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प्रतिरक्षा: आसमान में बढ़ती ताकत

वायुसेना के बेड़े में इस तरह के हेलीकॉप्टरों और विमानों की मौजूदगी से सशस्त्र सेनाओं का मनोबल तो बढ़ेगा ही, वायुसेना भी अत्याधुनिक बनेगी, जिसकी आज के युद्धक माहौल में सख्त जरूरत है।

Author May 26, 2019 4:24 AM
चंडीगढ़ के वायु सेना स्टेशन में प्रेरण समारोह के बाद चार चिनूक हेलीकॉप्टरों में से एक। (एक्सप्रेस फोटो: जयपाल सिंह)

योगेश कुमार गोयल

देश की पहली परमाणु पनडुब्बी ‘आईएनएस अरिहंत’ के अपना पहला गश्ती अभियान पूरा करने के साथ ही भारत जल, थल और नभ तीनों में परमाणु हमला करने में संपन्न राष्ट्र होने का गौरव हासिल कर चुका है। अरिहंत के जरिए जमीन और आसमान के अलावा पानी के अंदर भी मार संभव है। आईएनएस अरिहंत के बाद दूसरी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिधमान भी लगभग तैयार है, जिसके इसी साल राष्ट्र को समर्पित किए जाने की संभावना है। इसी तरह वायुसेना को भी लगातार मजबूत बनाया जा रहा है। भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है, जो हवाई सुरक्षा तथा वायु सीमा की चौकसी का कार्य करती है।

फरवरी में एयर स्ट्राइक के जरिए भारतीय वायुसेना आसमान में बढ़ती अपनी ताकत का आभास करा चुकी है। 1985 में वायुसेना के बेड़े में शामिल हुए जिन फ्रांसीसी मिराज-2000 फाइटर जेट विमानों का एयर सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान इस्तेमाल किया गया, वे 2495 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ने में सक्षम हैं और यह चतुर्थ पीढ़ी का बहुपयोगी एक सीट वाला ऐसा एकल इंजन लड़ाकू विमान है, जिसका इस्तेमाल यूएई एयरफोर्स के अलावा चीनी सेना भी कर रही है। यह आपातकाल में कहीं भी उतरने में सक्षम है और जमीन पर भारी बमबारी करने के साथ-साथ आसमान में उड़ान भरते दूसरे विमानों को अपना निशाना बनाने में भी सक्षम है। कम ऊंचाई पर भी बहुत तीव्र गति से उड़ते हुए यह जमीन पर दुश्मन के ठिकानों पर हवा से सतह पर मिसाइलों तथा हथियारों से बेहद सटीक हमला करने के साथ-साथ लेजर गाइडेड बम दागने में भी समर्थ है। करगिल युद्ध के दौरान वायुसेना के आॅपरेशन ‘सफेद सागर’ में भी मिराज विमानों ने नियंत्रण रेखा पार किए बगैर पांच सौ उड़ानें भर कर सटीक हमले करके पाकिस्तानी सीमा में पचपन हजार किलोग्राम विस्फोटक फेंक कर आतंकी शिविरों को तबाह कर दिया था। भारतीय वायुसेना के बेड़े में इस वक्त पचास मिराज विमान मौजूद हैं।

इसके अलावा सुखोई-30 भी वायुसेना को बेमिसाल ताकत प्रदान करते हैं। यह भारतीय वायुसेना का सबसे सक्षम लड़ाकू विमान माना जाता है। उड़ान भरने के दौरान आसमान में अगर इसका एक इंजन किसी तकनीकी खराबी के चलते बंद हो जाए तो दूसरे इंजन के सहारे यह अपना मिशन पूरा कर सकता है। भारतीय वायुसेना के बेड़े में 240 सुखोई विमान मौजूद हैं। हिंदुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित एक सीट और एक जेट इंजन वाला ‘तेजस’ एक साथ कई भूमिकाएं निभाने में सक्षम एक हल्का सुपरसोनिक युद्धक स्वदेशी विमान है, जो स्पीड, एक्सेलरेशन, गतिशीलता, फुर्ती के मामले में आधुनिक युद्धक विमानों को देखते हुए बनाया गया है। यह दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक है, जो वायुसेना में पुराने पड़ रहे मिग-21 लड़ाकू विमानों की जगह लेगा। दुनिया के कई देशों की दिलचस्पी भारत में निर्मित इस विमान में बढ़ी है। हल्के वजन का होने के साथ-साथ उच्च सीमा की फुर्ती वाला यह ऐसा सुपरसोनिक विमान है, जो चार टन वजनी टैंकों और विभिन्न प्रकार के भारी हथियारों को ले जाने में भी सक्षम है। तीन हजार किलोमीटर की रेंज वाला यह विमान लेजर गाइडेड हमले करने में सक्षम है। वायुसेना के पास एक सौ बीस जगुआर लड़ाकू विमान भी मौजूद हैं, जो कम ऊंचाई पर उड़ने वाले सुपरसोनिक लड़ाकू विमान हैं, जिनके हाई-विंग लोडिंग डिजाइन के कारण कम ऊंचाई पर एक स्थिर उड़ान भरने तथा जंगी हथियार ले जाने में सुविधा होती है। यह विमान सत्रह सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। इस विमान में साढ़े चार हजार किलोग्राम वजन तक के हवा से हवा में हमला करने वाले और हवा से जमीन पर हमला करने वाले रॉकेट सहित कई प्रकार के हथियार लोड किए जा सकते हैं। फ्रांस में बना दो इंजनों वाला कम ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम जगुआर दुश्मन की सीमा में काफी अंदर तक घुस कर हमला कर सकता है।

