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रम्य रचना : पार्क में फाउंटेनपेन

ब्लैक कैट कमांडोज को सतर्क कर दिया गया है, ताकि किसी भी संदिग्ध फाउंटेन पेनधारी को देखते ही छापामार कार्यवाही कर उसे दबोच लिया जाए।

Author नई दिल्ली | February 13, 2016 11:32 PM

 प्रमोद तांबट

चैन से सोना हो तो जाग जाओ। जाग गए हो तो सुनो। आज दिनदहाड़े राजधानी में एक बेहद सनसनीखेज घटना दरपेश आई, जिसकी वजह से समूची राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल बना रहा। खबर है कि राजधानी की एक पॉश कॉलोनी के नए-नए स्मार्ट पार्क में, सीमेंट की बेंच पर, एक जिंदा फाउंटेन पेन पाया गया। जी हां, एक जिंदा फाउंटेन पेन, जिसके अंदर नीले रंग की स्याही लबालब भरी हुई थी। हद हो गई, कमाल हो गया, लापरवाही की इंतहा हो गई। राजधानी के स्मार्ट पार्क की बेंच पर जिंदा फाउंटेन पेन! जब टाइट सिक्यूरिटी वाली राजधानी का यह हाल है, तो छोटे-मोटे गांव-कस्बों का क्या हाल होगा।

विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इस स्मार्ट पार्क में कॉलोनी के रसूखदार, पैसे वालों के बच्चे भारी तादाद में मोबाइल और टेबलेटों पर गेम खेलने के लिए पहुंचते हैं। समझा जाता है कि इसी बात का फायदा उठाते हुए किसी शातिर बदमाश ने मौका देख कर छोटे-छोटे मासूम बच्चों के बीच वह जिंदा फाउंटेन पेन रख दिया, ताकि उन्हें धोखे से उस खतरनाक चीज का शिकार बनाया जा सके। पर एक जागरूक नागरिक के अदम्य साहस और पराक्रम के कारण एक बड़ा हादसा होते-होते रह गया।

राजधानी के रईसों में शासन-प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ भारी असंतोष का वातावरण है। जाहिर है, उनकी सुस्ती की वजह से अगर यह जिंदा फाउंटेन पेन किसी मासूम बच्चे के हाथ लग जाता तो एक बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। मामले का एक और सनसनीखेज पहलू यह है कि अगर खुदा न खास्ता कुछ मासूम बच्चे इस खतरनाक फाउंटेन पेन का शिकार बन जाते तो उनके इलाज के लिए राजधानी के किसी अस्पताल में कोई माकूल व्यवस्था नहीं है।

बताया जाता है कि इस जिंदा फाउंटेन पेन के स्मार्ट पार्क की बेंच पर इस तरह संदिग्ध अवस्था में पड़े होने की खबर सर्वप्रथम स्थानीय पुलिस और प्रशासन को देने वाले उस बहादुर शख्स को सरकार दो सौ रुपए नगद पुरस्कार स्वरूप प्रदान कर सम्मानित करना चाहती है, साथ ही उसका नाम बहादुरी पुरस्कारों के लिए प्रस्तावित करने की तैयारी भी चल रही है। समस्या यह हो गई है कि उक्त व्यक्ति पुलिस द्वारा इस प्रकरण में जबरन फंसा दिए जाने के डर से भूमिगत हो गया है।

इधर संपन्न नागरिकों की कॉलोनी में इस तरह खुलेआम एक जिंदा फाउंटेन पेन पाए जाने से शहर भर के बुद्धिजीवियों, राजनीतिक हलकों, व्यापारी वर्ग और नौकरशाही में भी चिंता की एक प्रचंड लहर दौड़ गई है। समाज के सभी कोनों से घोर आश्चर्य प्रकट किया जा रहा है कि जब तमाम आला दर्जे के फाउंटेन पेन एकाएक परिदृश्य से गायब हो चुके हैं, तो आखिर एक दोयम दर्जे का घटिया-सा फाउंटेन पेन इस तरह खुलेआम पार्क की बेंच पर कैसे पाया जा सकता है! किसकी हो सकती है यह दुस्साहस पूर्ण हरकत! किसकी शामत आई है, जो इतिहास से करीब-करीब विदा ले रहे फाउंटेन पेन को फिर से मुख्यधारा में लाने पर उतारू है। कौन हो सकता है जो चाकू-छुरे और नंगी तलवार के इस जमाने में फाउंटेन पेन के जरिए लाल, नीली, हरी, काली रोशनाई से कागज रंगने का मंसूबा बना रहा है!

