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दाना-पानी: पत्ता-पत्ता जायकेदार

भोजन में कोईन कोई पत्तेदार सब्जी जरूर होनी चाहिए। इससे दो फायदे होते हैं। एक तो इससे आहार में अन्न और दाल की मात्रा कम हो जाती है, पेट जल्दी भर जाता है। दूसरे, पत्तेदार सब्जियों में रेसा यानी फाइवर बहुत होता है, जिससे पेट साफ रहता है। गांवों में लोग तरह-तरह की पत्तियों की सब्जी बनाते हैं, जैसे सीताफल की बेल, सहजन के पत्ते, सूरन यानी ओल और अरबी के पत्ते आदि। इस बार कुछ ऐसी ही पत्तेदार सब्जियां।

Delicious, recipe, tasty Itemsदाना-पानी: पुई बजका और अरबी के पतोड़े।

मानस मनोहर
पुई बजका
इसे पुई, पोई, पोतका आदि नामों से जाना जाता है। आयुर्वेद में इसके अनेक गुण गिनाए गए हैं। पुई साग बनाने के कई तरीके हैं। पहला तो यही कि इसके पत्तों को काट कर सामान्य साग की तरह जीरे के तड़के में सिर्फ नमक और हल्दी डाल कर पानी सूखने तक पका लिया जाए। दूसरा यह कि आलू के साथ रसदार या फिर सूखी सब्जी की तरह पका लिया जाए। तीसरा तरीका चने, मसूर आदि किसी दाल के साथ मिला कर पकाने का भी है।

अलग-अलग इलाकों में इसे अलग-अलग तरीके से पकाते हैं। बंगाल, ओड़ीशा, झारखंड के लोग इसमें दाल डाल कर पकाते हैं, तो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में आलू के साथ। आप जैसे चाहें इसे पकाएं, पर खाएं जरूर। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में दाल-भात के साथ बजका बनता है। बजका यानी लौकी, आलू, बैगन आदि में से किसी को बेसन में लपेट कर तल लिया जाता है। जैसे बंगाल में बैगन या आलू को चिप्स की तरह काट कर सीधे तेल में तल लेते हैं और उसे भाजा कहते हैं, कुछ उसी तरह बेसन में लपेट कर तली हुई सब्जियों को बजका कहते हैं।

पुई का बजका बहुत स्वादिष्ट बनता है। इसे पकाना भी बहुत आसान है। अगर दाल-भात बना रहे हैं, तो पुई का बजका जरूर बनाएं। चाहें तो इसे चाय के साथ कटलेट की तरह भी खा सकते हैं। पुई के पत्तों को काट कर डंठल से अलग करें और तीन-चार बार पानी से अच्छी तरह धो लें। पत्तों का पानी निथर जाए तो इन्हें बारीक-बारीक काट लें।

यों इसमें बहुत सारे मसाले डालने की जरूरत नहीं होती, पर थोड़ा डाल लें तो स्वाद बढ़ जाता है। इसमें एक चम्मच धनिया पाउडर, एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच गरम या सब्जी मसाला डालें। थोड़ा बेसन डालें और अच्छी तरह मिलाएं। देखें कि बेसन की मात्रा बस इतनी हो कि पत्ते आपस में अच्छी तरह चिपक जाएं। फिर जरूरत भर का नमक डालें।

अब थोड़ा-थोड़ा पानी डाल कर अच्छी तरह सारी चीजों को मिला लें। पानी की मात्रा अधिक न होने पाए, नहीं तो बेसन पतला होकर पत्तों को छोड़ कर बहने लगेगा। जैसे प्याज के पकौड़ों के लिए बेसन मिलाते हैं, उसी तरह पत्तों और बेसन को अच्छी तरह मिला लें।

