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बाखबरः दिल्ली दर्प दलन

एक देसी टीका ‘एक्सपर्ट’ लगभग रो रहा था और हमारे कुछ एंकर टीका विज्ञानी बन कर तरह-तरह के सवाल तरह-तरह के विशेषज्ञों से उठवा रहे थे और खेद की बात कि सरकार का एक भी बंदा देसी के पक्ष में न दहाड़ा! न कोई एंकर दहाड़ा!

Coronavirus, COVID-19 Vaccine, India Newsपश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ICMR-NICED की Covaxin ट्रायल साइट पर काम करते हुए वैज्ञानिक। (फोटोः पीटीआई)

फाइजर वाला आया तो खुश। मॉडर्ना वाला आया तो खुश, लेकिन जैसे ही नए साल के पहले दिन कोरोना के दो देसी टीके ‘कोवैक्सीन’ और ‘कोविशील्ड’ के आने की खबर ‘ब्रेक’ हुई, वैसे ही दिलजलों के दिल जलने लगे। लपटें उठने लगीं। कम से कम दो ज्ञानी चैनलों में लटक दस ज्ञानियों ने देसी टीके का ऐसा ‘रिट्रायल’ कराया कि ‘कोवैक्सीन’ टीका बनाने वाले ‘भारत बायोटेक’ के चीफ कृष्णा ऐल्ला को मीडिया के पूर्वाग्रह को आड़े हाथों लेना पड़ा और प्रत्यारोप लगाने पड़े कि किस तरह दुनिया का टीका माफिया और मीडिया माफिया देसी टीके के मूल्यांकन को लेकर बेहद सेलेक्टिव हैं, कि विदेशों में बना टीका ‘पूरा’ है और हमारा बनाया टीका अधूरा है, क्योंकि तीसरे परीक्षण का आंकड़ा अभी आना है।

फिर उनने पूछा कि दुनिया के किसी भी टीके के थर्ड ट्रायल का डाटा अभी तक नहीं आया, तब उन्हीं के टीके से सवाल क्यों? उनका सैंपल जरा-सा और हमारा सैंपल चौबीस हजार का, टीका बनाने का हमारा अनुभव दुनिया में सबसे अधिक और फिर भी हम करें तो नकली, वो करें तो असली… धिक्कार है।

एक देसी टीका ‘एक्सपर्ट’ लगभग रो रहा था और हमारे कुछ एंकर टीका विज्ञानी बन कर तरह-तरह के सवाल तरह-तरह के विशेषज्ञों से उठवा रहे थे और खेद की बात कि सरकार का एक भी बंदा देसी के पक्ष में न दहाड़ा! न कोई एंकर दहाड़ा! सिर्फ डब्ल्यूएचओ के मुखिया टेडरास ने टीके के लिए भारत को शाबाशी दी।

तो भी, अपने वाले छोटे-छोटे ट्रंप कहां मानने वाले? एक बोले : ये बीजेपी का टीका है, हम नहीं लगवाएंगे। जब हमारी सरकार बनेगी तो सबको फ्री लगवाएंगे! दूसरे ट्रंप जी फरमाए कि ऐसी जल्दबाजी क्या थी? तीसरे ट्रंप जी बोले कि पहले पीएम लगवाएं, फिर हम लगवाएंगे। चौथे मर्दवादी ट्रंप जी बोले कि यह टीका नपुंसक बना सकता है। पांचवें जी कहने लगे कि टीके में सूअर-गाय की चर्बी है…
काश! एक टीका अक्ल का भी होता।

बुधवार की शाम एक किसान नेता ने धमकाया और चैनलों ने भी उसे विनम्र धमकी की तरह ही दिखाया कि सात जनवरी को दिल्ली के चारों बार्डरों पर साठ हजार ट्रैक्टर दिल्ली को कूच करेंगे और यह तो सिर्फ ट्रेलर होगा और अगर सरकार ने कानून वापस न लिए तो बाकी की फिल्म 26 जनवरी को रिलीज करेंगे। उस दिन दिल्ली में ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर होंगे…

वृहस्पतिवार की सुबह किसान कथा आगे बढ़ती दिखी। खबर चैनलों के कैमरे दिल्ली के चारों बार्डरों पर तैनात रहे! चारों पर ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर रहे! लगा कि ट्रैक्टरों ने दिल्ली को घेर लिया है! एक ट्रैक्टर पर बैठी एक चैनल की रिपोर्टर रिपोर्ट किए जा रही थी कि कोई तीस किलोमीटर तक ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर हैं।

लेकिन एक चैनल ने लाइन लिख कर बताया कि कुल तीन हजार ट्रैक्टर थे! फिर भी एक किसान नेता ने धमकाया : यह तो सिर्फ ट्रेलर है। 26 जनवरी को दिल्ली में निकालेंगे ट्रैक्टर मार्च। किसानों की भाषा ऊपर से विनम्र, अंदर से हठीली है। कोई कोई तो सीधे कह देता है कि दिल्ली को होश में लाना है। यानी एजंडा है : दिल्ली दर्प दलन!

कट टू वाशिंगटन में राष्ट्रपति भवन : ‘वाइट हाउस’ उर्फ ‘कैपिटल हिल’ पर हमला लगा जैसे अपने चैनल 2013 में हॉलीवुड की रोलैंड एमेरिक निर्देशित फिल्म ‘वाइट हाउस डाउन’ का ट्रेलर दिखा रहे हैं। वही वाइट हाउस। उसी तरह के आतंकवादी वाइट हाउस पर कब्जा करते हुए। वैसी ही तोड़-फोड़। वैसी ही धांय-धांय चलती गोलियां और इन हमलावरों के आगे एकदम गैर-तैयार पुलिस। अमेरिकी खबर चैनलों के वही गर्जन-तर्जन भरे लाइव टुकड़े। वैसे ही फाइट सीन जैसे कि ‘वाइट हाउस डाउन’ में दिखाए जाते हैं।

अमेरिका गिर रहा है। जनतंत्र गिर रहा है। इसे देख कई ज्ञानी अपने चैनलों पर खुशी से गिरते नजर आते हैं, लेकिन कुछ एंकर और नेता ‘वाइट हाउस डाउन टू’ के सीनों को गंभीरता से लिए बिना नहीं माने और- दुनिया के जनतंत्रों को खतरा खतरा- गाते रहे और ट्रंप की तरह अपने-अपने ‘प्राउड बॉयज’ का हौसला बढ़ाते रहे कि शाब्बाश! बहुत खूब! अब घर जाओ, वहां कोई इंतजार कर रहा है!

एक दिन खबर हुई कि सौरभ गांगुली अचानक दिल के मरीज होकर अस्पताल में भर्ती! और इसी के साथ खबर आई कि दिल को तंदरुस्त रखने वाले जिस खाद्य तेल का वे विज्ञापन करते थे, उस तेल की कंपनी ने वह विज्ञापन ही रुकवा दिया है। अब इस बीच में बदायूं में एक महिला के साथ गैंग रेप और उसकी हत्या पर महिला आयोग की एक विदुषी ने कह दिया कि महिला अगर अपने साथ किसी बच्चे को लेकर निकलती, तो शायद ऐसा न होता। इसे सुनते ही स्त्रीत्ववादिनियों ने उनकी ऐसी कुटाई की कि उनको अपना महान विचार वापस लेना पड़ा!

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