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बाखबरः आगे आगे देखिए होता है क्या

दिल्ली देहरादून मार्ग पर तीन-चार रोज तक कांवड़ियों का ही राज रहा। जब यूपी के आला पुलिस अफसर कावड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा करते हों, तब कांवड़िए तांडव क्यों न करें?

Author August 12, 2018 5:05 AM
जब यूपी के आला पुलिस अफसर कावड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा करते हों, तब कांवड़िए तांडव क्यों न करें?

करुणानिधि गुजरे तो ‘कलाइनर’ का अर्थ एक चैनल ने समझाया कि ‘कलाइनर’ का मतलब है बड़ा कलाकार! पहले कावेरी अस्पताल, फिर चिंता के क्षण, कभी तबियत बेहतर, कभी नाजुक, फिर पार्थिव शरीर राजाजी हॉल में, फिर मरीना पर स्मारक की मांग और सरकारी अड़चन, फिर आधी रात अदालत की सुनवाई और फिर मरीना बीच में अपने गुरु अन्नादुरै के पास। ये है कलाकार का मरना! कुछ तो भीड़ थी ही। बकिया चैनल बनाए जा रहे थे। एक चैनल ईपीएस-ओपीएस सरकार की धुनाई में लगा था। एक डीएमके हवाले से संघ और भाजपा को कोसे जा रहा था। शोक में भी हिसाब-किताब चल रहा था। एक चैनल पर एक करुणा भक्त ने आवाज लगाई : कलाइनर को ‘भारत रत्न’ दिया जाय!

वह तो अदालत ने बचा लिया- ऐसा बताते हुए एक एंकर ने राहत की सांस ली। एक चैनल बताता रहा : चौरानबे साल के करुणा ने डेढ़ सौ किताबें लिखीं, नब्बे पटकथाएं लिखीं और संघवाद की लाज रखी।… अगले रोज पीएम ने आकर श्रद्धंजलि दी। फिर राहुल देते दिखे। फिर अखिलेश दिखे, तेजस्वी दिखे और चैनल श्रद्धांजलि भूल कर महागठबंधन पर पिल पड़े। कई चैनलों को महागठबंधन का ‘फोबिया’ है। इस सप्ताह दो चैनलों में दो लोमहर्षक ‘स्टिंग’ दिखे। एनडीटीवी के श्रीनिवासन जैन ने राकेश सिसोदिया द्वारा हापुड़ लिंचिंग की आत्मस्वीकृति वाला टेप सुनवाया। वह बिना बाजू की बनियान पहने सगर्व बताता जाता था कि ‘वे गाय काट रहे थे, हमने उसको काट दिया।… कासिम ने पानी मांगा तो मैंने कहा तुझे पानी का कोई हक नहीं।… मैं हजारों को काटने के लिए तैयार हूं और हजार बार जेल जाने के लिए तैयार हूं।… जब ‘बेल’ मिली तो हजारों लोगों ने जिंदाबाद के नारे लगा कर स्वागत किया।…’

कितनी निर्भीक थी उसकी गर्वीली हिंसक जिघांसा? एक पूर्व पुलिस अफसर बोला : इस हलफनामे को देख अदालत को इसकी ‘बेल’ रद्द कर देनी चाहिए। जमानत रद्द हो न हो, उससे क्या फर्क पड़ता है? वह जानता है कि वह नया हीरो है? बने रहें उसके बचाने वाले! एक और लोमहर्षक स्टिंग ‘इंडिया टुडे’ पर ‘एनकाउंटर आॅन सेल इन यूपी’ नाम से राजदीप ने दिखाया। यूपी पुलिस के दो सब इंस्पेक्टरों ने ‘स्टिंग’ में यूपी ‘एनकाउंटरों’ की असली कथा बताई। एक कहता था ‘पहले पकड़ेंगे, फिर प्लान बनाएंगे कि कैसे एनकांउटर करना है।’ इसमें पांच-छह लाख रुपए लगते हैं। सब सीके्रट रखा जाता है। दूसरे सब इंसपेक्टर ने रेट बढ़ा कर बोला कि फेक एनकाउंटर का रेट आठ लाख है।…

