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बाखबरः कौन हारा कौन जीता

प्रणब मुखर्जी का संघ के कार्यक्रम में जाने को हां कहना कई चैनलों में कांग्रेस की कुटाई का बहाना बनता रहा। कांग्रेस भी कुटती रही। सेक्युलरवाद कुटता रहा। संघ का एक विचारक संघ के इस नायाब ‘उदारवाद’ पर इतराता रहा।

Author June 3, 2018 04:36 am
कैराना से RLD की विजयी उम्मीदवार तबस्सुम हसन। (फोटो-पीटीआई)

जब कन्फ्यूजन नहीं, कमिटमेंट वाली सरकार चलती है तब तेज विकास होता है… अपने आप को बचाने के लिए विपक्षी एक हो रहे हैं, जनता सब कुछ जानती है…एबीपी पर कटक से वह भाषण एकदम लाइव और लवली लवली था। दो हजार बाईस तक सबको घर दिए जा रहे थे। एक मंत्री जी इंडिया टुडे और दूसरे मंत्री जी मिरर नाउ पर अपनी चार साला उपलब्धियों की सूची लिए बैठे थे। एनडीटीवी पर भी एक मंत्री जी लाइन दे रहे थे कि इस देश को स्कैम फ्री सरकार दी है! इसी बीच ट्रेन से मालदा जाते एक युवक से एक देशभक्त समूह सामान्य ज्ञान के सवाल करने लगा कि देश के प्रधानमंत्री का नाम बताओ? वह हकला कर बोला : ममता, फिर डर कर बोला ‘मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूं’। देशभक्तों ने कहा कि ‘जन मन गण’ गाओ, फिर कहा बोलो ‘भारत माता की जय’ ‘वंदेमातरम’। मोमिन घबरा गया, तो वे उसे पीटते हुए कहने लगे : देश में रहते हो, इतना भी नहीं जानते…

कट टू मिरर नाउ : एंकर फे डिसूजा चार साल में भ्रष्टाचार मुक्त भारत से कहने लगीं कि सर जी जब भी मैं किसी चुंगी या रजिस्ट्रार के दफ्तर में जाती हूं, तो मालूम पड़ता है कि ऐसा कुछ भी नहीं है। एनडीटीवी की एंकर ‘बिग ब्रदर’ के एनालिटिक टूल के टेंडर को लेकर परेशान थी कि इससे सरकार सबके ईमेल खंगाल सकेगी। इसे लोगों को इच्छित दिशा में हांकने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एक प्रवक्ता बोला कि यह जनता में राष्ट्रवाद की भावना भरने के लिए है। आपकी सरकार है। आपको बेहतर सेवा देने की खातिर यह सब जरूरी है। कांग्रेसी प्रवक्ता कहता रहा, यह सबकी जासूसी करने वाली ‘ऑरवेलियन स्टेट’ बनाने की साजिश है!

टाइम्स नाउ सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले को दिन भर बजाता रहा कि मरने से पहले सुनंदा के आखिरी ईमेल कि ‘अब मैं जीना नहीं चाहती’ का संज्ञान लिया जाना चाहिए। दूसरा चैनल, नए फुटेज दिन भर दिखा कर तरुण तेजपाल पर बयान बदलने के आरोप लगाता रहा। टाइम्स नाउ के एंकर ने एमपी में बजरंग दल के राइफल चलाने की ट्रेनिंग के फुटेज को कुछ इस तरह पेश किया कि बजरंग दल का नेता देश के रक्षक की तरह प्रकट हुआ लगा : ‘हम देश-विरोधी ताकतों से निपटने के लिए तैयार कर रहे हैं जेएनयू के टुकड़े गैंग, लव जिहादी, गोकशी करने वालों से देश को बचाने के लिए हम तैयार हैं… एंकर की आलोचना उसे शर्मिंदा न कर सकी।

