क्या प्रसाद में चर्बी मिले लड्डू खा लेने से धर्म हो जाता है भ्रष्ट? प्रेमानंद महाराज
प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज के अनुसार, आजकल प्रसाद में मिलावट की चिंता होती है, लेकिन भाव ही महत्वपूर्ण है। यदि भगवान को अर्पित किया गया है, तो वह प्रसाद ही है, चाहे उसमें कुछ भी हो। प्रसाद का सम्मान उसके भाव में है, सामग्री में नहीं। महाराज जी कहते हैं कि प्रसाद में अशुद्धि की बात करना उसके दिव्य स्वरूप को कम करना है। मिलावट से बचना चाहिए