वो गऊ-वीर थे और ये थे एनकांउटर-वीर! हम धन्य कि एक ही रोज दोनों के दर्शन हुए। इंस्पेक्टर तो सस्पेंड हो गए, लेकिन दूसरे वीर का क्या हुआ, पता नहीं। बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह बलात्कार कांड को लेकर लगभग हर चैनल नीतीश सरकार को कठघरे में खड़ा करता रहा और विपक्ष मंत्री मंजु वर्मा का इस्तीफा मांगता रहा। भाजपा के सीपी ठाकुर तक ने मंत्री का इस्तीफा मांगा, लेकिन वाह रे सीएम नीतीश जी! कई दिन तक दम साधे रहे और फिर कुछ नीति वाक्य बोले। मंजु जी बाहर हुर्इं, लेकिन कहा यही कि अपने आप हटी हैं। एंकर बोले, वे मीडिया के दबाव से हटी हैं।

इसके बाद तो यूपी के देवरिया, फिर हरदोई में एनजीओ नाम से चलने वाले बालिका आश्रय स्थलों में बच्चियों की ‘सेक्स-सेल’ के किस्सों ने लाइन लगा दी। एक से एक ‘सेक्स-सेल-टेप’ सामने आने लगे। देवरिया सेक्स सेल की आरोपित गिरिजा त्रिपाठी और सत्ता की गहरी मिलीभगत जगजाहिर हुई। यूपी सरकार का एक मंत्री और एसडीएम गिरिजा के साथ डांस करते दिखे। टाइम्स नाउ ने सेक्स की सप्लाई चेन का सप्रमाण खुलासा किया। सात बच्चियों को पुलिसवाले ले गए! हरदोई के किस्से अभी खुलने हैं। योगी सरकार ने तुरंत कुछ अधिकारी निलंबित कर और सीबीआई को जांच का काम सौंप कर, ऐन टाइम पर सरकार की छवि के ‘डैमेज’ को ‘मैनेज’ किया। इस मामले में वे नीतीश से ज्यादा तेज नजर आए।

ऐसी कहानियों के बाद आजकल टाइम्स नाउ ‘डिस्क्लेमर’ देना नहीं भूलता कि इसमें व्यक्त विचार चैनल के नहीं हैं। अच्छी पत्रकारिता की नजर से यह एकदम उचित है। सावन के महीने में सबसे श्रद्धास्पद दृश्य दिए कांवड़ियों ने। दिल्ली के शास्त्री नगर के पास एक कार एक कांवड़िए से क्या छू गई कि वे फैल गए और देर तक उस कार पर लठ्ठ बरसाते रहे। दो पुलिस वाले उनको लठ्ठ बरसाते ऐसे देखते रहे मानो किसी फिल्म की शूटिंग चल रही हो। कई एंकर इसे दिखा-दिखा कर चिल्लाते रहे कि पुलिस तमाशा देख रही है। और क्या करती हमारी पुलिस, इन दिनों के भक्त तो भगवान से भी बड़े हैं।

दिल्ली देहरादून मार्ग पर तीन-चार रोज तक कांवड़ियों का ही राज रहा। जब यूपी के आला पुलिस अफसर कावड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा करते हों, तब कांवड़िए तांडव क्यों न करें? राज्यसभा उपाध्यक्ष के चुनाव में हरिवंश जीते, तो टाइम्स नाउ ने उसे सीधे 2019 से जोड़ कर लाइन दी : 2019 से पहले एनडीए का हौसला बढ़ा! महागठबंधन राज्यसभा में फेल! जो 122 सीट नहीं ले सके वे 122 करोड़ पर नजर लगाए बैठे हैं! हाय! इंडिया टुडे ने बताया कि राजे सरकार ने तीन गांवों के इस्लामी नामों को बदल कर उनको हिंदू नाम दिए। हम तो इतना ही कहेंगे :

‘इब्तिदा ए इश्क है रोता है क्या
आगे आगे देखिए होता है क्या!’

 

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