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बाखबर: वह अपराधी तो नहीं!

उस सुबह की गिरफ्तारी के दृश्य देख कर एक मन कहता कि ‘अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे’ तो दूसरा कहता कि जी नहीं! यह एक दुर्दमनीय एंकर पर एक दुर्दमनीय सत्ता की ‘अति’ है। एंकर दुर्दमनीय जरूर सही, अपराधी नहीं है!

Republic TV Editorरिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने गिरफ्तारी के बाद पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया था। (वीडियो स्क्रीनशॉट)

एक सुबह एक चैनल के नामी एंकर के घर को पुलिस घेर लेती है। उसमें एक दर्जन पुलिस ड्राइंगरूम में एंकर को घेर कर खड़ी दिखती है। अपने को कभी ‘राष्ट्र’, कभी ‘देश’, कभी ‘एक सौ तीस करोड़ जनता’ बताने वाला, प्राइम टाइम में रोज एकतरफा मुकदमा चला कर सजा देने वाला, अपने को नंबर वन बताने वाला हेकड़ एंकर इस दयनीय स्थिति को प्राप्त होगा, यह उसकी कल्पना से भी परे रहा होगा।

इसीलिए पुलिस को देख वह हतप्रभ दिखता है : पुलिस उसे गिरफ्तार करने आई है। वह उसका हाथ पकड़ कर थाने ले जाना चाहती है, लेकिन उनसे हाथ छुड़ा कर वह सोफे पर फैल जाता है। पुलिस बार-बार कहती है : आप शांतिपूर्वक थाने चलें, लेकिन एंकर चीखने लगता है कि ये क्या कर रहे हैं आप? एक नंबर वन चैनल के इक्जीक्यूटिव के साथ आप ऐसा नहीं कर सकते। एक ‘वाइट कालर’ के साथ आप ऐसी बदतमीजी नहीं कर सकते। देश देख रहा है। राष्ट्र देख रहा है।

एंकर की पत्नी तेज आवाज में पुलिस को चेतावनी देती हुई चीखती है कि ‘यू आर लाइव’ ‘यू आर लाइव’ यानी कि तुम जो कर रहे हो वह सीधा प्रसारित हो रहा है, लेकिन पुलिस वालों को ‘लाइव’ की परवाह नहीं। वे बार-बार एंकर को थाने चलने को कहते हैं। मगर वह फिर चीखने लगता है कि इन्होंने मुझे मारा। मेरे सास-ससुर से मिलने नहीं दे रहे। मेरे बेटे को मारा। मेरी पत्नी को मारा… एक अफसर कहता है कि हमने ऐसा कुछ नहीं किया है। आप थाने साथ चलें। हम आत्महत्या के लिए उकसाने के एक पुराने मामले में आपको गिरफ्तार कर रहे हैं।

एंकर मास्क लगाए है और ‘यू आर लाइव’ ‘यू आर लाइव’ की धमकी देती पत्नी भी। वह सोफे पर बैठी एक कागज पर कुछ लिखने लगती है कि पुलिसवाली मना करती है, तो वह उसे फाड़ देती है। दृश्य में गहरी सनसनी है।
कोई बारह मिनट तक ‘यू आर लाइव’ और ‘मुझे मारा’ होता रहता है। अंत में पुलिस एंकर को पकड़ कर ले चलती है। लिफ्ट से नीचे लाती है और कैदियों की वैन में बिठा देती है। वैन चल देती है। उसके चैनल के रिपोर्टर पुलिस की ज्यादतियों के बारे में बोलते रहते हैं कि किस तरह उनको घर के अंदर नहीं जाने दिया जा रहा… कि यह आपातकाल से भी बदतर है। यह फासिज्म है… वैन में सारे रास्ते वह कहता जाता है कि उसे मारा है, उसके बेटे को मारा है, साथ ही विजय का निशान दिखाता जाता है।

अफसोस कि अन्य कोई चैनल इस गिरफ्तारी की खबर तक नहीं देता। वे सब तो अमेरिकी चुनाव के परिणामों का विश्लेषण करने में व्यस्त हैं। यों भी गलाकाट स्पर्धा और ईर्ष्या-द्वेष के मारे चैनल एंकर उसकी खबर क्यों दें, जो उन्हीं को गरियाता था।
सिर्फ एक स्पर्धी एंकर गिरफ्तारी की खबर देता है, लेकिन वह भी आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले को प्रमुखता से देता है कि किस तरह अन्वय नाइक के साथ एंकर के चैनल का इंटीरियर करने का करार हुआ था और किस तरह उसे अस्सी लाख रुपए का भुगतान नहीं दिया गया, जिसकी वजह से उसे और उसकी मां को आत्महत्या करनी पड़ी और उन्होंने ‘सुसाइड नोट’ में एंकर समेत तीन के नाम दिए और फिर किस तरह कुछ दिन बाद इस मामले को किसी ‘दबाव’ में ‘बंद’ कर दिया गया। वही मामला फिर से खोला गया है!

फिलहाल एंकर चौदह दिन की हिरासत में अंदर है। उसकी जमानत की याचिका पर मंगल को विचार होना है! अगली सुबह चैनल के रिपोर्टर ‘एंकर के लिए न्याय’, ‘न्याय के लिए ग्लोबल आंदोलन’ ‘फासिज्म मुर्दाबाद’ आदि दिखाते रहे। चंद लोगों की भीड़ को चैनल के कैमरे ‘जन आंदोलन’ की तरह दिखाते रहे। कुछ बाबा लोग, भाजपा के दर्जनाधिक केंद्रीय मंत्री, कुछ सीएम, कुछ वकील, कुछ पैनलिस्ट एंकर के पक्ष में और ‘बदले की कार्रवाई’ की निंदा करते दिखते रहे।

एक दिन बाद एडीटर्स गिल्ड ने गिरफ्तारी के तरीके की निंदा की, लेकिन अफसोस कि इस चैनल के हिंदी चैनल को छोड़ अन्य किसी भी चैनल ने इस एंकर और चैनल का साथ नहीं दिया।

सबके पास अमेरिकी चुनावों के परिणामों के विश्लेषण रहे। बकिया समय में बिहार का चुनाव-अभियान रहा और बंगाल में चुनाव का बिगुल बजाने वाले अमित शाह द्वारा बंगाल को जीतने के दावे रहे!

उस सुबह की गिरफ्तारी के दृश्य देख कर एक मन कहता कि ‘अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे’ तो दूसरा कहता कि जी नहीं! यह एक दुर्दमनीय एंकर पर एक दुर्दमनीय सत्ता की ‘अति’ है। एंकर दुर्दमनीय जरूर सही, अपराधी नहीं है!
एक ओर परम खुंदकी एंकर, दूसरी ओर उतनी ही खुंदकी टुच्ची सत्ता! दोनों की ‘आखेटलीला’ देख हमें तो बिहारी का वह दोहा याद आता है, जो नसीहत देता है कि :
‘स्वारथ, स्वकृत, न स्रम वृथा, देख बिहंग बिचार
बाज, पराए पानि पर, तू पंछीहिं न मार!’

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