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दाना-पानी: कुछ नाश्ता कुछ खाना

इन दिनों खाने-पीने को लेकर लोगों का शौक काफी बढ़ा है। घूमने-फिरने से नए व्यंजनों की जानकारी बढ़ रही है, तो भोजन पकाने में प्रयोग करते रहने से नए-नए अनुभव हो रहे हैं। मगर भोजन पकाते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि जो हम बनाएं, उसका मूल स्वाद और पोषण बना रहे। इस बार जानते हैं कि कैसे कुछ लोकप्रिय व्यंजनों को पकाते समय सावधानी बरती जा सकती है।

दाना-पानी- स्वाद से भरपूर नूरानी कबाब और पालक पनीर।

मानस मनोहर

नूरानी कबाब
यह कुछ और नहीं, आग पर सेंक कर तैयार की गई एक प्रकार की टिक्की है। नूरानी कबाब दाल और सब्जियों के मेल से बनता है। इसे बनाने के कई तरीके हैं। कुछ लोग इसे सिर्फ दालों के मिश्रण से बनाते हैं, तो कुछ दाल और सब्जियों के मेल से। हम इसमें दाल, पनीर, सब्जियां और थोड़ा सोयाबीन डालेंगे। इससे इसका स्वाद गजब का आता है।

पहले इसमें डालने के लिए आधा कप चने की दाल को दो घंटे के लिए भिगो कर रख दें। फिर हल्का नमक डाल कर उसे नरम होने तक उबाल लें और सारा पानी निथार कर बेलन या कटोरी से दबा कर अच्छी तरह मसल लें। इसी तरह दस-बारह सोयाबीन बड़ियों को थोड़ी देर भिगो कर पांच-सात मिनट के लिए उबाल लें। जब थोड़ा ठंडा हो जाए, तो उसे हथेलियों में दबा कर सारा पानी निचोड़ें और ग्राइंडर में डाल कर दरदरा पीस लें। जितनी मात्रा दाल ली है, उतनी ही मात्रा पनीर की लें और उसे भी अच्छी तरह मसल या फिर कद्दूकस कर लें।

अब इसमें डालने के लिए कुछ सब्जियां बारीक-बारीक काट लें। इसमें प्याज, शिमला मिर्च, गाजर, पत्तागोभी जैसी सब्जियां काट कर डाल सकते हैं। इनकी मात्रा अपने स्वाद के अनुसार रखें। पर इतना जरूर ध्यान रखें कि सब्जियों की मात्रा इतनी अधिक न हो जाए कि बाकी सामग्री का पता ही न चले। इसलिए सही अनुपात यही है कि जितनी मात्रा पनीर, दाल और सोयाबीन की कुल मिला कर है, लगभग उतनी ही मात्रा कुल सब्जियों की रखें।

अब इन सारी चीजों को एक कटोरे में डालें, ऊपर से स्वाद के मुताबिक नमक, स्वाद के अनुसार बारीक कटी हरी मिर्च, थोड़ा अदरक, थोड़ा-सा गरम मसाला, थोड़ा लाल मिर्च पाउडर डालें और अच्छी तरह गूंथते हुए मिला लें।

अब कबाब बनाने के लिए बाजार में तीलियां आती हैं, उन्हें लें और उनके ऊपर इस मिश्रण को गोल रोल के आकार में लपेटें। तीलियां न मिलें, तो इनके बिना भी कबाब बनाए जा सकते हैं। तवे या पैन में सेंकने के लिए तीलियों की जरूरत नहीं होती। फिर इन्हें पकाने की बारी आती है। यों इसका पारंपरिक तरीका कोयले की आंच पर सेंक कर पकाने का है, पर शहरों में इसकी सुविधा नहीं होती। इसलिए इन्हें ओवन, ग्रिलर, तंदूर या कुछ नहीं तो तेल में तल कर भी पकाया जा सकता है। अगर आपके पास बड़ा नॉन स्टिक पैन है, तो उसमें भी इन्हें पकाया जा सकता है।
ग्रीलर या पैन को गरम करें, उसमें चारों ओर हल्का तेल चुपड़ें और फिर कबाबों के ऊपर चारों तरफ हल्का तेल चुपड़ने के बाद पैन में रखते जाएं। आंच मध्यम रखें। कबाबों को पलटते हुए हर तरफ से अच्छी तरह सुनहरा होने तक पका लें। अगर इसे तेल में तलना चाहते हैं, तो कबाबों को मैदा या फिर ब्रेड क्रम में अच्छी तरह लपेट लें, ताकि इनके फटने का डर बिल्कुल न रहे। कबाब गरमागरम खाने में ही स्वादिष्ट लगते हैं। इन्हें लच्छेदार कटे प्याज, नींबू और हरी चटनी के साथ परोसना अच्छा रहता है। इसके अलावा आपको जो चटनी पसंद हो, उसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

