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वक्त की नब्ज: वार, पलटवार

लगता है, राजीव गांधी को इस आम चुनाव में पात्र बनाया है सोची-समझी रणनीति के तहत। लगता है, ‘चौकीदार चोर है’ इतनी बार चिल्ला कर राहुल गांधी ने नुकसान अपना ज्यादा किया है और मोदी का कम। कुछ दिनों में पता लग जाएगा।

Author May 12, 2019 5:03 AM
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

राजीव गांधी इस चुनाव में मुद्दा बन गए हैं और दोष उनके साहबजादे का है। महीनों से बिना कोई सबूत पेश किए ‘चौकीदार चोर है’ चिल्लाते फिरते रहे नरेंद्र मोदी की छवि को कलंकित करने के मकसद से। चुनाव अभियान शुरू होने के बाद उनकी आवाज कुछ ज्यादा ऊंची हो गई है, सो आखिरकार प्रधानमंत्री को पलटवार करना ही पड़ा पिछले हफ्ते। कह दिया एक आमसभा को संबोधित करते हुए कि ‘नामदार’ न भूलें कि उनके पिताजी मिस्टर क्लीन माने जाते थे जब उनका कार्यकाल शुरू हुआ और अंत में भ्रष्टाचारी नंबर वन बन गए थे। नरेंद्र मोदी का यह बयान तीखा तो था, लेकिन सच था। मुझे याद है अच्छी तरह 1989 वाला आम चुनाव। याद है कि छोटे-छोटे गांवों में लोकगीत गाया करते थे बोफर्स को लेकर। एक लोकगीत की पंक्ति आज भी याद है मुझे- ‘इटली के दामाद तेरे बस का हिंदुस्तान नहीं’।

उस 1989 वाले चुनाव अभियान के शुरू होने से पहले साबित हो गया था कि बोफर्स सौदे में भारत सरकार के कुछ आला सदस्यों ने रिश्वत खाई थी। मालूम यह भी हो गया था कि बोफर्स कंपनी के अधिकारियों ने दिल्ली आकर रिश्वतखोरों के नाम बताने की पेशकश की थी। राजीव गांधी ने नाम सार्वजनिक नहीं होने दिए राष्ट्र सुरक्षा का हवाला देकर। राजीव की हत्या के बाद जब सोनिया गांधी ने देश का प्रधानमंत्री नियुक्त किया, तो मेरी दोस्त चित्रा सुब्रमण्यम की खोजी पत्रिकारिता ने ढूंढ़ निकाला कि बोफर्स का कुछ रिश्वत का पैसा सोनिया गांधी के करीबी दोस्त ओत्तावियो और मारिया क्वात्रोकी के स्विस बैंक खातों में पाया गया है। खबर मिलते ही क्वात्रोकी अपने परिवार को लेकर भारत से हमेशा के लिए भाग गए। कांग्रेस पार्टी आज तक समझा नहीं पाई है कि बोफर्स ने क्वात्रोकी को रिश्वत क्यों दी थी। कुछ तो कारण होगा न? यह भी सच है कि बोफर्स के राज छिपाए रखने में भारतीय जनता पार्टी ने भी मदद की है। अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने थे, क्वात्रोकी जिंदा थे। उनको भारत लाया जा सकता था, लेकिन सीबीआइ ने उनको लाने के लिए इतनी कमजोर दलीलें रखीं विदेशी अदालतों में कि बात कभी बनी नहीं। ऐसा उन्होंने क्यों किया, अभी तक किसी को मालूम नहीं है। खैर, राजीव जब पात्र बन ही गए हैं इस आम चुनाव में तो प्रधानमंत्री ने इसका लाभ उठाया है चतुराई से। भ्रष्टाचारी नंबर वन कहने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि राजीव गांधी आइएनएस विराट को टैक्सी बना कर अपने परिवार और दोस्तों को लक्षद्वीप ले गए थे 1988 में छुट्टियां मनाने।

