ताज़ा खबर
 

Pagalpanti Movie Review: कॉमेडी पंती ही ‘पागलपंती’ है

Pagalpanti: फिल्म को इस अर्थ में पेंचदार बनाने की कोशिश की गई है कि एक के बाद एक कहानी में ट्विस्ट आते रहते है। बीच बीच में एक दूसरे का पीछा करने के जो सीन है इनको भी ऐसा बनाया गया है कि हंसी छूटती रहे।

पागलपंती फिल्म का पोस्टर।

रवींद्र त्रिपाठी

ये एक कॉमेडी फिल्म है। जैसा कि हिन्दी की ज्यादातर हास्य फिल्मों में होता हैं, इसके भी कई सारे सीन बेसिर पैर के है। फिर भी ये शुरू से अंत तक हंसाती है और भरपूर हंसाती है। हां, आखिरी हिस्से में कुछ ढ़ीली जरूर हो जाती है। बावजूद इसके फिल्म अपने हिस्से के हास्य को बचाए रखती है। आखिर में निर्देशक ने इसमें देशभक्ति का मसाला भी डाल दिया है। और देश भक्ति भी किस तरह की? वो इस तरह कि एक खलनायक नुमा शख्स से ये सवाल पूछा जाता है जब विराट कोहली 99 पर आउट हो जाता है तो दिल में दर्द होता है कि नहीं? बस हो गई देशभक्ति। फिल्म में इंगलैंड की कहानी है।

तीन लोगों के इर्द-गिर्द घूमती है कहानीः

बहरहाल ‘पागल पंती ‘ नाम की ये फिल्म तीन लोगो के इर्द गिर्द घूमती है। एक तो है राज किशोर यानी जॉन अब्राहम। उसके दो दोस्त भी है। एक है चंदू यानी पुलकित सम्राट। और दूसरा है जंकी यानी अरशद वारसी। इन तीनों के बारे में एक पंडित का कहना है ये पनौती हैं अर्थात जहां भी जाते है वहां कुछ न कुछ अशुभ हो जाता है। ये पटाखे की दुकान खोलते है तो उद्घाटन के दिन उसमें आग लग जाती है। फिर ये डॉन राजा साहब (सौरभ शुक्ला) की बेटी (कीर्ति खरबंदा) की बर्थडे पार्टी में एक कार गिफ्ट के रूप में पहुंचाने जाते है तो रास्ते में ही कई धक्के लगने की वजह से वो चूर चूर हो जाती है। राजा साहब और उनका रिश्तेदार वाईफाई (अनिल कपूर) इन तीनों को अपना नौकर बना के रख लेते हैं। फिर दुर्भाग्य ना इनका पीछा छोड़ता है और ना राजा साहब और वाईफाई का। राजा साहब को नीरज मोदी नाम के जालसाज से मोटी रकम कर्ज के रूप लेनी पड़ती है। पर राज किशोर, चंदू और जंकी की वजह से वो पैसा भी हाथ से निकल जाता है।

अब क्या होगा। राज किशोर, चंदू और जंकी हमेशा ऐसे ही रहेंगे या इनकी किस्मत बदलेगी? क्या ये तीनों जिस इश्क में पड़े हैं उसमें सफलता मिलेगी या वहां भी बदकिस्मती इन तीनों का साथ नहीं छोड़ेगी?

फिल्म को इस अर्थ में पेंचदार बनाने की कोशिश की गई है कि एक के बाद एक कहानी में ट्विस्ट आते रहते है। बीच बीच में एक दूसरे का  पीछा करने के जो सीन है इनको भी ऐसा बनाया गया है कि हंसी छूटती रहे। खलनायक खूंखार नहीं लगते बल्कि जोकर की तरह लगते है। अनिल कपूर, जिनका नाम वाईफाई रखा गया है, उनको काफी डरपोक दिखाया गया है हालांकि वे डॉन है। दर असल डॉन और कॉमेडियन में अंतर खत्म हो गया गया।

भारत में बैंकों से जालसाजी से बड़ी रकम हड़पने वाले नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के आधार पर भी दो चरित्र रखे गए हैं। इनामुल हक ने नीरज मोदी नाम के जिस व्यक्ति का किरदार निभाया है वो नीरव मोदी के काफी करीब है। और नीरज मोदी के रिश्तेदार वाला चोकसी के करीब। अनीस बज्मी की फिल्म में कुछ अजूबा ना हो ये भी नहीं हो सकता इसी बात को साबित करने के लिए इस फिल्म में शेर भी रखे गए है। गुजराती शेर। तीनों हीरोइनों की भूमिका छोटी है। बेचारी उर्वशी रौतेला को काफी देर तक भूतनी बन के रहना पड़ा है। इलिना डिक्रूज और कीर्ति को थोड़ा अधिक वक्त अवश्य मिला है पर वो पर्याप्त नहीं है। लेकिन सौरभ शुक्ला का रोल बड़ा है और वे भी बहुत हंसाते हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 Motichoor Chaknachoor Movie review: मोतीचूर चकनाचूर फिल्म समीक्षा
2 Bala Movie Review: अपूर्णता को स्वीकार करें
3 Ujda Chaman Movie Review: आधी हंसी आधी संजीदगी
जस्‍ट नाउ
X