पालक पनीर सूखा
नीर इन दिनों भोजन में रईसी का पर्याय बन गया है। निस्संदेह इसमें पोषक तत्त्व भरपूर होते हैं। पर बहुत सारे लोग इसे पकाने में सावधानी नहीं बरतते और किसी भी चीज के साथ मिला कर पका लेते हैं। इस तरह न तो इसका स्वाद रह पाता है और न पोषण। इसलिए पनीर को उसके मूल स्वरूप में रखें, तो वह अपना स्वाद अच्छी तरह दे पाता है। यही हाल पालक का भी है। शहरों में हरी सब्जी के रूप में पालक का चलन खूब है। बेशक पालक में गुण बहुत होते हैं, खासकर लौह तत्त्व भरपूर होता है। पर पालक को सही तरीके से न पकाया जाए, तो उसका रंग और पोषण दोनों नष्ट हो जाते हैं। इसलिए इसे पकाते समय भी थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

पालक पनीर बनाने के लिए सबसे पहले पनीर को मनचाहे आकार में काट लें। उस पर हल्का नमक, चौथाई चम्मच हल्दी और आधा चम्मच कुटी लाल मिर्च डाल कर अच्छी तरह मिलाएं और इसे ढक कर अलग रख दें। अब पालक को तैयार करें। पालक के पत्तों को अच्छी तरह साफ करने और धोने के बाद उबलते पानी में डालें और एक से डेढ़ मिनट के लिए रखें। फिर उसे तुरंत छानें और दूसरे कटोरे में बर्फ के खूब सारे टुकड़े डाल कर रखे पानी में डाल दें। यानी एकदम गरम से उन्हें एकदम से ठंडा करना है।

इस तरह पालक का पकना बंद हो जाता है। इसे ब्लांच करना कहते हैं। इस तरह पालक का हरापन और पोषण बरकरार रहता है। बहुत सारे लोग पत्तों को देर तक उबालने के बाद पीस लेते हैं। इस तरह पालक का रंग हरा के बजाय कुछ-कुछ काला और बदरंग हो जाता है।

ब्लांच करने से उसका हरापन निखरता है। अब पालक के पत्तों को बारीक-बारीक काट लें या चॉपर में मोटा-मोटा पीस लें। अगर ग्राइंडर में पीसना चाहते हैं, तो बस दो-दो सेकंड के झटके देते हुए ग्राइंडर को दो-तीन बार चलाएं। बिल्कुल बारीक नहीं पीसना है। दरदरा, मोटा पीसना है।

अब कड़ाही में एक बड़ा चम्मच देसी घी या सरसों तेल गरम करें। उसमें साबुत धनिया, जीरा और एक साबुत लाल मिर्च का तड़का दें। उसमें पहले पिसा हुआ पालक और फिर पनीर डालें और थोड़ा-सा नमक डालें। नमक डालते समय सावधानी बरतें, क्योंकि पनीर में पहले भी थोड़ा नमक डाला था और पालक में भी कुछ नमक होता है, इसलिए थोड़ा कम ही नमक डालें।

इन्हें चलाते हुए थोड़ी तेज आंच पर पानी सूखने तक पकाएं। फिर ऊपर से तीन-चार काली मिर्च कूट कर डालें और मिला लें। पालक-पनीर सूखा तैयार है। आमतौर पर लोग पालक-पनीर में प्याज, लहसुन, अदरक, टमाटर डाल कर खूब मसालों का इस्तेमाल करते हैं। पर इससे पालक का पोषण और स्वाद खराब ही होता है। न डालें, तो अच्छा।

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