मुरादाबाद में ई-बाइक और ई-स्कूटी को बढ़ावा देने की पहल केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि शहर को प्रदूषण और ट्रैफिक जाम से बाहर निकालने की गंभीर कोशिश के रूप में सामने आई है। इस पहल का नेतृत्व मुरादाबाद के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह कर रहे हैं।

खास बात यह है कि उन्होंने खुद ई-बाइक से दफ्तर जाना शुरू किया, ताकि लोग इसे केवल भाषण या प्रचार नहीं बल्कि व्यवहारिक बदलाव के रूप में देखें। उनका कहना है कि यह कदम प्रधानमंत्री की मितव्ययिता या सादगी संबंधी अपील का दिखावटी पालन नहीं है, बल्कि मुरादाबाद जैसे प्रदूषित और भीड़भाड़ वाले शहर के लिए एक वास्तविक समाधान खोजने की कोशिश है।

साढ़े तीन साल पहले शुरू की पहल, अब दिखाई दे रहे परिणाम

करीब साढ़े तीन साल पहले शुरू हुई इस पहल ने अब लोगों के बीच अपनी जगह बनानी शुरू कर दी है। ई-बाइक को लेकर लोगों की रुचि इसलिए भी बढ़ी क्योंकि इसे चलाना आसान है और इसकी लागत पारंपरिक वाहनों की तुलना में काफी कम है। लगभग 20 रुपये प्रति घंटे के खर्च में इसे संचालित किया जा सकता है। शहर में अब 300 से अधिक ई-बाइक मौजूद हैं और इनकी संख्या बढ़ती जा रही है।

प्रशासन ने इस परियोजना के लिए विस्तृत दिशानिर्देश भी तैयार किए हैं। सोलर यूनिट लगाने की योजना बनाई गई है ताकि चार्जिंग व्यवस्था को पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके। सार्वजनिक सेवाओं में भी ई-वाहनों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है, जिससे डीजल जनरेटर और ईंधन आधारित वाहनों पर निर्भरता कम हो।

किराये पर भी उपलब्ध होगी ई-बाइक

ई-बाइक की कीमत लगभग 25 हजार रुपये बताई गई है, जबकि किराये और लीज मॉडल पर भी इन्हें उपलब्ध कराया जा रहा है। लगभग 600 रुपये के किराये पर ई-बाइक लेने की सुविधा लोगों के लिए इसे और सुलभ बनाती है।

जनसत्ता डिजिटल से बात करते हुए आंजनेय कुमार ने कहा, “यदि शहर में ई-बाइक के लिए अलग लेन बनाई जाए, फुटपाथ बेहतर हों और ट्रैफिक प्रबंधन मजबूत किया जाए, तो लोग स्वाभाविक रूप से छोटे सफर के लिए कारों की बजाय ई-बाइक का इस्तेमाल करने लगेंगे। इससे ट्रैफिक जाम कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी।”

मुरादाबाद, जो अक्सर देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल रहता है, वहां यह पहल केवल परिवहन का विकल्प नहीं बल्कि शहरी जीवनशैली में बदलाव का संकेत मानी जा रही है। उद्देश्य साफ है – लोगों की जिंदगी को आसान बनाना, शहर को स्वच्छ बनाना और आने वाले समय के लिए टिकाऊ परिवहन मॉडल तैयार करना।