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बाखबर: खबर लपकने के दौर में

जब भी कर्नाटक की खबर आती है, चैनल सीधे सरकार हिलाने लगते हैं। भाजपा हिलाए समझ में आती है लेकिन एंकर भी हिलाएं, यह समझ से बाहर है। क्या कुछ एंकरों ने कर्नाटक सरकार को हिलाने की सुपारी ली है?

Author Published on: January 20, 2019 3:43 AM
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (फोटो सोर्स : Indian Express)

एक दिन अखिलेश यादव ने बड़े दिलवाला होकर बड़ी खबर बनाई। जयंत चौधरी को पहले दो सीटें दी थीं, फिर एक और दी और फिर एक चैनल ने दिखाया कि एक और दे दी! यानी कि भाजपा से लड़ने के लिए अखिलेश कुछ भी करेंगे! राहुल बोले कि उनने सब सीटें बांट लीं। अब हम अस्सी पर लड़ेंगे, नतीजे चौंकाने वाले होंगे! इसी बीच मायावती का जन्मदिन मना। बहुत बड़ा केक कटा। लोग हाथ से ही काट-काट कर खाते दिखे! एक चैनल ने जन्मदिन पर पुराने तरीके की चुटकी लेनी चाही, लेकिन कोशिश बेकार रही! यह मजाक का सीजन नहीं है प्यारे!

न्यूज एक्स में ‘द हिंदू लिटफेस्ट’ का एक अंग्रेजी लेखक रो रहा था कि भविष्य में कोई आए या जाए, ‘जनविमर्श’ का जितना नुकसान हो चुका है उसका इलाज मुश्किल है। हिंदू का संपादक बोला : मैं रोज ट्विटर देखता हूं कि आज कितनी गाली पड़ी और फिर काम में लग जाता हूं। सही है : छमा बड़न को चाहिए छोटन को उत्पात! कोई तीन बरस बाद, पुलिस ने कन्हैया कुमार आदि के खिलाफ ‘देशद्रोह’ का आरोप लगाते हुए बारह सौ पेज की चार्जशीट दाखिल कर डाली!

इधर चार्जशीट आई, उधर कई एंकर बढ़-बढ़ कर हाथ लगाने लगे। चैनल उन टेपों को बार-बार दिखाने लगे, जिनमें जेएनयू में आजादी के नारे लगाते लड़के दिखते थे। चर्चाकार बाल की खाल निकालने लगे कि ये टेप असली हैं कि नकली? पक्षकार बोले के फारेंसिक लैब ने उनको ‘असली’ कहा है। एक चैनल पर एक एंकर बार-बार टेप दिखाता, हम भी देखते, लेकिन कन्हैया का चेहरा नजर नहीं आता था। हां ‘आजादी आजादी’ के नारे जरूर सुनाई पड़ते थे।कन्हैया खबर में आए तो चैनल लपके। उनके निर्भीक उत्तर प्रभावित करने वाले रहे। एक सवाल अटका रहा कि यह सब चुनाव के कुछ महीने पहले ही क्यों हो रहा है? इस बार जेएनयू वाले अधिक आश्वस्त नजर आए। एक चेहरा किलक कर कह रहा था कि कुछ साबित नहीं होगा। बस उन्नीस के चुनाव की बात है!
लेकिन कुछ एंकर और देशभक्तों ने मिल कर ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ के ‘टुकड़े टुकड़े’ कर दिए।
कौन कहता है कि ‘वीर विहीन मही मैं जानी’!

एक जज ने ताजा ताजा मिली बड़ी नियुक्ति ठुकरा दी! इसे कहते हैं त्याग! लेकिन राजनीतिक दिलजले फिर भी कहते रहे कि यह तो वफादारी का इनाम था!
इसी बीच कर्नाटक से खबर आई कि बीजेपी, कांग्रेस के विधायकों की ‘पोचिंग’ कर रही है, कि खबर आई कि दो विधायक टूट गए हैं। कुमार स्वामी की सरकार अब गई कि अब गई। फिर खबर आई कि कांग्रेस की पोचिंग के डर से बीजेपी के विधायक हरियाणा के मानेसर के पांच सितारा में लाए गए हैं। फिर एक चैनल ने खबर दी कि कर्नाटक की सरकार बच गई। जो बाहर जाने वाले थे वे लौट कर आ गए! जब भी कर्नाटक की खबर आती है, चैनल सीधे सरकार हिलाने लगते हैं। भाजपा हिलाए समझ में आती है लेकिन एंकर भी हिलाएं, यह समझ से बाहर है। क्या कुछ एंकरों ने कर्नाटक सरकार को हिलाने की सुपारी ली है? कि इस बीच स्वनामधन्य ‘कोटलर सम्मान’ ने एक बड़ी कॉमिक खबर बनाई। एक एंकर हंसते हुए कहती रहीं कि पता नहीं यह सम्मान ‘सम्मान’ है भी कि नहीं, कि ये कैसा सम्मान है कि निर्णायक मंडल के नाम तक नहीं हैं, कि कहते हैं कि यह तो उनको ही मिलता है, जो इसे स्पांसर करते हैं…। ये मुए निंदक क्या जानें कि अगर कोई ‘दाता’ किसी को ‘सम्मान’ देता है तो ‘पाता’ को उसे धन्यवाद सहित ग्रहण करना चाहिए! सम्मान मिलना तो गर्व का विषय होता है। यही भारतीय परंपरा है। कहा भी है : ‘दान की बछिया के दांत नहीं देखे जाते!’

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