नौसेना के कई अफसरों ने सफाइयां दी हैं राजीव गांधी के पक्ष में। कहा है कि आइएनएस विराट पर एक भी विदेशी नागरिक ने कदम नहीं रखा था, लेकिन इंडियन एक्स्प्रेस अखबार ने पिछले हफ्ते अपना एक पुराना लेख दुबारा छाप कर साबित किया है कि नौसेना के समुद्री जहाजों और हेलीकॉप्टरों का कई तरह से दुरुपयोग हुआ था। आइएनएस विराट की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही अन्य पुरानी तस्वीरें दिखने लगीं। ऐसी तस्वीरें, जिनमें स्पष्ट दिखता है कि नौसेना का इस तरह का दुरुपयोग पंडित नेहरू के जमाने से होता रहा है। पंडितजी अपनी बेटी और नवासों को इंडोनेशिया लेकर गए थे नौसेना के एक जहाज पर। पुरानी तस्वीरें हैं ये उस पुराने दौर की, जो बहुत पहले खत्म हो गया है। लेकिन इन तस्वीरों ने याद दिलाया है देश के मतदाताओं को कि इस चुनाव में एक चायवाले के बेटे के सामने खड़े हैं एक शहजादे, जिन्होंने दशकों से भारत को अपनी जागीर समझ रखा है। ऊपर से जब शहजादे की बहन अपने भाषण में कहती हैं मोदी के बारे में कि उसने ‘इतना कमजोर और कायर प्रधानमंत्री कभी नहीं देखा है’ अपनी जिंदगी में, तो याद दिलाती हैं कि देश के तकरीबन सारे प्रधानमंत्री उनके परिवार के ही थे।

एक समय था जब नेहरू-गांधी परिवार का करिश्मा इतना था कि मतदाता उनके चेहरे देख कर ही वोट दे दिया करते थे। रायबरेली और अमेठी में शायद ऐसा इस बार भी होगा, लेकिन देश बहुत बदल गया है अब और अशिक्षित मतदाता भी जानते हैं कि किसी राजनेता के तथाकथित करिश्मे को वोट देने से उनको कोई फायदा नहीं होता है। करिश्मा पर वोट देना काफी हद तक इसलिए बंद हो गया है भारत में। हमने इसको 2014 के आम चुनाव में देखा था। मोदी ने उस चुनाव में मतदाताओं को कभी याद दिलाना नहीं भूला कि उनके मुख्य प्रतिद्वंदी एक ‘शहजादे’ थे। इस आम चुनाव में उसी शहजादे ने उनको चुनौती देकर पिछले पांच वर्षों का उनसे हिसाब मांग कर मतदाताओं को याद दिलाया कि परिवर्तन और विकास के वादे ‘झूठे’ थे। याद दिलाया कि दो करोड़ रोजगार हर साल देने का वादा भी झूठा निकला। मगर साथ में जब कांग्रेस अध्यक्ष और उनकी बहन बार-बार यह भी याद दिलाते रहे हैं कि उनके परिवार के कितने सदस्यों ने देश के लिए कुर्बानियां दी हैं, तो यह भी याद दिला दिया है गलती से कि उनके परिवार के दिवंगत सदस्य कितने वर्षों से राजा बन कर राज करते आए हैं भारत पर। इसका लाभ मोदी पूरी तरह उठाने में शायद सफल होंगे। अपने हर इंटरव्यू में अब कहना नहीं भूलते हैं कि उनको गालियां उनके विरोधी सिर्फ इसलिए देते हैं, क्योंकि वे एक गरीब परिवार से आते हैं। वे कामदार हैं नामदार नहीं। लगता है, राजीव गांधी को इस आम चुनाव में पात्र बनाया है सोची-समझी रणनीति के तहत। लगता है ‘चौकीदार चोर है’ इतनी बार चिल्ला कर राहुल गांधी ने नुकसान अपना ज्यादा किया है और मोदी का कम। कुछ दिनों में पता लग जाएगा।

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