सुखोई का छोटा भाई कहे जाने वाले सत्तर मिग-29 लड़ाकू विमान भी भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ा रहे हैं, जो अपग्रेड किए जाने के बाद और भी घातक हो गए हैं। अब इन विमानों को ईंधन भरने के लिए नीचे उतारने की जरूरत नहीं, बल्कि रिफ्यूलिंग अब आसमान में ही हो सकती है। मिग-29 का अपग्रेडेड वर्जन नई अत्याधुनिक मिसाइलों से लैस है, जो कई दिशाओं में हमले कर सकता है। बहुत जल्द राफेल भी वायुसेना को बेमिसाल ताकत प्रदान करने के लिए भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने जा रहा है। यह दो इंजन वाला मध्यम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) है, जिसमें कई ऐसी विशेषताएं हैं, जो इसे विश्व का बेहतरीन लड़ाकू विमान बनाने के लिए पर्याप्त हैं।

इन लड़ाकू विमानों के अलावा पिछले कुछ समय में कुछ विशेष लड़ाकू हेलीकॉप्टरों को भी वायुसेना में शामिल किया गया है। 120 एमआई-17 तथा 36 एमआई-25 रूसी लड़ाकू हेलीकॉप्टर पहले से ही वायुसेना के पास हैं और कुछ समय पूर्व वायुसेना को अमेरिका में निर्मित दुनिया भर के कई प्रमुख देशों में लोकप्रिय ‘चिनूक’ हेलीकॉप्टर भी प्राप्त हुए, जो ऐसा पहला अमेरिकी हेलीकॉप्टर है, जो बहुत अधिक वजन उठाने में सक्षम है। यह बख्तरबंद गाड़ियां, यहां तक कि 155 एमएम की होवित्जर तोप को लेकर भी उड़ सकता है। यह वही हेलीकॉप्टर है, जिसके जरिये अमेरिका ने पाकिस्तान में छिपे दुर्दांत आतंकवादी उसामा बिन-लादेन को मौत की नींद सुलाया था। यह बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर बहुत तेज गति से बीस हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम है और इसका इस्तेमाल दुर्गम तथा अत्यधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर सेना के जवानों, हथियारों, मशीनों तथा अन्य प्रकार की रक्षा सामग्री ले जाने में आसानी से किया जा सकता है। पिछले दिनों वायुसेना के बेड़े में बोइंग एएच-64ई अपाचे गार्जियन अटैक हेलीकॉप्टर भी शामिल हुआ, जो ऐसा अग्रणी बहुउद्देश्यीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जिसका इस्तेमाल भारतीय सेना में विशुद्ध रूप से हमले करने में ही किया जाएगा। इसकी फ्लाइंग रेंज करीब साढ़े पांच सौ किलोमीटर है। कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता वाला 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता से लैस यह हेलीकॉप्टर पहाड़ी क्षेत्रों में छिप कर वार करने और आसानी से दुश्मन की किलेबंदी को भेद कर उसकी सीमा में घुस कर बहुत सटीक हमले करने में सक्षम है। अपाचे दुनिया का सबसे आधुनिक और घातक हेलिकॉप्टर माना जाता है। तेज रफ्तार से दौड़ने में सक्षम इस हेलीकॉप्टर को रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल है। इन हेलीकॉप्टरों को भारतीय वायुसेना में शामिल करना वायुसेना के बेड़े के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कुछ माह पहले भारत ने रूस के साथ सैंतीस हजार करोड़ रुपए की लागत से एस-400 एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल प्रणाली का सौदा भी किया था। मल्टी फंक्शन रडार से लैस एस-400 दुनिया भर में सर्वाधिक उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियों में से एक मानी जाती है, जो जमीन से मिसाइल दाग कर हवा में ही दुश्मन की ओर से आ रही मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम है अ‍ौर एक साथ छत्तीस लक्ष्यों तथा दो लांचरों से आने वाली मिसाइलों पर निशाना साध सकती है और सत्रह हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से तीस किलोमीटर की ऊंचाई तक अपने लक्ष्य पर हमला कर सकती है। इसकी रेंज चार सौ किलोमीटर है और यह छह सौ किलोमीटर की दूरी तक निगरानी करने की क्षमता से लैस है। यह किसी भी प्रकार के विमान, ड्रोन, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल तथा जमीनी ठिकानों को चार सौ किलोमीटर की दूरी तक ध्वस्त करने में सक्षम है। वायुसेना के बेड़े में इस तरह के हेलीकॉप्टरों और विमानों की मौजूदगी से सशस्त्र सेनाओं का मनोबल तो बढ़ेगा ही, वायुसेना भी अत्याधुनिक बनेगी, जिसकी आज के युद्धक माहौल में सख्त जरूरत है।

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