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बाखबर- गुजरात वाया उत्तर प्रदेश

एक चैनल स्प्लिट स्क्रीन कर एक ओर मोदी की रैली दिखाता है, जिसमें महिलाएं ज्यादा संख्या में दिखती हैं, तो दूसरी ओर हार्दिक की रैली में युवा अधिक दिखाई देते हैं। मोदी ज्यादा कवर होते दिखते हैं हार्दिक कम!
Author December 3, 2017 02:21 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

गुजरात में चुनाव अभियान का सीधा प्रसारण है। मोदी कच्छ में कच्छी में बोलते हैं और बीच में गुजराती में स्विच करते हैं, तो बाकी जगहों पर धारा प्रवाह गुजराती में बोलते हैं। जनता हाथों-हाथ लेती है। भाषागत अस्मिता काम कर रही है। गुजराती पगड़ी, गुजराती मुहावरे, गुजराती व्यंजनाएं अपना काम करती हैं। लोग ताली बजाते हैं। मोदी खुश होते हैं। इसे कहते हैं जनता से सीधा संपर्क!  मोदी एक एक दिन में चार-चार रैली कर रहे हैं। वही उत्तर प्रदेश वाला धुआंधार फार्मूला और अथक बोलना। यह भी जनता पर असर डालता है। आप जब भी टीवी खोलते हैं, आपको मोदी ही दिखाई देते हैं। मोदी की जबर्दस्त मौजूदगी से आप बच नहीं सकते। उनकी अथकता के रुतबे की चपेट में दर्शक आते होंगे। उनके प्रतिस्पर्धी भी उनकी ऊर्जा से जलते होंगे! चैनल हमें ऐसे ही दुर्धर्ष मोदी को दिखाते हैं। सिर्फ हार्दिक की रैली उनकी रैली से मेल खाती है। एक चैनल स्प्लिट स्क्रीन कर एक ओर मोदी की रैली दिखाता है, जिसमें महिलाएं ज्यादा संख्या में दिखती हैं, तो दूसरी ओर हार्दिक की रैली में युवा अधिक दिखाई देते हैं। मोदी ज्यादा कवर होते दिखते हैं हार्दिक कम!

राहुल जब भी मोदी सरकार पर हमला करते हैं तब तब मजेदार बाइट देते हैं, लेकिन वे अक्सर विवाद में फंस जाते हैं या फांस लिए जाते हैं: सोमनाथ के दर्शन के लिए जाने तक उनकी खबर ठीक-ठाक रही। हर चैनल उनके इस फोटोअप को दिखाता रहा, लेकिन ज्यों ही भाजपा ने गैर-हिंदू प्रवेश पंजिका पर दस्तखत करने को लेकर उनके हिंदू होने पर सवाल उठाए, तो कांग्रेस एकदम रक्षात्मक हो उठी।  सुरजेवाला को बताना पड़ा कि राहुल जनेऊधारी शिवभक्त हैं, यह देखिए उनका फोटो। स्वामी बोेले कि सोनिया जहां रहती हैं वहां एक चर्च है। यह विवाद चैनलों में ऐसा घमासान मचाए रहा कि विकास के मुद्दे और गुजरात के कथित विकास पर राहुल के कटाक्ष भी बेकार हो गए।  बहसें सीधे धार्मिक विभाजन की ओर मुड़ गर्इं: राहुल पारसी हंै कि ईसाई हैं कि वे जनेऊधारी हैं… धार्मिक पहचान का अखाड़ा तो भाजपा का अपना अखाड़ा है, जिसमें वह दुर्जेय है!  गुजरात का एजंडा बदल गया। चैनलों में ह्यशिवभक्त राहुल बरक्स शिवभक्त मोदी होने लगा। एनडीटीवी की निधि ने पूछा, इस तरह के साफ्ट हिंदुत्व से क्या मतलब? भाजपा के पक्षधर जफर सरेसवाला का जवाब रहा: कांग्रेस फेक हिंदुत्ववादी होने की कोशिश कर रही है। लोग फेक हिंदुत्व की जगह रीयल हिंदुत्व की ओर जाएंगे। जितनी बाइट चैनलों में होती है, उससे ज्यादा उनके अर्थ बहते हैं और आप इस तरह हर बाइट को गुजरात के चुनाव की ओर दौड़ता देख सकते हैं। हर बाइट विभाजित करती नजर आती है।

