Raabta Movie Review: दो जन्मों में पसरी कहानी- Sushant Singh Rajput, Kriti Sanon’s Raabta Movie Review - Jansatta
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Raabta Movie Review: दो जन्मों में पसरी कहानी

वैसे तो दो जन्मों में फैली प्रेम कहानी ‘मगाधीरा’ ( तेलगु फिल्म जिसके निर्देशक केएस राजमौलि हैं) में थी लेकिन उसमें कोई चीज चेंपी हुई नहीं लगती थी।

वैसे तो दो जन्मों में फैली प्रेम कहानी ‘मगाधीरा’ ( तेलगु फिल्म जिसके निर्देशक केएस राजमौलि हैं) में थी लेकिन उसमें कोई चीज चेंपी हुई नहीं लगती थी। बड़े बजट की फिल्म होने के बावजूद ‘राब्ता’ में कसावट नहीं है। इसलिए ‘मगाधीरा’ जैसा प्रभाव नहीं होता। हालांकि ‘मगाधीरा’ के निर्माताओं ने ‘राब्ता’ के निर्माता पर कहानी चुराने का आरोप वापस ले लिया है लेकिन फिल्म देखने के बाद यह तो कहा ही जा सकता है कि इसे देखते हुए ‘मगाधीरा’ की याद न आए यह नहीं हो सकता।

‘राब्ता’ में शिव (सुशांत सिंह राजपूत) नाम का एक पंजाबी पुत्तर यानी नौजवान है जो नौकरी करने के लिए बुडापेस्ट पहुंचता है। शिव आशिक मिजाज है। पटाने की कला में माहिर है। बुडापेस्ट में एक चॉकलेट दुकान पर उसकी मुलाकात होती है सायरा (कृति सैनन) से। अपने हुनर से शिव सायरा को पटा लेता है। अब होता है खलनायक का प्रवेश। जाकिर मर्चेंट (जिम सर्भ) नाम का एक बहुत बड़ा व्यापारी भी सायरा पर मोहित हो गया है। उधर सायरा दीवानी हो गई है शिव की। मगर जाकिर को ना सुनना गवारा नहीं। आखिर क्यों हो? उसके पास अपार पैसा है। वह जिसे चाहे खरीद सकता है।

मामला इतने तक सीमित नहीं है। तीनों के बीच पिछले जन्मों का भी लफड़ा है। यानी फ्लैशबैक का लंबा सिलसिला है। जाहिर है कि पिछले जन्म के लफड़े अगर इस जन्म तक चले आएं तो आसानी से हल नहीं होते। सो, कई तरह के दांवपेंच फिल्म में हैं। यानी एक्शन सीन के धांसू दृश्य है। एक और धांसू चीज है। दीपिका पादुकोण का डांस। फिर भी ‘राब्ता’ कुछ टूटी हुई कुछ बिखरी फिल्म है। दो जन्मों की कहानी का मेल ठीक से नहीं होता। हालांकि सुशांत सिंह राजपूत और कृति सैनन दोनों ही अपने-अपने दृश्यों में जानदार रहे हैं। पर सिर्फ अभिनय से बात नहीं बनती है ना। अगर फिल्म के अलग अलग तत्वों का ठीक से मेल न हो तो वह विचित्र-सी खिचड़ी हो जाती है। ‘राब्ता’ के निर्देशक दिनेश विजन ‘कॉकटेल’ जैसी फिल्मों के निर्माता रहे हैं। इस बार उन्होंने निर्देशन में हाथ आजमाने का फैसला किया। यदि सिर्फ हाथ आजमाने की बात है तो अलग मसला है मगर हाथ में आया क्या? इस सवाल का जवाब दर्शक के पास नहीं है। शायद निर्देशक के पास हो।

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