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दाना-पानी: लजीज परंपरा

कुछ चीजें हर घर में परंपरा से बनती आ रही हैं। वही चीजें हमारे स्वाद में बसी होती हैं, जो हम बचपन से खाते आए हैं। पर उनके बनाने के तरीके में थोड़ा बदलाव करते रहें, तो उनका जायका बदल जाता है। खाने में नयापन आ जाता है। इन दिनों जब बाहर का खाना न तो सहज उपलब्ध है और न सुरक्षित, तब क्यों न घर में ही परंपरागत व्यंजनों में थोड़ा बदलाव करके उन्हें नए जायके के साथ परोसा और खाया जाए।

Author Published on: May 17, 2020 12:21 AM
दही वाली सोयाबीन वड़ी और बेसन हलवा मोहनथाल

मानस मनोहर
दही वाली सोयाबीन वड़ी
जब घर में कोई सब्जी नहीं होती या हरी सब्जियां खाते-खाते ऊब जाते हैं, तब मसालेदार सोयाबीन की वड़ियां याद आती हैं। आलू के साथ या सिर्फ प्याज-टमाटर की ग्रेवी के साथ इन्हें प्राय: हर जगह बनाया और खाया जाता है। पर इन्हें थोड़ा अलग अंदाज में बनाएं, तो इनका स्वाद लाजवाब आता है। दही के साथ सोयाबीन की वड़ियां बेहद लजीज बनती हैं। इन्हें बनाना बेहद आसान है। चार लोगों के लिए सोयाबीन की वड़ियां बनानी हैं, तो डेढ़ कटोरी वड़ियां लें। इसमें डालने के लिए दो कटोरी दही और दो मध्यम आकार के प्याज की जरूरत पड़ेगी।

पहले पानी गरम करें और जब उसमें उबाल आ जाए तो वड़ियों को डाल कर दो से तीन मिनट के लिए उबाल लें। इस तरह वड़ियां नरम और मुलायम हो जाएंगी। फिर उन्हें छन्नी से छान लें। हल्के हाथों से दबाते हुए उनका पानी निचोड़ लें। इन्हें थोड़ी देर ठंडा होने दें। तब तक प्याजों को छील कर पतला-पतला काट लें। दही में पानी अधिक न हो। गाढ़े दही को अच्छी तरह मथ लें।

अब वड़ियों में से दस-बारह वड़ियां अलग निकाल कर रख लें। फिर एक कड़ाही में दो-तीन चम्मच तेल गरम करें और उसमें बाकी सोयाबीन की वड़ियों को डाल कर मध्यम आंच पर चलाते हुए सेंक लें। वड़ियां सुनहरे रंग की हो जाएं, तो आंच बंद कर दें। उन्हें कड़ाही से निकाल कर अलग कटोरे में रखें और ठंडा होने दें। उसमें आधा चम्मच लाल मिर्च, जरूरत भर का नमक, दो छोटा चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच पिसी सौंफ और आधा चम्मच हल्दी पाउडर डालें और ऊपर से मथा हुआ दही डाल कर अच्छी तरह मिला लें। अब इसे कम से कम पंद्रह मिनट के लिए ढककर रख दें।

तब तक कड़ाही में तेल गरम करें और उसमें कटे हुए प्याज को मध्यम आंच पर चलाते हुए बादामी रंग का होने तक भून लें। प्याज को कड़ाही से निकाल कर ठंडा होने दें। जब ठंडा हो जाए, तो ग्राइंडर में डाल कर बिना पानी डाले पीस लें। उसके बाद अलग से निकाल कर रखी वड़ियों को भी बिना पानी डाले पीस लें।

कड़ाही में दो चम्मच तेल गरम करें। उसमें एक इंच दालचीनी का टुकड़ा, दो तेजपत्ता, दो-तीन लौंग, चार-पांच साबुत काली मिर्च, दो हरी इलाइची फोड़ कर डालें और तड़कने दें। इसके साथ ही दो चुटकी जीरा डाल कर तड़काएं और फिर पिसा हुआ प्याज डालें। साथ ही दही में फेंटी हुई सोयाबीन की वड़ियां डाल कर मध्यम आंच पर चलाते हुए पकाएं। जिस कटोरे में दही मिली वड़ियां रखी थीं, उसमें आधा कप पानी लेकर सारे मसाले को घोल कर कड़ाही में डाल दें। चलाते रहें।