हादिया का मामला लव जिहाद है कि शुद्ध लव स्टोरी है? बहसों में हिंदुत्व के पक्षधर उसकी सब-टेक्स्ट बनाते दिखते हैं। उसका लव जिहादिस्ट पाठ बताते चलते हैं। जितनी बार हादिया नजर आती है, अदालत के आदेश के बावजूद उतनी ही बार एक गांठ लगी रह जाती है कि हादिया का सच क्या है? यह हादिया का हिंदुत्ववादी पाठ है, जो सीधे भले न कहा जा रहा हो, लेकिन हादिया की कहानी में गूंजता रह जाता है! यह गूंज अपने आप में दूसरी अनुगूंजों में मिश्रित होने लगती है। और इन दिनों तो ऐसी अनुगूजें ही अनुगंूजें ही हैं।
मुलायम सिंह की पुत्रवधू अपर्णा अपने छोटे भाई की शादी में पद्मावती वाला घूमर नाचती हैं और हर चैनल उसे दिखाता है और देखते-देखते पद्मावती का विरोध करने वाले रणबांकुरे इस नाच तक को पद्मावती-विवाद का हिस्सा बना डालते हैं। एक कहता है कि अपर्णा हमारी पंरपरा की तौहीन करती है, अपर्णा राजनीति छोड़ दो और नचनिया बन जाओ! ऐसी स्त्री-विरोधी भाषा के बावजूद इसे लेकर कोई विरोध नहीं दिखता!  अब अगर नाचना भी है तो उनसे पूछ कर नाचना है! ऐसा लंपट विमर्श मुख्यधारा में जम चुका है। हर तरफ पद्मावती है। कुछ स्वयं नियुक्त पगड़ीधारियों की काटो-मारो की ललकार है। वे हर रोज किसी न किसी को काटने की बात कह कर खबर बना देते हैं और चैनल पूरे दिन उसे ह्यशॉकर की तरह बजाते हैं कि रणवीर (जो पद्मावती में खिलजी बने हैं) की टागें काट देंगे।

चैनल उत्तेजित होकर खबर दे रहे हैं: पद्मावती को लेकर संसदीय समिति की बैठक हो रही है। भंसाली की हाजिरी हो रही है। प्रसून जोशी को भी बुलाया गया है। दो अंग्रेजी चैनल उन सवालों को सबके सामने रखने लगते हैं, जिनको कथित रूप से समिति पूछने वाली है और यही चैनल समिति के हवाले से बताने लगते हैं कि समिति ने भंसाली को ग्रिल किया है यानी रगड़ा है! सिर्फ इंडिया टुडे के पीपुल्स कोर्ट में पद्मजा तंज करते हुए पूछती हैं कि क्या अब रचनात्मकता का पैमाना संसद तय किया करेगी?हर बाइट विभाजनकारी हुई जाती है, एक चैनल बताता है कि देवबंद के किसी मौलाना ने कहा है कि पद्मावती खिलजी को बदनाम करती है। गनीमत रही कि मौलाना की इस बहक को किसी चैनल ने भाव नहंीं दिया, नहीं तो यह बाइट और विभाजनकारी बन जाती! ह्यहिंदू बरक्स मुसलमान होता रहता। ये ऐसे दिन हैं कि हर बाइट हिंदुत्व की ओर लुढ़कती दिखती है।  सप्ताह की पांच सितारा खबर इवांका ट्रंप ने दी। वे हजारों उद्यमियों की हीरोइन बनी रहीं। लेकिन शुक्रवार की दोपहर तक आए उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकायों के चुनावों के नतीजे भाजपा की धांसू जीत पर और कांग्रेस की करारी हार पर मुहर लगा गए। एबीपी चैनल पर एक टिप्पणीकार ने कहा भी कि उत्तर प्रदेश के ये परिणाम गुजरात में भाजपा का हौसला आफजाई करेंगे!

 

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