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दूसरी नजरः फ्रांस ने सम्मान जीता, क्रोएशिया ने दिल

फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में फ्रांस ने क्रोएशिया को चार-दो से हरा दिया और दोनों देश विजेताओं के रूप में उभरे। पूरा फ्रांस एक उन्मादी जीत के जश्न में डूबा है, तो क्रोएशिया गर्व और खुशी से सराबोर है।

Author July 22, 2018 2:05 AM
अगर फ्रांस से तुलना करें, तो उसके मुकाबले क्रोएशिया बहुत ही छोटा है। फ्रांस का क्षेत्रफल क्रोएशिया से दस गुना ज्यादा है।

फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में फ्रांस ने क्रोएशिया को चार-दो से हरा दिया और दोनों देश विजेताओं के रूप में उभरे। पूरा फ्रांस एक उन्मादी जीत के जश्न में डूबा है, तो क्रोएशिया गर्व और खुशी से सराबोर है। फ्रांस के बारे में हर कोई कुछ तो जानता ही है। यह एक औपनिवेशिक ताकत थी, यह एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र है, यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उन पांच सदस्य राष्ट्रों में से एक है जिन्हें वीटो का अधिकार है, नाटो और जी-7 में है, और इसके पास पेरिस और एफिल टॉवर है। क्रोएशिया के बारे में हम क्या जानते हैं? बहुत छोटा देश है। यह एक वक्त में युगोस्लाविया का हिस्सा हुआ करता था। लेकिन युगोस्लाविया का अस्तित्व तो रह नहीं गया है। यह क्रोएशिया, स्लोवेनिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, मोंटेनेग्रो, सर्बिया, कोसोवो और मैसेडोनिया में बंट गया।

अगर फ्रांस से तुलना करें, तो उसके मुकाबले क्रोएशिया बहुत ही छोटा है। फ्रांस का क्षेत्रफल क्रोएशिया से दस गुना ज्यादा है। फ्रांस की आबादी क्रोएशिया से पंद्रह गुना अधिक है। और यह बताने की तो जरूरत ही नहीं कि फ्रांस की जीडीपी क्रोएशिया की जीडीपी से पचास गुना बड़ी है। फ्रांस की जीडीपी दो हजार पांच सौ बयासी अरब अमेरिकी डॉलर की है, जबकि क्रोएशिया की मात्र पचपन अरब अमेरिकी डॉलर की। (सिर्फ कुछ दिन पहले ही भारत की सरकार को यह गौरव हासिल हुआ कि भारत की जीडीपी फ्रांस से भी आगे निकल गई है और अब हम दुनिया की छठी अर्थव्यवस्था बन गए हैं।)

क्या छोटे देश बड़े देशों से कोई मुकाबला कर सकते हैं? वे क्षेत्रफल, जनसंख्या या सैन्य शक्ति के मामले तो कभी मुकाबला नहीं कर सकते, लेकिन दूसरे उन पैमानों जो कि देश की जनता से सीधे जुड़े होते हैं, पर यह मुकाबला हो सकता है। किस तरह से क्रोएशिया की फ्रांस के साथ तुलना हो सकती है: देखें सारिणी।

                              फ्रांस – क्रोएशिया
जीवन प्रत्याशा (वर्षों में) 82- 78
शिशु मृत्यु दर पांच साल से नीचे
(प्रति एक हजार ) 4 – 5
प्रजनन दर 2.0 – 1.4
साक्षरता दर (प्रतिशत) 99 – 99
स्कूली शिक्षा के वर्ष 16.3 – 15.3
लैंगिक विकास सूचकांक 0.998 – 0.997
सकल पूंजी निर्माण (जीडीपी का प्रतिशत) 23 – 21
कुल निर्यात (जीडीपी का प्रतिशत) 30.9 – 51.3
कुल आयात (जीडीपी का प्रतिशत) 32.0 – 49.1
आवश्यक समय
कारोबार शुरू करने के लिए (दिनों में) 4 – 7
बिजली प्राप्त करने के लिए (दिनों में) 71 – 65
बेरोजगारी (कुल श्रम का प्रतिशत) 9.7 – 10.8

क्रोएशिया की आबादी इकतालीस लाख पच्चीस हजार सात सौ है- तकरीबन कानपुर के बराबर। इसकी प्रति व्यक्ति आय तेरह हजार दो सौ पिनच्यानवे अमेरिकी डॉलर है, जो कि इसे एक मध्य-आयवर्ग वाले देश की श्रेणी में रखती है। 1991 से 1995 के दौरान युद्ध के कारण यह तबाह हो चुका था। लेकिन यहां के लोगों ने अपनी कड़ी मेहनत से अपने को फिर से खड़ा कर लिया। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि क्रोएशिया पूरी तरह से वैश्वीकृत देश है। यहां जो विदेशी निवेश आता है, वह इसकी जीडीपी (या प्रति व्यक्ति पांच सौ अमेरिकी डॉलर) का चार फीसद है। क्रोएशियाई लोग लंबा जीवन जीते हैं, स्वस्थ हैं, कम बच्चे पैदा करते हैं, और अपनी सीमाओं में सुरक्षित हैं। क्रोएशिया के लोग इस बात को लेकर ज्यादा चिंतित या परेशान नहीं दिखते कि उनका देश काफी छोटा है।

