ताज़ा खबर
 

Sardar Ka Grandson Review: सलमान खान, सनी देओल जैसे पाकिस्तान जाकर अर्जुन कपूर ने क्या किया अलग? जानिए..

अमृतसर में रहनेवाला अमरीक अमेरिका में बिजनेस करने जाता है और गर्लफ्रेंड राधा (रकुल प्रीत सिंह) के साथ सामान यहां से वहां ले जाने या पहुंचाने का धंधा करता है।

Sardar Ka Grandson में रकुलप्रीत और अर्जुन कपूर

बॉलीवुड अभी तक मां पर केंद्रित है।`मेरे पास मां है’ सिर्फ एक डॉयलाग नहीं है, एक जज्बा भी है। `सरदार का ग्रैंडसन’ के बाद ये कहा जा सकता है कि अब `मेरे पास एक दादी है’ जैसा डॉयलाग और जज्बा भी मशहूर हो सकता है। फिल्म में दादी है सरदार कौर (नीना गुप्ता) और पोता है अमरीक सिंह (अर्जुन कपूर)। अमृतसर में रहनेवाला अमरीक अमेरिका में बिजनेस करने जाता है और गर्लफ्रेंड राधा (रकुल प्रीत सिंह) के साथ सामान यहां से वहां ले जाने या पहुंचाने का धंधा करता है।

पर बंदा अमरीक ऐसा निखट्टू है कि किसी भी काम को ठीक से नहीं कर पाता इसलिए राधा से रिश्ता गड़बड़ा जाता है। इसी बीच अमरीक को खबर मिलती है कि उसकी दादी सरदार कौर अमृसतर में बीमार है और वो भागते भागते वहां पहुंचता है। और फिर बीमार और मरनासन्न दादी के जज्बातों का ध्यान रखते हुए वह पाकिस्तान चला जाता है। क्यों? इसलिए कि दादी का दिल उसके पुश्तैनी मकान में अटका हुआ है। वो तय करता है कि लाहौर से उसका यानी दादी का पुराना घर ही उखाड़ कर और ट्रक पर लाद कर ले आएगा। फिर दादी खुश हो जाएगी। विचित्र किंतु सत्य जैसा कुछ।

फिल्म दादी और पोते के रिश्ते का अलावा भारत-पाकिस्तान बंटवारे और तनाव की भावना से भी जुड़ी है। इस बारे में कई फिल्में बन चुकी हैं जिसमें सनी देओल की `गदर’ और सलमान खान `बजरंगी भाईजान’ प्रमुख हैं। `सरदार का ग्रैंडसन’ दोनों से थोड़ी मिलती जुलती है लेकिन ज्यादा नहीं।

इसमें पाकिस्तान के खिलाफ वाली मानसिकता कम है। हां, कुमद मिश्रा ने मेयर वाला जो किरदार निभाया है और जो अमरीक की राह में कई तरह के रोड़े अटकाता है, वो खलनायक का काम करता है। लेकिन बाकी के लाहौरिये उसकी मदद करते हैं।

फिल्म में रोमांटिक पहलू भी है लेकिन कमजोर। रकुल प्रीत और अर्जुन कपूर के साथ वाला गाना अनावाश्यक और असंगत लगता है। निर्देशक को लगा होगा कि हीरो होरोइन को साथ में नचाते गाते एक गाना न दिखाया तो बात नहीं बनेगी। पर ये सीन ठूंसा हुआ लगता है। फिर पूरे मकान को उखाड़कर भारत लाने का जो टेंसन हो सकता है वो फिल्म में कहीं नहीं है।

सब कुछ लगभग गुड़ी गुडी तरीक से हो जाता है। हां, दादी के किरदार में नीना गुप्ता जमी हैं। अर्जुन कपूर बस ठीक ठाक हैं और रकुलप्रीत तो इसलिए हैं कि फिल्म में एक हीरोइन तो चाहिए, नहीं तो फॉर्मूला खराब हो जाएगा। निर्देशक काश्वी नायर की ये पहली फिल्म है जिसे औसत कह सकते हैं। ये फिल्म भी नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है।

फिल्म रिव्यू: सरदार का ग्रैंडसन (2*)
निर्देशक- काश्वी नायर
कलाकार- अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंह, नीना गुप्ता, ज़ॉन अब्राहम, सोनी राजदान, कुमुद मिश्रा

Next Stories
1 Radhe बनकर सलमान खान कर रहे गुंडों की सफाई, ‘सीटी मार’ फिल्म है ये एक्शन ड्रामा
2 The Big Bull Movie Review: शेयर बाजार की कालाबाजारी का सच दिखाती अभिषेक बच्चन की ‘द बिल बुल’
3 Mumbai Saga Movie Review: भाईगिरी और एनकाउंटरगिरी की मसालेबाजी है मुंबई सागा
ये पढ़ा क्या?
X