अब एक पैन या तवा गरम करें। उस पर सरसों का तेल डाल कर चारों तरफ फैला लें और जब तेल ठीक से गरम हो जाए तो उस पर मिश्रण से थोड़ी-थोड़ी मात्रा लेकर कटलेट की तरह चपटा आकार देते हुए डालते जाएं। आंच मध्यम रखें। इन टिक्कियों को दोनों तरफ से पलटते हुए सुनहरा, कुरकुरा होने तक तल लें। दाल-भात के साथ इसका आनंद लें। वैसे इन्हें सॉस या चटनी के साथ कटलेट या टिक्की के तौर पर भी खा सकते हैं। यह सूखी सब्जी का भी विकल्प हो सकता है।

अरबी के पतोड़े
अरबी यानी घुइयां या कच्चू। इसकी सूखी भुजिया, दही के साथ या उबाल कर बनाई सब्जी तो प्राय: लोग खाते हैं, पर इसके पत्तों की सब्जी शहरों में कम ही लोग खाते होंगे। गांवों में इसकी सब्जी इस मौसम में खूब बनती है। इसके पत्ते आमतौर पर हर जगह मिल जाते हैं। उनमें भी कीड़े वगैरह का भय नहीं होता, सो बिना किसी चिंता के इन्हें खाया जा सकता है। इसके पत्तों की सब्जी कई तरह से बनती है। पर इसके पतोड़े सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे गिरवछ भी कहते हैं। इसे बनाने में थोड़ी मशक्कत जरूर करनी पड़ती है, पर खाने में ये बहुत स्वादिष्ट होते हैं।

अरबी के पतोड़े बनाने के लिए सबसे पहले पत्तों को अच्छी तरह धोकर इसका पानी अच्छी तरह सुखा लें। फिर एक कटोरे में बेसन लें। बेसन की मात्रा आप पत्तों के अनुसार लें। ध्यान रखें कि बेसन का घोल पत्तों के ऊपर लगा कर परत बनानी है, इसलिए बेसन की मात्रा उसी के मुताबिक रखें। फिर बेसन में सबसे पहले दो चम्मच अमचूर, एक चम्मच धनिया पाउडर, एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर, एक चम्मच सब्जी मसाला, चौथाई चम्मच हल्दी, चौथाई चम्मच हींग और जरूरत भर का नमक डालें। अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए गाढ़ा घोल बनाएं।

ध्यान रखें कि इस घोल को अरबी के पत्तों पर बिछाना है, इसलिए अगर पतला होगा, तो बह जाएगा। अब एक-एक पत्ता लें और तेज चाकू की मदद से उसके कड़े डंठल वाले हिस्से को छील कर अलग कर दें। फिर खुरदुरा वाला हिस्सा ऊपर रखें और उस पर बेसन की परत चढ़ाएं। फिर उस पर दूसरा पत्ता बिछाएं और उस पर भी बेसन लपेटें। इसी तरह तीसरा पत्ता रखें और बेसन लगा कर रोल की तरह लपेटें। इसी तरह सारे पत्तों का रोल बना लें।

अब एक इडली स्टैंड, स्टीमर या फिर भगोने के तले में करीब दो इंच तक पानी भरें। उसे गरम करें और जब भाप उठने लगे तो उसमें इन पत्तों के रोल को भाप से पकने के लिए रखें। जैसे इडली पकाते या सब्जियों को स्टीम करते हैं, उसी तरह इन पत्तों को पकाएं। करीब बीस मिनट में यह पक कर तैयार हो जाता है। अब इन पतोड़ों को निकाल कर ठंडा होने के लिए रख दें।

ठंडा होने के बाद अगर इन्हें थोड़ी देर फ्रिजर में रख दें, तो जल्दी कड़े हो जाते हैं। जब अच्छी तरह कड़े हो जाएं, तो इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। फिर एक पैन या तवे पर थोड़ा-सा सरसों तेल डालें और इन टुकड़ों को पलटते हुए मध्यम आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंक लें। इन्हें हरी चटनी के साथ कटलेट की तरह भी खा सकते हैं, दाल-चावल के साथ सूखी सब्जी की तरह, बजका की जगह भी खा सकते हैं या फिर अगर चाहें तो दही-टमाटर की तरी के साथ पका कर रसदार सब्जी के रूप में भी खा सकते हैं।

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