भावेष पांडेय
Zero Tolerance on Crime in UP: उत्तर प्रदेश में अब किसी बड़ी आपराधिक घटना के बाद लोगों के मन में पहला सवाल यह नहीं उठता कि अपराधी कौन है, बल्कि यह उठता है कि आखिर वह पुलिस से कितनी देर बच पाएगा। पिछले करीब 9 वर्षों में प्रदेश की कानून-व्यवस्था की तस्वीर काफी बदली है। अब अपराध की खबर अक्सर गिरफ्तारी, गैंगस्टर एक्ट, बुलडोजर या पुलिस एक्शन की खबर के बिना अधूरी मानी जाती है। यही वजह है कि आज कानून-व्यवस्था को लेकर देशभर में ‘यूपी मॉडल’ की चर्चा होती है।
इसकी ताजा मिसाल रविवार को गाजियाबाद के खोड़ा में देखने को मिली। 17 वर्षीय सूर्या चौहान की नृशंस हत्या ने लोगों को झकझोर दिया था। परिवार इंसाफ मांग रहा था, इलाके में गुस्सा था। लेकिन मामला लंबी जांच या फाइलों में नहीं अटका। घटना सामने आने के कुछ घंटों के भीतर पुलिस एक्टिव हुई और मुख्य आरोपी असद पुलिस कार्रवाई में मारा गया। यह सिर्फ एक एनकाउंटर नहीं था, बल्कि उसी संदेश की दोहराव था जो यूपी पिछले कई वर्षों से देता आया है-अपराध करोगे तो कानून पीछा छोड़ने वाला नहीं है।
लेकिन सूर्या चौहान कोई अकेला मामला नहीं है। सूर्या मामले से ठीक पहले सहारनपुर में पुलिस ने एक लाख के इनामी बदमाश एहसान को मुठभेड़ में मार गिराया। उस पर लूट, डकैती, रंगदारी समेत कई गंभीर मामले दर्ज थे। पुलिस के मुताबिक, उसने फायरिंग की, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में वह ढेर हो गया।
कन्नौज और बदायूं की घटनाएं
कन्नौज में कुछ दिन पहले ज्वैलर्स की पत्नी की दिनदहाड़े हत्या और लूट ने लोगों को हिला दिया था। लेकिन यूपी पुलिस ने तीन दिन के भीतर आरोपी शालू को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। इसी तरह बदायूं में मार्च महीने में एचपीसीएल प्लांट का दोहरा हत्याकांड सामने आया। मामला गंभीर था, लेकिन पुलिस ने तुरंत टीमें बनाईं और आरोपी को हाफ-एनकाउंटर के बाद पकड़ लिया। बदायूं में ही हाल में कच्छा-बनियान गैंग के बदमाशों को भी लूट की घटना के बाद तेजी से गिरफ्तार किया गया।
अलीगढ़ में एनकाउंटर
अलीगढ़ में करीब 70 मामलों में वांछित अपराधी राज मोहम्मद और उसके साथी मोमिन पर हुई कार्रवाई भी इसी बदलती तस्वीर का हिस्सा है। दोनों जेल से बाहर आने के बाद फिर अपराध में जुट गए थे। लेकिन एक महिला से लूट की घटना के बाद पुलिस ने कुछ ही दिनों में उनका एनकाउंटर कर दिया।
अगर इन घटनाओं को एक साथ जोड़कर देखें तो तस्वीर साफ दिखाई देती है। उत्तर प्रदेश में अब अपराध के मामलों में “पहले कार्रवाई, फिर लंबा इंतजार” वाला दौर बदलता नजर आता है। यही वजह है कि सरकार अपने मॉडल को “जीरो टॉलरेंस” कहती है।
आंकड़े भी कहानी बता रहे हैं
सरकारी आंकड़े भी इसी तस्वीर को मजबूत करते हैं। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद 20 मार्च 2017 से 15 मई 2026 तक उत्तर प्रदेश में 17,043 पुलिस कार्रवाई/मुठभेड़ हुईं। इन अभियानों के दौरान 34,253 आरोपी गिरफ्तार किए गए। 11,834 आरोपी घायल हुए और 289 अपराधी मारे गए। वहीं, इन अभियानों में 1852 पुलिसकर्मी घायल हुए और 18 पुलिसकर्मियों ने जान गंवाई।
ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं हैं। ये उस कानून-व्यवस्था मॉडल की कहानी बताते हैं जिसमें अपराध के बाद सिर्फ केस दर्ज नहीं होता, बल्कि कार्रवाई दिखाई भी देती है। इससे आम लोगों के मन में न्याय का भरोसा बढ़ा है और अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा हुआ है।
(भावेष पांडेय इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में अधिवक्ता हैं। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करते हैं।)
