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बाखबर: इस दुनिया में सब चोर-चोर

लिंगायत की राजनीति को ‘एनडीटीवी’ ने खोला कि एक बार भाजपा के लिंगायत नेता येदियुरप्पा ने चाहा था कि लिंगायतों का अलग धर्म मानें, तब कांग्रेस ने विरोध किया। अब कांग्रेस वही कर रही है और भाजपा विरोध कर रही है। इसे कहते हैं राजनीतिक अवसरवाद!

Author March 25, 2018 5:43 AM
प्रतीकात्म तस्वीर।

अपनी राजनीति में चीजें एकदम पारदर्शी होती हैं। जब तक दोस्ती रहती है तब तक ‘ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे’ वाला ‘शोले’ का गाना बजता है, जब टूटती है तो ये दर्दभरा नगमा बजता है- ‘दोस्त दोस्त ना रहा, स्पेशल पैकेज ना मिला। एनडीए हमें तिरा एतबार ना रहा!’ दर्द ने बढ़ कर अविश्वास प्रस्ताव का रूप धारण कर लिया। संसद में हंगामा हुआ और अविश्वास प्रस्ताव लटक गया। बैठक स्थगित हो गई। संसद में इतनी मेहनत हुई कि दो दिन में कुल छह मिनट चली! इतनी मेहनत करने वालों की अगर तनख्वाह भी न बढ़े तो कैसे काम चले!
मोदी जी ने दिया था नारा ‘कांग्रेस मुक्त भारत’। अब राज ठाकरे जी नारा दे रहे हैं- ‘मोदी मुक्त भारत’! कुछ भी कहो, नारों के रदीफ काफिया एकदम दुरुस्त है। तीसरा नारा दिया है डीएमके स्टालिन ने कि अब तक था सिर्फ ‘तमिलनाडु’ था, अब कहिए ‘द्रविड़नाडु’! तमिल, मलयालम, कन्नड़, तेलुगू यानी ‘द्रविड़नाडु’! पंजाब के सिमरनजीत ने फरमाया- ‘हमें चाहिए खालिस्तान… आजाद सिख लैंड!’

कुछ एंकरों की दिहाड़ी तब तक नहीं बनती, जब तक वे राहुल भैया की धुलाई न कर लें। कांग्रेस के महाधिवेशन में एक दिन राहुल चार मिनट बोले तो कई एंकर टूट पड़े- ‘सिर्फ चार मिनट! क्या बोलने को कुछ नहीं था?’ अगले दिन जब एक घंटे बोले तो चीखने लगे- ‘इतना लंबी क्यों हांकी?’ ‘मोदी टू मोदी टू मोदी’ वाले ‘यमक’ अलंकार का मजा लेते हुए राहुल ने कांग्रेसियों से जम के ताली ली। युवाओं और पार्टी के बीच सीनियरों को ‘दीवार’ बताया, लेकिन ढहाने को न कहा। लंबी-चौड़ी खाली स्टेज को दिखा कर कहा- ‘आप सब युवाओं के लिए ही इसे खाली छोड़ा है। कांग्रेस का कायाकल्प करने के आइडिया ने खूब ताली पड़वाई। युवाओं को कमान देने के लिए शाबाशी ली। नारा दिया- वक्त है बदलाव का! चेंज इज नाउ!’ भाजपा की मंत्री निर्मला सीतारामण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके राहुल के एक-एक आरोप का खंडन किया। उनका वाक्य कि ‘यह हारे हुए की भड़ास है’ हर चैनल पर शीर्षक बना। राहुल ने कह दिया कि ‘लिंगायत’ हिंदू नहीं हैं। ‘रिपब्लिक’ का एंकर नाराज होकर पूछता रहा- ‘राहुल ने ये कैसे बक दिया कि लिंगायत हिंदू नहीं होते?’ भाजपा का प्रवक्ता बोला कि कांग्रेस हिंदुओं को विभाजित करने की राजनीति कर रही है। ‘न्यूज एक्स’ पर भाजपा के तिरुपति बोले कि कांग्रेस अब तक देश को विभाजित करती आई है, अब कर्नाटक को विभाजित कर रही है। एक लिंगायतवादी बोला- ‘हम नौ सौ बरस से अलग होने की बात कह रहे हैं। इससे देश विभाजित नहीं होता।’ उधर टीवी के फ्रेम में लिंगायत नाच-गा रहे थे, उनकी टोपियों पर नागरी में लिखा था- ‘स्वतंत्र धर्म’! कन्नड़ के बीच हिंदी! भई वाह!

लिंगायत की राजनीति को ‘एनडीटीवी’ ने ही खोला कि एक बार भाजपा के लिंगायत नेता येदियुरप्पा ने चाहा था कि लिंगायतों का अलग धर्म मानें, तब कांग्रेस ने विरोध किया। अब कांग्रेस वही कर रही है और भाजपा विरोध कर रही है। इसे कहते हैं राजनीतिक अवसरवाद! इसके बाद तो फेसबुक का डाटा ऐसा बिका कि सब चैनल ‘डाटा चोर डाटा चोर’ चिल्लाने लगे। कहानी के इतने संस्करण हुए कि सिरे जोड़ने मुश्किल हो गए। डाटा का खेल करने वालों में भाजपा, कांग्रेस और जेडीयू के नाम आते-जाते रहे। लेकिन दो अंग्रेजी चैनलों पर सिर्फ राहुल से सवाल किए जाते रहे कि वे बताएं कि क्या उन्होंने किसी डाटा खिलाड़ी की सेवाएं नहीं लीं? क्या कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए मतदाता के डाटा में गड़बड़ करती रही है? ‘टाइम्स नाउ’ के एंकर ने राहुल-नियुक्त प्रवीण चक्रवर्ती का नाम तक दिया। कांग्रेस के सुरजेवाला ने आकर सारे आरोपों का खंडन किया। कई चैनल सिर्फ कांग्रेस को और राहुल को रगड़ते रहे, मानो वही इस डाटा-डाकाजनी के लिए जिम्मेदार हों।

इस एक ओर झुकी कहानी को किसी हद तक संतुलित किया ‘एनडीटीवी’ के श्रीनिवासन जैन ने कि कैंब्रिज एनालिटिका की इंडिया शाखा के एक ‘कोफाउंडर’ हैं अवनीश राय बातचीत में राय ने बताया कि एलेक्जेंडर निक्स यहां डाटा बेचने की बात चला रहे थे कि देखने में गुजराती लगने वाली लेस्ली नामक एक एनआरआई स्त्री डाटा खरीदने आई। हमने पूछा कि किसके लिए खरीद रही हो तो बोेली कि कांग्रेस को हराने के लिए खरीद रही है। इसका संदर्भ दो हजार चौदह का चुनाव बताया गया। हमने दो हजार बारह के यूपी के दो सौ सीटों का बूथवाइज डाटा मुहैया कराया था। इसके लिए आपसे किसने संपर्क किया था तो राय का जवाब रहा कि संघ के संजय जोशी ने संपर्क किया था। ‘इस दुनिया में सब चोर चोर
कोई डाटा चोर, कोई बाटा चोर..!’

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