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Movie Review: कड़वी सच्चाई को दर्शाती है तितली

समाज में कई तरह की तहें होतीं है और कई तरह के अपराध। जो अपराध कर रहे होतें हैं उनमें भी कई ऐसे होते हैं जो हालात के मारे होते हैं और समाज में निचले पायदान पर होते हैं।

निर्देशक-कनु बहल
कलाकार-रणबीर शोरी, अमित सियाल, शशांक अरोड़ा, शिवानी रघुवंशी, ललित बहल
समाज में कई तरह की तहें होतीं है और कई तरह के अपराध। जो अपराध कर रहे होतें हैं उनमें भी कई ऐसे होते हैं जो हालात के मारे होते हैं और समाज में निचले पायदान पर होते हैं। इसी तरह के तीन भाई हैं- बिक्रम (रणबीर शौरी), बावला (अमित सियाल) और तितली (शशांक अरोड़ा)।

ये मिलकर कारचोरी का धंधा करते हैं लेकिन परेशान हैं। मारपीट और हिंसा भी। तीसरा और छोटा भाई तितली इस माहौल से निकलना चाहता और अपने रोजगार के लिए पार्किंग की एक जगह खरीदना चाहता है। पर हालात ऐसे बनते हैं कि उसकी शादी नीलू (शिवानी) से करा दी जाती है जो किसी और से इश्क करती है।

तितली उड़ना चाहता है पर क्या वो ऐसा कर सकेगा? तितली’ एक व्यावसायिक फिल्म नहीं है बल्कि एक सामाजिक टिप्पणी की तरह है और उन लोगों की मनोवैज्ञानिक, रिवारिक और आर्थिक पेचीदगियों को दर्शाती है जो बेहतर जिंदगी तो गुजारना चाहते हैं लेकिन अपराध के भंवर में फंस जाते है और चाहकर भी उससे निकल नहीं पाते। युवा निर्देशक कनु बहल ने, जो ललित बहल के बेटे भी हैं, उस दुनिया को दिखाया है जिसमें कई तरह के छलावे हैं।

नीलू एक शादीशुदा प्रॉपर्टी डीलर से इश्क करती है और उसे लगता है कि उसके लिए वो (प्रॉपर्टी डीलर) अपनी पत्नी को छोड़ देगा। तितली से शादी के बाद भी वो सुहागरात में उससे कोई रिश्ता नहीं बनाती। पर क्या उसका प्यार भी एक छलावा है? फिल्म में खंखारने और ओ ओ करने की आवाज कम होती तो शायद और बेहतर होती। लेकिन एक युवा निर्देशक की पहली फिल्म के रूप में ये असर जरूर छोडती है।

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