इतने में उपचुनावों का दिन आ गया और सुबह से कुछ ईवीएम मशीनों की खराबी की रिपोर्टें आने लगीं। चार संसदीय और बारह विधानसभा सीटों के उपचुनावों की खबरें सर्वत्र दिन भर लाइव होती रहीं। इस बीच पुष्कर के एक पुजारी की सार्वजनिक पिटाई दिखी (मिरर नाउ)। न्यूज एक्स ने बताया कि एक हिंदू संगठन की मांग है कि नोटों पर गांधी की जगह वीर सावरकर के चित्र होने चाहिए! ऐसी ‘टहोकेवादी’ खबरें जनता को इच्छित दिशा में उकसाने के लिए बनाई जाती हैं। प्रणब मुखर्जी का संघ के कार्यक्रम में जाने को हां कहना कई चैनलों में कांग्रेस की कुटाई का बहाना बनता रहा। कांग्रेस भी कुटती रही। सेक्युलरवाद कुटता रहा। संघ का एक विचारक संघ के इस नायाब ‘उदारवाद’ पर इतराता रहा।

उचित अवसर देख हरियाणा के एक मंत्री जी बोल उठे : संघ की ट्रेनिंग सबके लिए अनिवार्य कर देनी चाहिए। इस बीच विकास की खातिर पेट्रोल-डीजल के दाम अपना विकास करते रहे। सत्रह दिन में सत्रह बार विकास किया। सिर्फ चैनल रहे, जो आए दिन सरकार की तेल की दाम नीति को कूटते रहे। बार-बार कहते रहे कि दुनिया में तेल सस्ता है, तो अपने यहां सत्रह दिन में चैरासी रुपए लीटर तक कैसे पहुंच गया। चैनलों की हाय हाय को देख एक दिन सरकार दयालु हुई, तो खबर दी कि साठ पैसे कम करेंगे, लेकिन किया सिर्फ एक पैसा कम! ऐसो को उदार जग माहीं! कितनी रहम दिल है हमारे सरकार! एक मंत्री बोले कि सब विकास की खातिर किया जा रहा है! एक ने टिप्प्णी की : ये है एक पैसे की सरकार!

लेकिन वृहस्पतिवार को ‘मोदी बरक्स गठजोड़’ वाले उपचुनावों के लाइव नतीजों ने भाजपा को वो धोबीपाट दिया कि प्रवक्ता पुंगवों के चेहरे निकल आए। एक मंत्री हिम्मत बढ़ाते हुए बोले : सरकारें काम कर रही हैं, जनता महसूस कर रही है। (सच है : जनता ने महसूस करके ही वोट दिया है सर जी!) दूसरे बोले : लंबी छलांग लगाने के लिए दो कदम पीछे हटना पड़ता है! (क्या बात है? मेरी कश्ती वहीं डूबी जहां पानी कम था!) रालोद के जयंत चौधरी ने कैराना के चुनाव को इस सटीक नारे से समझा दिया कि ‘जिन्ना हारा, दंगा हारा, गन्ना जीता’! एबीपी ने नारा लपक लिया और बजाने लगा : ‘जिन्ना हारा गन्ना जीता’! ‘जिन्ना हारा गन्ना जीता’!

लेकिन ये अर्णव भाई को क्या हुआ? उपचुनावों में भाजपा की बड़ी हार के बाद अर्णव ने ऐसा सुर बदला कि हम भी उनकी अदा पर न्योछावर हो गए : पहले पल से वे भाजपा के प्रवक्ता के पीछे पड़ गए कि आपके चेहरे पर आज उदासी छाई है। आप गिर रहे हैं, आप गिर रहे हैं, आप गिर रहे हैं, आप गिर रहे हैं, आप गिर रहे हैं, आप गिर रहे हैं। आधे मिनट में उनने प्रवक्ता को इतनी बार गिराया कि हमारी भी देह पिराने लगी! सच है : जिन्ना हारा, गन्ना जीता!

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