जब उबाल आने लगे, तो उसमें पिसी हुई वड़ियां और एक चम्मच कसूरी मेथी रगड़ कर डालें और आधा चम्मच गरम मसाला डाल कर अच्छी तरह मिला लें। कड़ाही पर ढक्कन लगाएं और धीमी आंच पर पांच मिनट के लिए पकने दें। ग्रेवी गाढ़ी हो जाए, तो आंच बंद कर दें। दही वाली सोयाबीन वड़ी तैयार है। इसे रोटी, पराठे, पूड़ी या चावल के साथ भी खा सकते हैं।

बेसन हलवा / मोहनथाल
इन दिनों मिठाई की दुकानें बंद हैं, सो मिठाई खाने का मन हो, तो क्यों न घर पर ही कुछ मीठा बनाया जाए। ऐसे में मोहनथाल या बेसन का हलवा उत्तम मिठाई है। इसे पारंपरिक तौर पर त्योहारों में बनाया जाता है।

मोहनथाल बनाने में थोड़ी मशक्कत जरूर करनी पड़ती है, पर जब यह बनता है, तो इसका स्वाद भुलाए नहीं भूलता। इसके लिए दो कप बेसन लें। इसके अलावा आधा कटोरी तेज गरम दूध और इतनी ही मात्रा में दूध में घी डाल कर दोनों को अच्छी तरह मिला लें ताकि घी अच्छी तरह दूध में मिल जाए।

अब बेसन में थोड़ा-थोड़ा करके दूध और घी का मिश्रण डालते हुए अच्छी तरह बेसन में मिलाएं। जब सारा दूध डाल दें तो फिर दोनों हथेलियों के बीच बेसन को लेकर अच्छी तरह मसलते हुए मिलाएं, ताकि पूरे बेसन में दूध और घी मिल जाए। इस मिश्रण को थोड़ी देर ठंडा होने दें। फिर मोटे छेद वाली या जिस छन्नी से आटा छानते हैं, उसमें इस बेसन को डाल कर हाथ से रगड़ते हुए छान लें, ताकि कोई गांठ न रहने पाए।

अब कड़ाही में एक कप घी गरम करें और उसमें बेसन को डाल कर मध्यम आंच पर चलाते हुए तब तक भूनें, जब तक कि उसका रंग बादामी न हो जाए। इस प्रक्रिया में बेसन घी छोड़ कर पानी की तरह पतला होने लगेगा और उसमें दाने बनने लगेंगे। फिर आंच बंद कर दें और बेसन को चलाते रहें, जब तक कि वह गाढ़ा होकर सूखा-सूखा न दिखने लगे।

अब इसमें डालने के लिए चाशनी तैयार करें। इतने मोहनथाल के लिए एक कप चीनी लें और एक पैन में इतनी ही मात्रा में पानी डाल कर उबालें। जब उबाल आने लगे, तो उसमें चुटकी भर पिसी हुई छोटी इलाइची और दस-बारह केसर के दाने डाल कर उबलने दें। पांच मिनट बाद अंगूठे और अंगुली के बीच रख कर देखें कि चाशनी मुलायम हो गई है, पर उसमें तार नहीं बन रहा है, तो आंच बंद कर दें। तार बनने का मतलब है कि जब अंगुली को उठाएं, तो उसमें मामूली खिंचाव हो और तार टूट जाए। चाशनी गाढ़ी होगी, तो मोहनथाल कड़ा हो जाएगा।

इसे हलवे की तरह हल्का नरम रखना है। इस चाशनी को भुने हुए बेसन में थोड़ा-थोड़ा करके डालते हुए अच्छी तरह मिला लें। जब चाशनी अच्छी तरह पूरे बेसन में मिल जाए तो इसे अलग थाली में निकाल कर फैला दें और ऊपर से मनचाहे मेवे डाल कर सजाएं। मोहनथाल या बेसन का हलवा तैयार है।

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