ताज़ा खबर
 

बाखबर: कनक कनक ते सौ गुनी

अब न मरीजों की खबरें आती हैं, न लाशों की। लगता है कि सभी कोरोना के आदी हो चले हैं। लेकिन ऐसे में एक दिन 'सदी के महानायक' को कोराना क्या हुआ कि खबर चैनलों को भी कोरोना होता लगा। महानायक ने ही ट्वीट कर महाखबर दी कि सदी के महानायक को सदी का कोरोना हुआ है, साथ ही महानायक के सुपुत्र, पुत्रवधू और पोती को भी हुआ है।

भारतीय न्यूज टीवी चैनलों पर पूरे दिन दिखाए जाने वाले बहस में सार्थकता कम हो रही है, व्यर्थ की बातें ज्यादा।

शुरू में लगता रहा कि यूपी के ‘सबसे बड़े डॉन’ विकास दुबे के एनकाउंटर की कहानी ‘मानवाधिकार’ का मुद्दा बनेगी। एक अंग्रेजी एंकर ने ‘अपराधी के भी अधिकार’ का जिक्र भी किया, लेकिन बलिहारी उन मूंछों की कि कुछ देर बाद उस एंकर की भी पूंछ निकल आई!
हाय! हर पंद्रह मिनट के बाद बजने वाले विकासमूलक विज्ञापन अगर मिलने बंद हो गए तो कैसे करोगे ‘मानवाधिकार’ का विलाप!
सो, कुख्यात डॉन विकास दुबे के एनकाउंटर की कहानी जिस उत्तेजक अंदाज से ‘ब्रेक’ की गई थी उसी अंदाज से एक दिन सुला दी गई। उसने इतनों को मारा तो हमने उसको मारा! बात खत्म! न कोर्ट न कचहरी न तारीख पर तारीख! एकदम नकद न्याय! यूपी जिंदाबाद!

अपने चैनलों ने मान लिया है कि अब कोरोना कोई डराने वाली खबर नहीं है। वह सिर्फ एक आंकड़ा भर है। सो, देखते रहो आंकड़ा! अपना रिकार्ड दुनिया से बेहतर।
लेकिन लड़ाई जारी है: कहीं वैक्सीन बन रही है। कहीं दवा बन रही है, कहीं ‘कर्व को फ्लैट’ करने के चक्कर में कई विशेषज्ञ ही ‘फ्लैट’ हो चले हैं। एक चैनल फिर भी नए-नए विशेषज्ञ बिठा कर उन्हीं चेतावनियों को दुहरवाता रहता है, जो पिछले साढ़े तीन महीने में नित्य हजारों बार दुहरी हैं कि छह फुट की दूरी है जरूरी, बाहर मास्क लगाएं और हाथ धोते रहें…

एक चैनल दो दिन तक दुनिया में बनाई जाती वैक्सीन के बारे में बताता रहा कि कौन-सी किस ‘स्टेज’ पर है और इस साल के अंत और अगले साल के शुरू तक तैयार हो सकती है, लेकिन एक बार भी उसने भारत में बनती वैक्सीन के प्रयत्नों के बारे में नहीं बताया!
कुछ चैनलों ने कोरोना की ‘रेमिडसवीर’ जैसी दवा के बाजार में ‘ब्लैक’ में बिकने की खबर पर यह चिंता तो प्रकट की कि जिस दवा का दाम चौवन सौ रुपए है, वही अब ब्लैक मार्केट में पचास हजार से सत्तर हजार में मिल रही है, लेकिन कोई भी चैनल किसी से यह पूछने नहीं गया कि अगर ऐसा है तो उसकी बाजार में उपलब्धता के बारे में सरकार क्या कर रही है?

इस मामले में चैनलों की सारी खोजी पत्रकारिता किसी दवा की दुकान पर खत्म हो जाती रही। किसी ‘स्टिंगबाज’ ने किसी ‘ब्लैकिए’ की ‘स्टिंग’ नहीं की! क्यों?
चैनलों को देख-देख लगता है कि कोरोना का एक पूरा उद्योग ही खड़ा हो गया है। पचास तरह के सेनेटाइजर, सौ तरह के साबुन और डिजाइनर मास्कों के विज्ञापन आते ही रहते हैं। वे चैनलों की कमाई के साधन हैं। कुछ विज्ञापन हमारा बीमा कराने के लिए ही पीछे पड़े रहते हैं और कुछ हैं जोे ह्यकोरोना वारियरोंह्ण को सलाम करते रहते हैं।

