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बाखबरः काहे की किट किट

चर्च बरक्स सरकार इतना जमा रहा कि तूतीकोरिन की तूती चैनलों को डेढ़ दिन बाद ही सुनाई दी! हमारे चैनल अपने ही शोर में कई बार बहरे हो जाते हैं। ऐसे हत्याकांडों की खबर भी डेढ़ दिन बाद सुनाई पड़ती है।

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एक शादी लंदन छाप। एक शादी बंगलुरू छाप। लंदन के दूल्हा-दुलहन बैठे टमटम टमटम। रानी जू टमटम। प्रिंस जू टमटम। हमारे अंग्रेजी चैनल एकदम टमटम। जिस अंग्रेजी चैनल को राहुल की डाइनेस्टी जरा भी नहीं सुहाती, उसे लंदनवाली डाइनेस्टी सुहाती है, टमटम! बंगलुरू वाली टमटम में पूरी विपक्षी बारात दिखी। इतने नामी बाराती एक साथ और इतने खुश! इसे कहते हैं सीन बनाना। विपक्ष को भी दमदार बनाना आ गया है। सबकी बत्तीसी खिली, मानो बंगलुरू वाली टमटम सदा सुहागिन रहने वाली हो! ऐतिहासिक सीन बनाने में सोनिया का जवाब नहीं। मायावती का हाथ पकड़ा और अपना माथा माया के माथे से रगड़ा! अद्भुत राजनीतिक भविष्यवादी दृश्य। एंकर व्याख्या में व्यस्त कि इसके मानी क्या? ऐसी सिंहासन बत्तीसी थी कि हर पुतली खुश थी। सोनिया, राहुल, माया, अखिलेश, ममता बनर्जी, शरद पवार, शरद यादव, तेजस्वी यादव, सीताराम येचुरी, डी राजा, चंद्र बाबू नायडू, देवेगौड़ा और पूरा परिवार, कुमार स्वामी, परमेश्वरा और न जाने कौन कौन! विघ्न संतोषी चैनल शिवकुमार की खिन्नता खोजते फिरे, लेकिन वे प्रसन्नता चिपकाए रहे। सब नेता बार-बार ग्रुप फोटो करने लगे कि ‘तू भी आ जा। फोटो खिंचा जा। इतिहास बना जा!’

आधी रात के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट से किसी को शिकायत नहीं रही। सुपीम कोर्ट ही इस सीन का ‘हीरो’ था! हाय! बारात पंद्रह दिन बाद चढ़ती तो दूल्हा शायद वही रहता। सुप्रीम कोर्ट बारात को चौबीस घंटे में चढ़ाने को कह दिया और भैये दूल्हा बदल गया और पहले वाला दूल्हा एक हताशावादी भाषण देकर, ‘जन गण मन’ पर खड़े हुए बिना ही विधानसभा से निकल लिया। ऐसे में भाजपा न बिसूरती तो क्या करती? हमदर्दी में दो चैनल शाम तक नए बारातियों की एकता में पंक्चर करने लगे। एक बोला- सात भात की खिचड़ी कब तक चढ़ेगी? खिचड़ी देखते ही रिपब्लिक का एंकर बोला : नो खिचड़ी। भारत को चाहिए स्थिरता। यह ‘गठबंधन अपवित्र’ है। यही भाषा भाजपा के एक प्रवक्ता की थी। उसने लाइन दी : क्या छोटी-छोटी पार्टियां मोदी के रथ को रोक सकती हैं?

ममता ने नारा दे डाला : जो हमसे टकराएगा चूर चूर हो जाएगा। रिपब्लिक ने पकड़ा ‘चूर चूर चूर चूर’ और बहस कराने लगा। चूर चूर का मतलब ‘चूरमा का लड्डू’ भी होता है सरजी, जो जेवनार में परोसा जाता है। कभी खाएं तो जानें! बंगलुरू वाली टमटम की कहानी इस कदर हिट रही कि एनडीटीवी पर भाजपा अध्यक्ष की प्रेस कान्फ्रेंस कुछ ही देर तक टिकी। ‘मोदी बरक्स बाकी सब’ वाली नायाब कहानी को किनारे किया एक आर्कबिशप जी की ‘कलहकारी’ चिट्ठी ने! बिशप जी हर चैनल पर छा गए। एक बहस में विश्व हिंदू परिषद वाले ने ठोंका : दो हजार उन्नीस में सरकार को हराने के लिए पत्र जारी करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

आर्कबिशप की ‘कलहकारी’ चिठ्ठी से नाराज एक अंग्रेजी चैनल का एक महान एंकर रात के नौ बजे चीखा : चर्च क्या राहुल का समर्थन कर रहा है? क्या चर्च सेक्युलर सरकार के लिए अभियान चला रहा है? एंकर से किसी ने न पूछा कि सरजी! तब क्या आप किसी कम्युनल सरकार के लिए अभियान चला रहे हैं? इस बीच तूतीकोरिन में गोली चालन हो गया। वेदांता के स्टरलाइट कारखाने के जहरीले प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन करते दर्जन भर लोग मारे गए। लेकिन चर्च बरक्स सरकार इतना जमा रहा कि तूतीकोरिन की तूती चैनलों को डेढ़ दिन बाद ही सुनाई दी! हमारे चैनल अपने ही शोर में कई बार बहरे हो जाते हैं। ऐसे हत्याकांडों की खबर भी डेढ़ दिन बाद सुनाई पड़ती है। कमाल तब हुआ जब एक अंग्रेजी चैनल की एक एंकर ने तूतीकोरिन में पुलिस के गोली चलाने के लिए यूपीए को जिम्मेदार ठहराया!

एंकर की ऐसी दुर्लभ प्रस्तुति देख प्रतीत हुआ कि तूतीकोरिन में यूपीए ने ही गोली चलवाई होगी। गोली चली होगी दो हजार चौदह में और लगी है अब जाकर, यानी दो हजार अठारह में! तूतीकोरिन की हाय हाय से छुटकारा दिलाया मंत्री राज्यवर्धन राठौर के फिटनेस चैलेंज ने! उन्होंने चैंलेज किया रितिक रौशन को। रितिक ने साइकिल चला कर वीडियो बना कर अपने फिटनेस का प्रमाण दिया मंत्री को। इससे भी आगे निकल कर विराट कोहली ने अपनी फिटनेस दिखा कर फिटनेस चैलेंज फेंका सीधे प्रधानमंत्री को। प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट कर विराट के फिटनेस चैलेंज को स्वीकार किया।
गजब! कैसे कैसे उत्तम कोटि के फिटनेस सीन दिखे? मंत्री रिजिजू, जयंत सिन्हा आदि दपफ्तरों में दंड पेलते दिखे। उधर अनुष्का, सायना नेहवाल, पीवी सिंधू सब अपनी फिटनेस की तरकीबें दिखाते रहे।

इतने मस्त सीन चल रहे थे कि राहुल ने फिर ट्वीट कर फिटनेस फंडे में विघ्न डाला। कह उठे कि पहले पेट्रोल के दाम तो फिट करो। फिर क्या था? कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सामाजिक फिटनेस की सूची ही लगा दी। उधर तेजस्वी ने भी लगे हाथ बेरोजगारी को फिट करने की सूची दे दी।
कैसी विडंबना है कि तूतीकोरिन की बर्बर खबरों के बीच भी फिटनेस का फंडा चलता रहा! चैनल फिटनेसवादी लाइन देते रहे : हम फिट तो भारत फिट!काहे की किट किट?

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