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बाखबरः भक्ति अयोध्या उपजी

एक मंत्री जी बोले कि मंदिर की सुनवाई टालना अच्छा संदेश नहीं है।... हिंदी एंकर तो ऐसे अवसरों पर अक्सर भक्तिभाव में डूबे नजर आते ही हैं, लेकिन इस बार अंग्रेजी एंकर भी भक्तिभाव में डूबे नजर आए। भक्त चैनलों में रह रह कर मंदिर का कोरस उठता रहा

Author November 4, 2018 4:52 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर (सोर्स: फाइल)

चुनावक्षेत्रे एमपीक्षेत्रे घूमते-घूमते एक बार भक्त राहुल बहुतै कनफ्यूजे! कन्फ्यूजे कन्फ्यूजे ही कनफ्यूज दिए कि उनका नाम भी पनामा में आया है… फिर आत्मबोध हुआ तो कह दिए कि बहुत सारा भ्रष्टाचार देख-देख यह प्राणी कुछ ज्यादा ही कन्फ्यूज हो गया था, इसलिए कन्फ्यूजन में पनामा में अपना नाम पढ़ बैठा। इसे इस भक्त का कन्फ्यूजन ही समझें। उनके कन्फ्यूजन को देख प्रवक्ताजी ने प्रसन्न होकर कहा : देखा, राहुल जी हमेशा कन्फयूज रहते हैं।… फिर, भक्त राहुल महाकालेश्वर में धोती पहन अर्चनारत हुए, तो उनके स्पर्धी भक्त पूछने लगे कि राहुल अपना गोत्र बताएं… अपनी भक्ति सिद्ध करें। मंदिर बनाना है कि नहीं, यह बतावें।… उसके बाद तो कई भक्त-एंकर भक्त-राहुल पर कटाक्ष करने लगे कि पहले जनेऊधारी, फिर शिवभक्त और अब राष्ट्रवादी!… राहुल कन्फयूज न करें, साफ बताएं कि कौन से ‘वादी’ हैं? प्रतिभक्तों को सदा ही ‘टीज’ करने वाले भक्त राहुल द्वारा सुप्रयुक्त ऐसे ‘भ्रांतिमान अलंकार’ की जय हो, जिसके उच्चारण मात्र से बाकी एंकर भक्त भी अहर्निश ‘कन्फयूजाभक्ति’ ही किया करते हैं! और हे भक्तो! जिस वक्त राहुल महाकालेश्वर में शिवभक्ति में डूबे थे, उसके आसपास उनके भक्त शशि थरूर ने अपनी शिवभक्ति का ऐसा महारूपक अंग्रेजी में बांचा कि उनकी हाय हाय होने लगी।

किसी पूर्व संघी के हवाले से शशि थरूर ने एक भक्त की दुविधा को एक जिज्ञासा की तरह रखा कि हे भक्तजन! मान लीजिए कि शिवलिंग पर एक बिच्छू बैठा है। अगर आप हाथ से हटाएंगे तो काटने का डर है और चप्पल से हटाएंगे तो शिव की अवमानना का खतरा है। इसलिए आप उसे सहने के अलावा कुछ नहीं कर सकते… ऐसी कुवाणी सुनते ही बहुत से भक्त नाराज हुए। एक बोले : यह हिंदू देवी-देवताओं का अपमान है। इसे कोई बर्दाश्त नहीं करेगा। देश देख रहा है। देश जवाब देगा। शिवलिंग महादेव पर जिस तरह की टिप्पणी की है, उसके लिए माफी मांगिए… थरूर की ऐसी कुभाखा पर कई भक्त एंकर तक क्रोधित दिखे। धुलाई के बाद भक्त थरूर कहते रहे, मेरी टिप्पणी की कुव्याख्या की जा रही है।
थरूर जैसे भक्तों की जय हो कि जब भी राहुल भक्त बन कर अपने भक्तों को आनंद देते हैं, तभी थरूर जैसे भक्त उनके आनंद के गुब्बारे की हवा जरूर निकाल देते हैं। शायद ऐसे ही भक्तों के बारे में मिर्जा गालिब ने कहा था :
‘ये फित्ना, आदमी की खाना वीरानी को क्या कम है,