सभी सामाजिक संगठनों में इस घटना को बेहद संदेहास्पद दृष्टि से देखा जा रहा है। कुछ उत्साहीलाल तो इस घटना में पाकिस्तान का हाथ होने की संभावनाओं की ओर भी इशारा कर रहे हैं, जबकि कुछ संगठनों का मानना है कि जिस मुल्क को सुई तक बनाने की तमीज नहीं है उसके द्वारा इतना बड़ा फाउंटेन पेन बना कर भारत की राजधानी के पार्क की बेंच पर रखवाया जाना बिल्कुल संभव नहीं है।

सरकार ने भी घटना की गंभीरता के मद्देनजर एक सर्वदलीय बैठक बुला कर अपनी चिंता सार्वजनिक की है। मामले की पुख्ता जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जजों का आठ-दस सदस्यीय जांच आयोग बिठाने की घोषणा की गई है और पुलिस महकमे को कड़ी लताड़ लगाते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं के प्रति चौकस रहने के निर्देश दिए गए हैं। सनसनी द्वारा मामले पर पुलिस प्रमुख की राय जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने कहा कि संदिग्ध फाउंटेन पेन को जब्त कर सूक्ष्म जांच के लिए गोपनीय रूप से एक अंतरराष्ट्रीय लैब को भेज दिया गया है।

पुलिस प्रमुख ने कहा है कि षड्यंत्रकारियों द्वारा शासन-प्रशासन को मूर्ख बनाने की दृष्टि से फाउंटेन पेन को पार्क की बेंच पर छोड़ा जाना संभावित है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हमारा मनोबल ऊंचा है और हम ऐसी दुर्घटना दोबारा नहीं होने देंगे। विदेशों से संपर्क कर शीघ्र ही फाउंटेन पेन जैमर की व्यवस्था की जा रही है ताकि अगर शहर में कहीं और भी जिंदा फाउंटेन पेन मौजूद हों तो उनको निष्क्रिय कर संभावित खतरों को टाला जा सके। शहर भर में जगह-जगह चैक पाइंट लगाए जाएंगे और चौकसी बढ़ाई जाएगी। ब्लैक कैट कमांडोज को सतर्क कर दिया गया है, ताकि किसी भी संदिग्ध फाउंटेन पेनधारी को देखते ही छापामार कार्यवाही कर उसे दबोच लिया जाए।

बरसों से बंद पड़ी फाउंटेन पेन बनाने वाली कंपनियों की एक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ने घटना पर घोर आश्चर्य प्रकट करते हुए बताया कि हमारी एसोसिएशन के सदस्यों द्वारा पूरी तौर पर फाउंटेन पेन बनाने का धंधा बंद कर दिया गया है और अब हम लोग चाकू-छुरे, कट्टे-तमंचे, तलवारें और देसी बम बनाने का काम कर रहे हैं। हमारे कुछ सदस्यों ने तो पान की दुकानें खोल ली है। ऐसे में कैसे और कहां से राजधानी में एक जिंदा फाउंटेन पेन आ गया, यह हमारी बंद हो चुकी एसोसिएशन के लिए भी घोर आश्चर्य का विषय है। मुझे शक है कि हमारी एसोसिएशन के कुछ बागी सदस्य अब भी चोरी-छिपे फाउंटेन पेन बनाने का अनैतिक कृत्य कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसे देशद्रोहियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर फांसी पर चढ़ा दिया जाए, जिन्होंने मानवता को शर्मसार करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है।

नामी पत्र-पत्रिकाओं से जुड़े पत्रकारों साहित्यकार-लेखकों की एक एसोसिएशन ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा है कि समाज की मुख्यधारा के साथ चलते हुए हम लोगों ने कब का अपना-अपना फाउंटेन पेन सरेंडर कर दिया है। हममें से कोई अब उस मनहूस वस्तु की ओर देखता भी नहीं है। सरकार ने समय-समय पर इसके लिए हमारे कुछ साथियों को पुरस्कृत भी किया है। एसोसिएशन ने आलोचना करते हुए कहा कि हो सकता है कुछ फ्रीलांस वाले सिरफिरे अब भी अपने गिफ्ट में मिले फाउंटेन पेनों में, एक-दूसरे का मुंह काला करने के काम आने वाली, देश की अमूल्य संपदा, ‘स्याही’ का इस्तेमाल कर कागज काले कर रहे हों, जो कि घोर निंदा का विषय है।

एसोसिएशन ने ऐसे ही किसी बंदे के इस घटना में शामिल होने की संभावना प्रकट की है, जो पार्क में मुफ्त की हवाखोरी करते हुए लेखन जैसा असामाजिक कृत्य करने का आदी हो। एसोसिएशन ने कहा है कि यह आम जन साधारण और शासन-प्रशासन की सूझबूझ और सतर्कता का ही परिणाम है कि किसी विध्वंसक लेख, कविता, व्यंग्य, कहानी या रिपोर्ताज के सामने आने से पहले ही उस फाउंटेन पेन को देख लिया गया और फुर्ती से उसे जिंदा हालत में कब्जे में लिया जाकर अत्यंत प्रशंसनीय कार्य किया गया।

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