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सुधीश पचौरी का कॉलम बाख़बर : इशरत फाइल का सच

टाइम्स नाउ की आरटीआइ के जवाब में मिली इशरत फाइल की कॉपी एकदम धड़ाका करने वाली दिखी!

Author नई दिल्ली | April 24, 2016 08:59 am
इशरत जहां (फाइल फोटो)

जिन खबरों में किसी के हलाल किए जाने की गांरटी नहीं होती वे दो मिनट की खबरों की तरह दी जाकर चैनलों से सकेर दी जाती हैं। जिसमें किसी बड़े नाम की ऐसी तैसी की जा सकती हो उसे दो चार दिन तक बजाया जाता है।

शायद यही वजह रही कि तीन तलाक की शायरा बानो की याचिका एक चैनल में सिर्फ एक बहस लायक मानी गई। एनडीटीवी ने उसे एक लघु बहस लायक माना। कोहेनूर की पहले वापसी से मनाही, फिर संघ के दबाव में वापस लाने की वीर प्रतिज्ञा की खबर इंडिया टुडे में एक बहस लायक ही रही। पाकिस्तान से आए किरपाल सिंह की बिना दिल और आमाशय वाले शव पर चैनलों में कोई ज्यादा हल्ला नहीं दिखा। पंकजा मुंडे की सेल्फी भी देर तक दिलचस्पी नहीं जगा सकी।

न्यूज चैबीस में इस पर जब कुछ बात हुई तो भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने ‘नेहरू के कपड़े पेरिस में धुला करते थे’ कह कर पंकजा का बचाव किया और बहस आई गई हो गई। दिल्ली का आड-इवन इस बार चैनलों में विवाद नहीं पैदा कर पाया। सूखाग्रस्त इलाके में खड़से के हेलीकॉप्टर के लिए पानी का छिड़काव या सूखाग्रस्त ललितपुर यूपी में अखिलेश के हेलीकॉप्टर के लिए पानी का छिड़काव एक उत्तेजक विषय बनते-बनते रह गया।

स्कर्ट बरक्स नेशनलिज्म वाली चंडीगढ़ से चली खबर में बहस की अच्छी गुंजाइश थी और न्यूज एक्स पर देर तक बहस भी चली कि स्कर्ट का साइज नेशनलिज्म पर किस तरह खतरा हो सकता है? लेकिन चंडीगढ़ के एक आला प्रशासनिक अधिकारी ने यह कह कर इस गरमागरम बहस पर पानी डाल दिया कि यह सब डिस्को में जाने वाली लड़कियों की सुरक्षा के लिए था! आश्चर्य कि इस विषय पर टीवी स्त्रीत्ववादी विशेषज्ञ देर तक नहीं जुट।

जिसकी लाठी उसका सच! एक महीने पहले यही तो दिखा था। उधर देहरादून में भाईजी ने लाठी भांजी, लेकिन इधर खबर यही रही कि घोड़े शक्तिमान की टांग गड्ढे में गिरने से टूटी। फिर उसके आॅपरेशन और नकली टांग लगने की खबरें आती रहीं। शक्तिमान जब भी फुटेज में दिखता, तो देखने वालों को दर्द महसूस होता। उसकी पुतलियां उसके दर्द की इंतिहा कहती दिखतीं रहीं। और जब उसके मरने की खबर आई तो महसूस हुआ कि चलो उस निरीह प्राणी को जल्लादों के दिए नरक से निजात मिली। लेकिन बेरहम राजनीति बदस्तूर जारी रही। एक ने उसे बहादुर बताया तो दूसरे ने उसे शहीद का दर्जा दिया। केंद्रीय मंत्रीजी ने फरमाया कि उसकी मौत के जिम्मेदार को सजा मिले! यही तो सबसे जटिल सवाल है कि वह किसकी वजह से मरा?