हुए तुम दोस्त जिसके, दुश्मन उसका आसमां क्यूं हो?’
हे संतजनो! भक्तिभाव से भरे हुए ऐसे ही दिनों में जब एक दिन सुप्रीम कोर्ट ने अपनी प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए राममंदिर की जमीन के मालिकाना हक की सुनवाई की तिथियों को जनवरी तक खिसका दिया, तो रामभक्त बहुत दुखी हुए। एक भक्त बोले कि मंदिर चुनाव से जुड़ा मामला नहीं है, लेकिन लोगों की अपेक्षा थी कि जल्दी सुनवाई हो। दूसरे बोले कि मंदिर बनाने के लिए हम हर विकल्प को आजमाएंगे। एक मंत्री जी बोले कि मंदिर की सुनवाई टालना अच्छा संदेश नहीं है।… हिंदी एंकर तो ऐसे अवसरों पर अक्सर भक्तिभाव में डूबे नजर आते ही हैं, लेकिन इस बार अंग्रेजी एंकर भी भक्तिभाव में डूबे नजर आए। भक्त चैनलों में रह रह कर मंदिर का कोरस उठता रहा :

मंदिर अब न बना तो कब बनेगा… अभी नहीं तो कभी नहीं। अध्यादेश लाओ मंदिर बनाओ… कुछ संतजन पुकारने लगे कि सरकार संसद में मंदिर बनाने का कानून बनाए और मंदिर बनाए।… एक भक्त ने चुनौती दी : अगर न बनाया तो हम बना देंगे। जवाब में दूसरे भक्त कहने लगे : हिम्मत है तो कानून बनाके देखो। सरकार आपकी। बहुमत आपका। किसने रोका है? बना न लीजिए मंदिर! इसे देख, अति क्षुब्ध हुआ एक अंग्रेजी एंकर बोल उठा कि वह मुख्य न्यायाधीश महोदय का पूरा सम्मान करता है, लेकिन विनम्रतापूर्वक असहमत होते हुए पूछता है कि इतने बड़े देश की इतनी महान जनता की प्राथमिकता अदालत की प्राथमिकता क्यों नहीं है? सौ करोड़ से अधिक संख्या वाली जनता की ‘चॉयस नंबर वन’ प्राथमिकता बनाई जानी चाहिए।

नए ‘भक्ति आंदोलन’ से प्रेरित कई खबर चैनल अयोध्या पहुंच मंदिर-मंदिर जपने लगे। दो अंग्रेजी भक्त चैनल लाइन देने लगे कि अब न बना तो कब बनेगा? एक ने तो मंदिर जैसा मंच बना कर भक्तों के बीच बहस तक करा डाली। ऐसा तो होना ही था। मंदिर का कोरस जारी ही था कि इसी बीच प्रधानमंत्री ने नर्मदा के किनारे सरदार पटेल की नवनिर्मित, दुनिया की सबसे ऊंची (182 मीटर) मूर्ति का अनावरण किया। पर कलिुयग की दुष्टता देखिए कि प्रधानमंत्री का यह पुण्यकर्म भी कांग्रेस की सोशल मीडिया की इनचार्ज दिव्य स्पंदना जी को नहीं भाया। सरदार की विशाल मूर्ति के चरणों के पास प्रधानमंत्री श्रद्धानुभव से गुजर रहे थे। कैमरों के टाप लांग शॉट में वे अत्यंत लघु दिखते थे, जिसे देख स्पंदना जी ने अपने ट्वीट की बीट कर डाली और तुरंत शाप की पात्र बनीं। एक भक्त सांसद ने संसद में निजी विधेयक लाने का ऐलान कर दिया, तो कांग्रेस भक्त बोले : सरकार लाए, आप क्यों कष्ट करते हैं! फिर एक संघ प्रवक्ता बोले, जिसे सभी खबर चैनलों ने दिखाया कि हम न्यायालय से विनती करते हैं कि वह जनता की भावनाओं का आदर करे… अपने निर्णय पर फिर से विचार करे… जरूरत पड़ी तो आंदोलन करेंगे।…‘भक्ति द्राविड उपजी’ उक्ति अतीत में भले सही रही हो, इन दिनों तो ‘भक्ति अयोध्या उपजी’ ही सही लगती है।

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