दुनिया में एक सौ पिनच्यानवे देश हैं। इनमें से एक सौ बयासी देश ऐसे हैं जिनकी आबादी दस करोड़ से कम है। तकरीबन एक सौ सात देश ऐसे हैं जिनकी जनसंख्या एक करोड़ से भी कम है। छोटा भी बहुत सुंदर हो सकता है। छोटे देश ज्यादा खुशहाल और अमीर हो सकते हैं, इस मामले में कि उनके लोग अच्छी गुणवत्ता वाला जीवन जी रहे हैं- विश्वस्तर की फुटबॉल टीम दुनिया को दी। फाइनल तक पहुंचते हुए क्रोएशिया ने नाइजीरिया, अर्जेंटीना, आइसलैंड, डेन्मार्क, रूस और इंग्लैंड को हराया। दूसरे छोटे लेकिन खुशहाल देशों में आइसलैंड, ऑस्ट्रिया, नार्वे, स्वीडन और न्यूजीलैंड जैसे देश भी हैं।

बड़े देश (आकार और / या जनसंख्या) भी अपनी जनता को अच्छी गुणवत्ता वाला खुशहाल जीवन देकर अमीर बन सकते हैं। अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया इसके उदाहरण हैं, और अब चीन भी इस दिशा में बढ़ रहा है। ऐसा कोई भी एक मॉडल नहीं है जो सभी देशों पर लागू हो जाए। ऐसा भी कोई एक मॉडल नहीं है जो बड़े, संघीय राष्ट्र के संघटकों पर लागू किया जा सके। हमें एक ऐसा मॉडल बनाना है जो भारत जैसे विशाल देश के सभी विशिष्ट गुणों, जैसे- कई राज्य, कई नस्लें, कई धर्म, सैकड़ों भाषा-बोलियां, और विकास के विभिन्न स्तरों और विभिन्न विकास दरों वाले विभिन्न राज्य, को अपने में समायोजित कर ले।

एक संघीय राष्ट्र में इस तरह का मॉडल बनाया जा सकता है, जो कि इस तरह के कुछ मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित हो। जैसे-

विकेंद्रीकरण : पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार ने इतनी ज्यादा शक्तियां हथिया ली हैं कि राज्यों के पास स्वायत्तता के नाम पर कुछ भी बचा नहीं रह गया है और संसाधन भी बचे-खुचे रह गए हैं। आज सबसे पहली जरूरत विधायी शक्तियों के संवैधानिक वितरण के सम्मान की होनी चाहिए। राज्यों के लिए सातवीं अनुसूची की सूची दो है, सूची तीन भी राज्यों के लिए होनी चाहिए। हालांकि अब वक्त आ चुका है जब केंद्र को सूची तीन से समवर्ती सूची वाला शीर्षक हटा लेना चाहिए और इनसे जुड़े मामलों पर राज्यों को कानून बनाने की इजाजत दे देनी चाहिए।

प्राकृतिक संसाधन : केंद्र सरकार को चाहिए कि वह प्राकृतिक संसाधनों जैसे- कोयला, खनिज आदि का नियंत्रण राज्यों को सौंप दे। ऐसे में हर राज्य अपने प्राकृतिक संसाधनों के नफे-नुकसान का आकलन खुद कर सकेगा और दूसरे राज्यों से प्रतिस्पर्धा के तरीके खोजेगा। इस तरह की प्रतिस्पर्धा से सारे राज्यों को फायदा होगा।

वित्तीय संसाधन : वर्तमान में, राज्यों की ओर धन संबंधी मांग में कमी आ गई है। इस स्थिति की पूरी तरह से जांच और मरम्मत होनी चाहिए। दो ऐसे प्रमुख कर हैं जो राजस्व का बड़ा हिस्सा बनाते हैं। ये आय कर (कॉरपोरेट कर सहित) और जीएसटी हैं। जीएसटी जैसे मामले में केंद्र और राज्यों- दोनों को आमद पर आय कर (कॉरपोरेट कर सहित) उगाही का अधिकार होना चाहिए।

स्वायत्तता : शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और स्वास्थ्य बीमा, समर्थन मूल्यों, फसल बीमा, कल्याण योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा जैसे मामलों पर राज्यों को पूरा अधिकार दिया जाना चाहिए ताकि वे अपनी नीतियां और कार्यक्रम खुद बना सकें। इससे होगा यह कि जो काम केंद्र सरकार अभी कर रही है, कई राज्य उससे भी ज्यादा अच्छा काम कर सकेंगे। यह कायापलट करने वाला सुधार होगा। और तब हम भी विश्व कर फुटबॉल टीम का सपना देख सकते हैं।

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