अब न मरीजों की खबरें आती हैं, न लाशों की। लगता है कि सभी कोरोना के आदी हो चले हैं। लेकिन ऐसे में एक दिन ‘सदी के महानायक’ को कोराना क्या हुआ कि खबर चैनलों को भी कोरोना होता लगा। महानायक ने ही ट्वीट कर महाखबर दी कि सदी के महानायक को सदी का कोरोना हुआ है, साथ ही महानायक के सुपुत्र, पुत्रवधू और पोती को भी हुआ है।

महानायक के कोरोना पॉजिटिव होते ही कोरोना एक ह्यमहा शोह्ण में बदल गया। हर चैनल ह्यजलसाह्ण पर पहुंच ह्यजलसाह्ण दिखाने लगा। दर्जनों कर्मचारी जलसा समेत महानायक के अन्य मकानों को सेनेटाइज करने के लिए लाइन लगाए थे। देर तक चैनल इस खबर को कुछ इस तरह देते रहे जैसे कोई राष्ट्रीय आपदा ही आ गई हो। खबर के बाद चैनल उसी तरह के दृश्यों को दिखाने लगे, जिनके हम आदी हो चुके हैं : ये देखो, ये कुछ लोग उनके जल्दी ठीक होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। ये यज्ञ कर रहे हैं! लेकिन इस बार ऐसा नाटक कुछ कम मात्रा में ही दिखा, क्योंकि महानायक को हुआ कोरोना महामात्रा में न होकर ह्यमाइल्डह्ण मात्रा में ही था और वे खुद ही ट्वीट कर बताते रहे कि वे बेहतर हैं, प्रार्थना करने वालों का आभार!

जो चैनल आए दिन वीवीआइपी कल्चर को कोसते नहीं अघाते, वे ऐसे अवसरों पर स्वयं ही चमचत्व में लीन होते क्यों दिखने लगते हैं?
ऐसे कोरोना काल में एक दिन राजस्थान की सरकार हिलती दिखी! हिलाने वाले रहे उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट!
शुरू में लगभग सभी खबर एंकरों ने सचिन पायलट में माधवराव सिंधिया के दर्शन किए और गहलोत की सरकार ‘अब गिरी कि तब गिरी’ का जाप करने लगे, लेकिन गहलोत ने जैसे ही सचिन पायलट को एक ‘सबाल्टर्न ब्रांड’ फटकार लगाई कि अच्छी अंग्रेजी बोलने से, ट्वीट करने से या खूबसूरत होने से कुछ नहीं होता…(इनकी) रगड़ाई नहीं हुई है, अगर होती तो ठीक रहते…

शुरू में सचिन को ‘नया युवा-तुर्क’ बताने वाले एंकर, गहलोत की यह फटकार सुन कर एकदम पलटी मार गए और बताने लगे कि सिर्फ उन्नीस विद्रोेही विधायकों से गहलोत का कुछ नहीं बिगड़ने वाला। इसके बाद तो सरकार का भविष्य अदालत के हवाले हुआ! ‘सचिन बीजेपी के कि बीजेपी सचिन की, कि वे बीजेपी में नहीं जाएंगे, कि अगर नहीं जाएंगे तो मुकुल रोहतगी और हरीश साल्वे को अपना वकील क्यों बनाए?ह्ण जैसी अटकलें देर तक चर्चा का विषय बनती रहीं।

एक ‘हेट खबर’ अलीगढ़ विश्वविद्यालय के हॉस्टल से आई कि हॉस्टल में रहने वाली एक हिंदू छात्रा को ह्यहिजाब पहनानेह्ण की ट्वीट-धमकी दी गई है। यह ‘हेट खबर’ भी ‘हिंदू बरक्स मुसलमान’ करने का बहाना बन गई।

इसी तरह एक चैनल तमिलनाडु के एक कथित तर्कवादी के हवाले से खबर और चर्चा ले आया कि एक भक्ति कवि का ह्यकुरुप्प कूटमह्ण करके उसने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, जिसके लिए उसे माफी मांगनी चाहिए… फिर अंग्रेजी एंकर ने आधे घंटे तक उनके बीच जम के ‘कूटम कूटम’ करवाया!
इसी बीच, केरलीय एक स्वप्ना सुरेश के तीस किलो सोने की तस्करी करने और पकड़े जाने की खबर ने कामरेडों की केरल सरकार को लपेटे में ले लिया। सच ही कहा है:
‘कनक कनक ते सौगुुनी, मादकता अधिकाय!
जा खाए बौराय जग, वा पाए बौराय!!’

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 बाखबर: अर्थात शठे शाठ्यम् समाचरेत
2 संदर्भ: नस्लवाद और शिक्षा
3 दूसरी नजर: वार्ता की कूटनीति की असफलता
यह पढ़ा क्या?
X