी पर ही हंसता रहा कि बताइए ‘ड्राउनिंग’ की स्पेलिंग क्या है? यह कैसा डॉक्टर है कि अंग्रेजी तक सही नहीं लिख सकता! एंकर क्लोज अप करके कागज दिखाता, जिस पर ‘ड्राउनिंग’ के ‘ओ’ की जगह ‘ए’ लिखा था! एक मर्डर मिस्ट्री एक्सपर्ट एंकर बोलता रहा : हम तो सवाल पूछेंगे। हमसे क्यों कहा जा रहा है कि रिपोर्ट पर सवाल न करो? हम तो करेंगे सवाल। ये रहे हमारे पांच सवाल। वह तो गनमीत थी कि उसे जवाब देने कोई नहीं आया, वरना वह उसी पर केस कर देता। हर चैनल पर कुछ देर बोनी कपूर खलनायक बना। फिर कास्मेटिक सर्जरी बनी। फिर बाथ टब बना, फिर नशा बना। एंकर ‘क्राइम एक्सपर्ट’ बन गए। वे श्रीदेवी की मर्डर मिस्ट्री को साजिशी बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ बेचते रहे। इस बीच एक लेखिका बोल उठी : उस जैसी तंदुरुस्त औरत डूब कर नहीं मर सकती! एक से एक तुक्केबाज जुटे थे। सब दूर के तुक्के मार रहे थे और खबर बना रहे थे। हमारे चैनल तुक्का ही तो बेचते हैं। एक पांच सितारा मौत ने उनकी मौज कर दी। सनसनी-दर-सनसनी बेची जाती रही: एक तो दुबई। दूसरे दाउद इब्राहीम का इलाका। तीसरे माफियागिरी। चौथे साजिश ही साजिश।… श्रीदेवी को जितनी तारीफ जीते जी न मिली, मरने पर नसीब हुई। एक मामूली अभिनेत्री अचानक सुपर स्टार बन गई। फिर अखिल भारतीय स्टार बन गई और एक बार बनने के बाद सुपर टू सुपर ही बनती रही! कहानी कभी दुबई से लाइव आती, कभी मुंबई से लाइव आती, कभी होटल से लाइव निकलती, कभी अनिल कपूर के घर के पास से विचरती! पांच दिन तक चैनलों के पास मौत की कहानी को छोड़ कुछ न था।

शोक मनाना भी एक कला है : एक ओर चैनल श्रीदेवी के गाने बजाते, दूसरी और मर्डर मिस्ट्री की तहें खोलते। एक हिस्से में श्रीदेवी नाचती-गाती-बलखाती दिखतीं : कभी वे ‘लम्हे’ होतीं। कभी ‘सदमा’ होतीं। कभी ‘हवा हवाई’ होतीं और कभी ‘इंगलिश-विंगलिश’ होतीं। दूसरे हिस्से में एंकर इब्ने सफी बनते। टाई सूट पहने एंकर अपने को गमगीन होते दिखाते। गम के सीन में ‘सिंक करने’ यानी डूबने का यही तो मौका था। लाइव कवरेज की बहती गंगा में हर बंदा खुद को खबर बनाने कूद पड़ा। कमल हासन कूदे तो रजनीकांत कैसे पीछे रहते? एक से एक बड़े बंदे ने शोक जताया! शोक में भी ऐसा कपंटीशन रहा। एक हीरोइन की मौत की ऐसी मेलोड्रामेटिक माउंटिंग रही कि बिहार में एक भाजपा नेता की कार द्वारा कुचल कर मार दिए गए नौ बच्चों की खबर सिर्फ एक लाइन में निपटी! ग्लैमर की मौत बिकती है, कमजोर की मौत बोर करती है। चौथे-पांचवें दिन गाना बजता रहा : कब आएगी बॉडी? कब आएगी बॉडी? कभी आती दिखती, कभी लटक जाती दिखती। अंतत: एनओसी नसीब हुआ और बॉडी के मुंबई आते ही मुंबई ब्रांड लाइव शो शुरू हुआ। इस रिकार्ड तोड़ शो से ज्ञात हुआ, जब बॉलीवुड शोक में डूबता है, तो सफेद कपड़े पहन कर डूबता है। हीरो-हीरोइनों को कारों से बार-बार निकलते हुए दिखाने का सुख सभी कैमरे लूटते हैं। शोक के ऐसे दृश्यों में नायिकाएं अपने केशों को ‘ठीक’ करने में अधिक दिलचस्पी लेती हैं। और शोक में हंसते हुए आम लोग अपने स्मार्ट फोनों से हीरो-हीरोइनों के फोटो और सेल्फी लेने में लगते हैं। दर्शक खुद को खबर बनाने के लिए आते हैं। सब दूसरों को देखते हुए अपने को दिखाते हैं। शोक एक सेल्फी की तरह होता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App