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एक छोटे गांव की बड़ी ‘प्रेरणा’ की दिल छू लेने वाली कहानी: स्केटर गर्ल

Netflix, Skater Girl, Movie Review:  मंजरी माकीजानी की ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई `स्केटर गर्ल’ एक ऐसी फिल्म है जो जातीय भेदभाव से भरे भारतीय गावों में महिलाओं और बच्चियों को मुक्त रहने की प्रेरणा देती है और खेलने की भी।

फिल्म- स्केटर गर्ल का पोस्टर

Netflix, Skater Girl, Movie Review:  स्केटिंग, या स्केटबोर्डिंग, बच्चों के बीच काफी पॉपुलर हो चला है। लेकिन ये सिर्फ शहरों में ही देखने को मिलता है। पर गावों में साधनहीन बच्चे भी इस खेल में रूचि रख सकते हैं। मंजरी माकीजानी की ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई `स्केटर गर्ल’ एक ऐसी फिल्म है जो जातीय भेदभाव से भरे भारतीय गावों में महिलाओं और बच्चियों को मुक्त रहने की प्रेरणा देती है और खेलने की भी। खेल भी जीवन को बदलता है, ये जताने वाली फिल्म है-स्केटर गर्ल।

मुख्य किरदार प्रेऱणा (रचेल संचिता गुप्ता) राजस्थान के उदयपुर के पास के छोटे से गांव की रहने वाली है। किशोर उम्र की है लेकिन स्कूल नहीं जा पाती क्योंकि पिता के पास न यूनिफॉर्म के लिए पैसे हैं न किताब खरीदने के लिए। पर भाई स्कूल जाता है। और फिर एक दिन उस गांव में भारतीय मूल की पर लंदन में रहने वाली एक लड़की जेसिका (एमी मघेरा) आती है।

उसके माध्यम से गांव के लड़के और लड़कियां स्केटिंग सीखना शुरू करते हैं। प्रेरणा और उसका भाई अंकुश (शाफिन पटेल) स्केटिंग के दीवाने हो जाते हैं। लेकिन न ये गांव के बड़े बुजुर्गों को स्वीकार है औऱ न प्रेरणा के पिता को। इसके अलावा न ही स्कूल मास्टर को। जेसिका की जिद और कई तरह के जद्दोजहद के बाद गांव में स्केटिंग पार्क बनकर तैयार होता है। ऐसे में एक प्रतियोगिता आयोजित होती है।

लेकिन जिस दिन प्रतियोगिता है उसी दिन प्रेरणा की शादी भी है- बाल विवाह। अब क्या होगा प्रेरणा की हसरतों का? फिल्म भारतीय गावों में मौजूद कई तरह की विषमताओं को दिखाती है। कभी गावों में सवर्णों के कुएं अलग होते थे और अवर्णों के अलग। आज दोनों के चापाकल अलग हैं।

आज भी कई गावों में सवर्णों और अवर्णों के बच्चे एक साथ नहीं खेलते। इसके अलावा सामान्य गरीब परिवार पर भी पितृसत्ता हावी है। जहां न महिलाओं की छोटी सी इच्छा पूरी होती है और न छोटी या स्कूल जाती बच्चियों की। भारतीय राज के छोटे दरोगा भी, किसी तरह के सामाजिक बदलाव के विरोधी हो जाते हैं। ऐसी कई चीजों को दिखाते हुए फिल्म स्केटिंग जैसे खेल के माध्यम से नई उमंगो और हसरतों के उभरने की कहानी है।

बदलाव का कोई बीज डाला जाना चाहिए फिर परिवर्तन के पौधे और वृक्ष उगने और पनपने लगते हैं। फिल्म मध्य प्रदेश के एक आदिवासी बहुल गांव के सच्चे वाकये पर आधारित है। इसकी निर्देशक मंजरी माकीजानी `शोले’ फिल्म में बहुचर्तित संवाद `पूरे पचास हजार सरकार’ बोलने वाले कलाकार दिवंबत मैकमोहन की बेटी हैं। प्रेरणा की भूमिका में रचेल संचिता गुप्ता तो प्रभावशाली हैं ही जेसिका की भूमिका में एमी मघेरा भी दर्शक के दिल में बस जाती हैं।

स्केटर गर्ल (2 ½*)
निर्देशक- मंजरी माकीजानी
कलाकार- रचेल संचिता गुप्ता, एमी मघेरा, जोनाथन रेडविन, शाफिन पटेल, वहीदा रहमान

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