टाइम्स नाउ सचमुच धाकड़ चैनल है। जिसके पीछे पड़ जाए उसकी खैर नहीं। टाइम्स नाउ की आरटीआइ के जवाब में मिली इशरत फाइल की कॉपी एकदम धड़ाका करने वाली दिखी! पांच दिन से एंकर चिदंबरम की नोटिंगों और दस्तखतों को दिखा-दिखा कर बताने में कामयाब रहा कि किस तरह चिदंबरम ने नोट में बदलाव किया। रपटों में इशरत लश्कर की बताई गई और बाद में यह संदर्भ बदल दिए गए। और यह एक ‘बड़ा षड्यंत्र’ रहा, जिसका निशाना तब के गुजरात के सीएम मोदी थे। यह एक प्रकार की गद्दारी थी। जनता से धोखाधड़ी थी।

हर शाम न्यूज आवर में एंकर बीच एक कुर्सी खाली छोड़ देता और चुनौती देता रहता कि हिम्मत हो तो चिंदबरम आकर जवाब दें या कांग्रेस के प्रवक्ता आकर जवाब दें! लेकिन कुर्सी खाली की खाली रहती! उनकी विवादित नोटिंगें और उनके दस्तखतों को इतनी बार और इतने क्लोज-अप से दिखाया गया है कि अब हम भी पहचान सकते हैं कि चिदंबरम किस तरह के दस्तखत करते होंगे। एक-दो ने टाइम्स नाउ को टोका भी कि अदालत में चलते हुए केस के समांतर चैनल में बहस चलाना उचित नहीं, जबकि टाइम्स नाउ का एंकर कहता है कि हम जनता को वह सब बता भर रहे हैं, जो कुछ फाइल में लिखा और बदला गया है देश को हक है कि उसे जाने।

पांच दिन लगातार दबाव झेलने के बाद कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला बयान देते दिखे कि इस मामले में सोनिया या राहुल ने चिंदबरम को कभी कोई सलाह-मशविरा नहीं दिया। खबरों की इस टेक्स्चुअल व्याख्या के बीच अचानक एंकर ‘एक्स्ट्रासेंसरी परसेप्शन’ के मोड में आ गया। अपने अतींद्रिय बोध के बहाने उसका मानना था कि सोनिया राहुल का कोई रोल ही न हो, यह बात पचती नहीं। इसे सुन कर भाजपा के एक प्रवक्ता को भी कुछ ‘एक्स्ट्रा टेरस्ट्रियल’ के दर्शन होने लगे। एंकर ‘अनुमान प्रमाण’ से काम लेता रहा और कहता रहा कि जब राहुल माकन के हाथ से बिल की कॉपी लेकर फाड़ सकते हैं तो वे क्या नहीं कर सकते? इसे सिद्ध करने के लिए चैनल कुछ चित्र दिखाने लगता, जिनमें चिदंबरम राहुल की ओर मुंह करके उनसे कुछ कहते दिखते थे! लीजिए हो गया न प्रमाण!

एक वकील ने कहा कि सरकार यहां चैनल में हल्ला करने की जगह तीसरा हलफनामा क्यों नहीं डालती? दूसरा वकील एक शाम कह चुका था कि आप लोग चिदंबरम और पूर्वसचिव का नारको टेस्ट कराइए। इसी तरह एक और वकील ने कहा कि सरकार इनके खिलाफ एफआइआर क्यों नहीं फाइल करती? मगर भइए, जो मजा हर शाम किसी बड़े को हलाल करने में है वह झटके में कहां?

इस बीच इशरत के एक ‘सच्चा वीडियो’ का दावा लेकर न्यूज एक्स भी मैदान में आ गया। उसका जोरदार प्रोमो कहता दिखा: इशरत कहानी का अब तक का अनदेखा वीडियो प्रूफ! पहली बार! यानी कि कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्त!

वृहस्पतिवार की शाम उत्तराखंड को लेकर हाई कोर्ट के फैसले से कांग्रेस को कुछ राहत मिलती दिखी। लेकिन यह खबर भी आई कि हाई कोर्ट ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के फैसले पर जिस भाषा में आपत्ति की है उसे लेकर सरकार बड़ी अदालत में जा सकती है। हरीश रावत ने कहा कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को चार घाव लगाए हैं, लेकिन अदालत ने न्याय किया है। इससे राजनीति एकदम गरमा गई दिखी।

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